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नया हरियाणा

शनिवार, 16 जनवरी 2021

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चाचा के बाद अब काका बने दुष्यंत चौटाला की परेशानी की वजह

इनेलो और जेजेपी के बीच शब्दबाण चलने शुरू हो गए हैं.

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7 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

फतेहाबाद की राजनीति

फतेहाबाद विधानसभा सीट पर पंजाबी शहरी वोट बैंक हमेशा से निर्णायक रहा है। पिछले तीन चुनावों में जिसने भी शहर में पहला या दूसरा स्थान हासिल किया है, उसे फतेहाबाद सीट पर जीत हमेशा मिली है। 2004 के चुनावों में दुड़ाराम शहर से जीत कर निकले थे और वो विधायक बने थे। 2009 में बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने भी शहर से अच्छे वोट मिलने के बाद जीत हासिल की। 2014 में इनेलो से मैदान में उतरे बलवान सिंह दौलतपुरिया ने फतेहाबाद शहर में दुड़ाराम को तीसरे स्थान पर धकेल कर दूसरा स्थान हासिल किया था और यही कारण था कि 57 हजार वोट लेकर भी दुड़ाराम चुनाव हार गए। पिछली बार बलवान सिंह दौलतपुरिया के साथ पंजाबी दिग्गज काका चौधरी, विकास मेहता सरीखे कई बड़े नाम थे, जिनके धुआंधार प्रचार ने बलवान सिंह दौलतपुरिया के शहरी कैंपेन को तूफानी बना दिया था। लेकिन इस बार फतेहाबाद शहर से कई बड़े नाम बलवान के साथ नजर नहीं आएंगे। काका चौधरी तो चुनाव के बाद ही इनेलो से दूरी बना गए तो विकास मेहता व अजय संधु जैसे युवा इनेलो नेता अब हालिया घटनाक्रम के साथ बलवान के साथ दिखेेंगे, इसमें संदेह है। 

हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला के लिए चाचा अभय सिंह के बाद अब फतेहाबाद के नेता काका परेशानी की वजह बनते जा रहे हैं. अभय ने अजय चौटाला पर पैसों में टिकट देने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद के एक उम्मीदवार काका को अजय ने 50 लाख रुपए में टिकट की सैटिंग की थी। उसके आधे पैसे अभी भी बाकी हैं। इसकी जानकारी जजपा के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह से भी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब काका के आधे पैसे अजय ने नहीं लौटाए तो वे निशान सिंह ही अशोक अरोड़ा के पास लेकर आए थे। अशोक अरोड़ा ने इस पर ऐतराज जताया था और कहा था कि इससे पार्टी की छवि खराब होगी। इसके बाद भी काका के आधे पैसे ही लौटाए गए। 


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