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नया हरियाणा

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

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हरियाणवी को मंचों पर स्थापित करने वाले जैमिनी हरियाणवी अब नहीं रहे

झज्जर जिले के बादली गांव में 5 सितंबर 1931 को जन्मे विख्यात हास्य रस के कवि जैमिनी हरियाणवी का आज भी गांव के बीच पुश्तैनी मकान है.

Jamini Hariyanvi, who founded Hariyanvi on the forums, was born on 5 September 1931 in Badli village of Jhajjar district, a noted poet of humorous interest, naya haryana, नया हरियाणा

7 फ़रवरी 2019

नया हरियाणा

झज्जर जिले के बादली गांव में 5 सितंबर 1931 को जन्मे विख्यात हास्य रस के कवि जैमिनी हरियाणवी का आज भी गांव के बीच पुश्तैनी मकान है. देश दुनिया भले ही भले ही उन्हें जैमिनी हरियाणवी के नाम से जानती हो, लेकिन उनके पुश्तैनी मकान के आसपास रहने वाले लोग गर्व से बताते हैं कि उनका असली नाम देवकीनंदन जैमिनी है. पेशे से शिक्षक रहे थे. शिक्षा विभाग दिल्ली में कार्यरत थे. गांव के वार्ड-12 में ब्राह्मण चौपाल के पीछे ठीक चौक के बीच उनका पुश्तैनी मकान है जिसकी समय-समय पर मरम्मत भी करवाई जाती रही है. जैमिनी को हरियाणवी से बहुत लगाव रहा है. उनकी प्रसिद्ध कविता है-
" होली के दिन यह क्या ठिठोली है
छुट्टी अपनी तो आज हो ली है
देह बंदूक सी दिखे तेरी
और चितवन ज्यूँ लगे गोली है।
एक बिल्ली-सी आंख खोली है 
एक बकरी-सी बोले बोली है 
मर्खनी भैंस की अदा तेरी 
छुट्टी अपनी तो आज हो ली है 
बीच सड़कों पे मस्त टोली है 
सबकी बस प्यार भरी बोली है 
चूम बुढ़िया को बूढ़ा यूँ बोला 
आज होली है, आज होली है।"


अगर रंग होली के होंगे तो जैमिनी हरियाणवी की हास्य कविता होली के बिना रंग जमता नहीं है. होली के दिन ये क्या ठिठोली है.  छुट्टी अपनी तो आज हो ली है... ताउम्र हास्य को हथियार बनाकर लोगों को अवसाद की छुट्टी करने वाले इस विख्यात हास्य रस के कवि जैमिनी हरियाणवी ने भी अब संसार से छुट्टी ले ली है. 5 सितम्बर, 1931 को झज्जर के बादली गांव में पंडित रिजकराम के घर जन्मे जैमिनी हरयाणवी का 88 साल की उम्र में निधन हो गया. दिल्ली के निगमबोध घाट पर पारिवारिक सदस्यों और उनके कवि मित्रों ने अंतिम विदाई दी.
दिल्ली में आजीविका और कविता दोनों ने करवट ली. इतिहास व राजनीति शास्त्र में एमए करने के बाद 1956 में वैश्य कॉलेज रोहतक से बीटी की. इसके बाद वे अध्यापन से जुड़े और दिल्ली के राजकीय विद्यालय में उप प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हो गए. देश की छोटी-बड़ी पत्रिकाओं में असंख्य रचनाओं के प्रकाशन के साथ ही 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' तथा 'धर्म युग' में विशेषकर प्रथम व्यंग्य गजल 1951 में हरियाणा तिलक में प्रकाशित हुई. उन्होंने एक समाचार पत्र में नियमित रूप से कई सालों तक 'राग दरबारी' कॉलम भी लिखा. देश और विदेश में उन्होंने हजारों कवि सम्मेलन कविता पाठ करने के साथ ही आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से भी हास्य रस की कविताएं दर्शकों तक पहुंचाई. जैमिनी ने अनेक हिंदी तथा हरियाणवी फिल्मों में गीत लेखन भी किया. उन्हें उनकी कविताओं के लिए राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा हास्य रत्न की उपाधि दी गई. वहीं हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा गौरव सम्मान से नवाजा गया है. इसके अलावा भी अन्य संस्थानों ने उन्हें पुरस्कृत किया. हास्य रस के साथ ही उन्होंने बाल गीत, कहानियां, गीत-गजल पर 9 पुस्तके लिखी हैं. जैमिनी ने हरियाणवी को भी स्थापित करने में अहम योगदान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अरुण जैमिनी में कविताओं के संस्कार भर देश को एक और कवि दिया. उनके बेटे अरुण जैमिनी हास्य रस के क्षेत्र में देश में आज एक बड़ा नाम है और पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए वह भी हरियाणवी भाषा की सेवा कर रहे हैं. जैमिनी हरियाणवी के दादा पंडित रिजकराम उर्दू के विख्यात शायर थे और पौत्र जैमिनी को कविताओं से प्यार हो गया. जैमिनी हरियाणवी के ही परिवार के सदस्य और कवि सम्मेलन रोहतकी के अनुसार, बचपन में भी वे दादा को खूब हंसा दिया करते थे और दादा अक्सर कहा करते थे कि एक डीं जैमिनी कविता के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाएंगे. उनको किसी ने कभी झल्लाते हुए नहीं देखा. जैमिनी हरियाणवी का जन्म जन्माष्टमी की रात आकाश में चन्दोदय हुआ तभी तो दादा ने उनका नाम रखा था. वास्तविक नाम देवकी नन्दन जैमिनी था. इनके पिता पंडित हरकिशोर जैमिनी से ज्यादा प्रभाव इन पर दादा पंडित रिजकराम पर पड़ा. उस समय किसी को आभास भी नहीं होगा जो तोतली भाषा मे अपने दादा को हंसाया करते थे वो एक दिन दुनियाभर को हसाएँगे.


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