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नया हरियाणा

शनिवार, 16 जनवरी 2021

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कल्पनाओं से भी ऊंची थी 'कल्पना चावला' की उड़ान

अपनी यात्रा के दौरान कल्पना ने चंडीगढ़ के छात्रों के लिए एक संदेश भी भेजा था.

Kalpana Chawla, naya haryana, नया हरियाणा

1 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

दुनिया में सभी लोगों को एक न एक दिन इस खूबसूरत जहां को अलविदा कहना होता है, मगर दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं, मौत महज उनके शरीर को खत्म करती है. ऐसे ही जांबाजों में से एक भारत की बहादुर बेटी कल्पना चावला थीं. भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है.
नासा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था. कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय (उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी) महिला थी. उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था. कल्पना ने फ्रांस के जान पियर से शादी की जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे.

अपनी यात्रा के दौरान कल्पना ने चंडीगढ़ के छात्रों के लिए एक संदेश भी भेजा था. संदेश में उन्होंने कहा था,'सपनों को सफलता में बदला जा सकता है.इसके लिए आवश्यक है कि आपके पास दूरदृष्टि, साहस और लगातार प्रयास करने की लगन हो. आप सभी को जीवन में ऊंची उड़ान के लिए शुभकामनाएं'.

छात्रों को ऊंची उड़ान भरने की शुभकामना देने वाली कल्पना फिर धरती पर वापस नहीं आ सकी. कल्पना की मौत के बाद उनके प्रशंसकों ने 'जब तक सूरज चाँद रहेगा कल्पना तेरा नाम रहेगा' के नारे लगाए. आगे चलकर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक छोटे सौर पिंड का नाम कल्पना चावला रख दिया. ऐसे में कल्पना अंतरिक्ष से लेकर धरती तक अब भी हमारे बीच जीवित सी लगती हैं.

कल्पना चावला से जुड़ी बातें

कल्पना चावला की प्रारंभिक पढ़ाई करनाल के टैगोर स्कूल में हुई.  कल्पना ने 1982 में चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री और 1984 से टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. 1988 में उन्होंने नासा के लिए काम करना शुरू किया. कल्पना जेआरडी टाटा (जो भारत के अग्रणी पायलट और उद्योगपति थे) उनसे प्रभावित और प्रेरित थीं. 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया. उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की. इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की. इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी. 1 फरवरी 2002 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया. इस घटना में कल्पना के साथ छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई. कल्पना भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हो मगर अंतरिक्ष में दिलचस्पी लेने वाली हर बेटी कल्पना चावला बनना चाहती है.


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