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नया हरियाणा

सोमवार , 18 जून 2018

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कोई जाकर कह दे कौम के ठेकेदारों से... जडें बहुत गहरी हैं भाईचारे की

समाज और देश को तोड़ने वाले लगातार कोशिश करते रहते हैं, परंतु मिट्टी से जुड़े लोग बिना किसी लागलपेट के सहजता से इसे जोड़ते रहते हैं. इसी की एक मिसाल पेश की हरयाणा के इन परिवारों ने...

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30 जनवरी 2018

धर्मेंद्र कंवारी

हरियाणा और हरियाणवी लोगों की सामाजिक समरसता की बुनियाद इतनी मजबूत है कि कौम के हजार ठेकेदार और नेता दीमक की तरह चाटने में लगे रहें तब भी हमारा भाईचारा बुलंद रहेगा। जींद में सोमवार को भात भरने का निभाया गया ये एक सामाजिक फर्ज ही नहीं है, बल्कि तमाचा है उन लोगों के लिए जो हरियाणा में 35-1 की बात करते हैं। दलित परिवार की एक बेटी का भात भरने के लिए एक जाट परिवार हरनंदी बनकर पाटडे पर खडा हुआ है वह समाज तोडने की मुहिम में लगे कौमों के ठेकेदारों के चेहरे पर एक करारा तमाचा है। हुआ यूं था कि जिले के गांव जाजवान निवासी केलो देवी जो कि वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखती है व जींद में ही घरों में कामकाज कर अपने पविार का गुजारा करती है। केलो देवी की बेटी रिंकू की सोमवार को शादी थी। हरियाणा में शादी से पहले भात भरने की सबसे अहम रस्म होती है। जिसमें लड़की अपने भाई व पिता के घर भात न्यौतने के लिए जाती है। भात न्यौतने के बाद पीहर वाले शादी में आकर भात भरते है। केलो देवी के माता-पिता का देहांत हो चुका है और उसका सगा भाई भी नहीं है। भात न्यौंदने के लिए केलो देवी अपने चाचा व ताऊ के परिवार में गई तो उन्होंने केलो देवी की बेटी की शादी में भात भरने से मना कर दिया। परिवार को लोगों द्वारा दुत्कारे जाने से केलो देवी दुखी हो गई। गांव जाजवान निवासी हाल आबाद पटियाला चौक निवासरोहताश के घर सफाई करने गई हुई थी और रो रही थी तो रोहताश की पत्नी ने केलो देवी से रोने का कारण पूछा। जिस पर रोहताश की पत्नी ने सांत्वना दी और भात भरने की बात कही। न केवल रोहताश के घर भात गाया गया बल्कि सोमवार को रोहताश अपने भाइयों तथा भतीजों के साथ केलो देवी के विश्वकर्मा आवास पर भात भरने पहुंचा और अनूठी मिसाल पेश की।

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हरियाणा में भात भरने की इस परंपरा को रोहताश के परिजनो ने बखूबी निभाया। इस जाट परिवार ने सभी रस्में निभाते हुए सभी आवश्यक चीजे दी। रोहताश के परिवार के इंद्र चहल, भूपेंद्र चहल, नसीब चहल, बेटे सुमित व रमन समेत परिवार की सभी महिलाए गीत गाकर कार्यक्रम में शामिल हुए और भात भरने की रस्म निभाई। कार्यक्रम में लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया तथा नाच-गा कर खुशी का इजहार किया। रोहताश परिवार ने 3100 रुपये थाली में, 1100 रुपये कन्यादान तथा 2100 रुपये भात के रूप में भरे। इसके अलावा रोहताश परिवार ने केलो देवी की बेटी रिंकू को गहने, वस्त्र तथा अन्य जरूरत के सामान को भी दिया। रोहताश परिवार द्वारा भरे जा रहे भात को देखने के लिए आसपास के लोगों व महिलाओं की भीड़ लगी रही।
गरीबी व मां-बाप तथा भाई व परिजनों पीहर पक्ष के अभाव से त्रस्त केलो देवी को रोहताश के परिवार की तरफ से मिले प्यार व अपनत्व को देखकर भाव विभोर हो गई तथा आंखों में आंसू भर आए। केलो देवी ने कहा कि जब उसके सगे चाचे, ताऊ के बेटे भात भरने में हाथ खड़े कर गए तो गांव का ही उसका भाई रोहताश सामने आया। जिसने परिवार के साथ खड़ा होकर उसका मान-सम्मान बढ़ाया। उसे अपने भाई रोहताश पर गर्व है।
दर्द समझ में आया तो बन गया भाती
गांव जाजवान निवासी रोहताश ने बताया की हालांकि केलो देवी गांव की होने के नाते भी उसकी बहन है लेकिन समाज की रस्में हैं। उसने अपनी बहन केलो देवी का दर्द समझ में आया वह अपने भाइयों तथा बेटों के साथ केलो देवी की बेटी की शादी में भाती बनकर पहुंचा। केलो के वे तीन भाई हैं और कई भतीजे हैं जो अपनी बहन के सहयोग के लिए पूरी उम्र आगे रहेंगे।

आखिर में इतना कहना चाहूंगा कि मैं इन दोनों परिवारों का शुक्रगुजार हूं जो आज के नाजुक समय में मिसाल बनकर उभरे हैं। आओ अब मिलकर जात-पात पर बांटने वाले लोगों को इस तरह करारा तमाचा मारें और ऐसी घटनाओं और खबरों तक बच्चों तक लेकर जाएं।

धर्मेंद्र कंवारी से आप उनके फेसबुक पेज के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं--

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