Privacy Policy | About Us | Contact Us

नया हरियाणा

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018

पहला पन्‍ना English लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

केसी, बाड़मेर, इण्डिया : इंसान बदलते देर नहीं लगती, नाम बदलते लगती है

शेक्सपीयर भले ही कह गए हो कि नाम में कुछ नहीं रखा, पर आज के दौर में वो भी डिजीटल इंडिया वाले दौर में सभी दस्तावेजों में एक नाम दर्ज होना बड़ी बात है.

Kishore Chaudhary Barmer, naya haryana, नया हरियाणा

30 जनवरी 2018

के सी उर्फ किशोर चौधरी

जब वोट डालने की उम्र हुई तो वोटर आईडी बनवाने हम दो भाई केम्प में पहुँचे. फॉर्म भर के दिया. नाम लिखा किशोर चौधरी. कार्मिकों ने कहा- "ये नाम नहीं चलेगा." हमने पूछा- "दूसरा नाम किसका लायें?" उन्होंने कहा- "ख़ुद का सही नाम लिखो." तो उनको दसवीं की मार्कशीट दिखाई. "देखिये इसमें यही लिखा है" उन्होंने कहा- "इसमें जाति लिखी हुई है." हमने कहा- "जाति और धर्म लिखे बिना तो एडमिशन नहीं होता." बचपना था तो थोड़ी आवाज़ ऊंची हो गयी होगी. जोश था और अपना काम करवाने के लिए सही बातें कभी न बोलने की समझ न थी.

कार्मिक ने पास की सीट से उठकर दूजा कार्मिक आ गया. लाइन में लगे लोग भी कौतुक से देखने लगे. दूजे कार्मिक ने कहा- "क्या दिक्कत है?" हमने कहा- "पहचान पत्र बन रहा है और दो अलग नाम वाले पहचान पत्र तो गलत बात है" उन कार्मिकों ने लगभग झाड़ते हुए से कहा- "ज़ोर से मत बोलिए. ये निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र है इसमें जाति नहीं लिखी जा सकती."

वे कार्मिक अन्दर चले गए. आधे घंटे बाद आये. तब तक लोगों का सब्र चुक गया था. हम दो भाई इस देरी के लिए दोषी ठहराए जाते हुए कड़ी निगाहों से देखे जाने लगे. लौटकर आये कार्मिक ने कहा कि आपका फॉर्म हो गया है. जाइए. उन्होंने हमें ख़ुश करने के लिए हमारे नाम के आगे कुमार लगा दिया.

अब निर्वाचन आयोग के पहचान पत्र में नाम हो गया किशोर कुमार.

मोहल्ले का पार्षद बड़ी खतरनाक चीज़ होता है. वह चाहे तो डोर-टू-डोर सड़क में से आपके घर के आगे की एक फ़ीट सड़क न बनवाये. आप कुछ नहीं कर सकते. नगर परिषद जाइए. आयुक्त से मिलिए, कलेक्टर को शिकायत कीजिये. परिणाम ये होगा कि जब हम सड़क बनवा रहे थे तब इन्होने मना किया था कि हमको यहाँ तक नहीं बनवानी या फिर इन्होने ही कब्ज़ा किया हुआ था. ये पार्षद लोग ही राशन कार्ड बनाने का काम अकसर करते हैं. ये आपके मोहल्ले में प्रचलित नाम भी राशन कार्ड में लिख लें तो कोई अचरज नहीं. मेरे लिए सब पार्षद भले और सहयोगी रहे हैं. मैंने कहा कि पते में स्टेडियम रोड लिखना. उन्होंने कहा- "स्टेडियम रोड है तो सही मगर पहले वाले में लिखा हुआ नहीं है." मैंने कहा- "कुछ छूट गया हो तो उसे ठीक कर सकते हैं न?" उन्होंने कहा ओके और बला तले वाले भाव में चल दिए. राशन कार्ड में पता हो गया नेहरू नगर. अब इस पते को कोई खोज नहीं सकता. उस समय शहर का सबसे बड़ा नगर था, नेहरु नगर.

कुछ विभाग समय-समय पर हिंदी की अग्रेजी और कभी सितम्बर का महिना हो तो अंग्रेजी की हिंदी भी करने लगते हैं. स्टेट बैंक ने ऑनलाइन होते ही हिंदी की अंग्रेजी की और मेरे नाम के आगे ई नहीं लगाया. मेरा सेलेरी अकाउंट भी उसी बैंक में बना तो द्फ्र्ट के कागजों में ई वाला किशोर और बैंक में बिना ई वाला किशोर. "सर समझिये कि ये आपके बैंक ने ही किया है. मेरा अकाउंट तो अठ्ठासी में खुला था और हिंदी में फॉर्म भरकर दिया था. आपने ही मेरे नाम की ऐसी अंग्रेजी की है. मैंने उनको दसवीं की मार्कशीट, स्नातक की मार्कशीट दी. उन्होंने मेरा नाम जांचा. कहा ओके. फिर मेरी सेलेरी जमा होने लगी लेकिन उन्होंने नाम को ठीक नहीं किया.

जब पैन कार्ड अनिवार्य हुए तो सारे डाक्यूमेंट्स के साथ कार्ड बनवाने की फीस एजेंट को दे दी. एजेंट ने फिर वही किया. कुछ बरस बाद नया कार्ड बनवाना पड़ा. उसमें सही नाम लिखा जा सका. मेरे पास जो कार्ड आया उसमें लिखा था के आई एश एच ओ आर ई लेकिन जब किसी आयकर रिटर्न को लेकर मेरे सीए साईट तक गये तो वहां ई गायब. माने जो नामकरण जहाँ जैसा हो गया उसे कोई ठीक नहीं करता.

हमारे पास एड्रेस प्रूफ क्या होते हैं? घर की रजिस्ट्री या राशन कार्ड या पानी बिजली के बिल. अब पानी बिजली के बिल केवल सहयोगी प्रूफ हैं. इन्हीं दस्तावेजों के सहारे मैं ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने गया, एजेंट ने कहा कि एड्रेस में केवल इतना ही आएगा नेहरु नगर बाड़मेर. मैंने कहा इसे भी छोटा कर लीजिये. उन्होंने छोटा नहीं किया मगर इतना बना दिया. चुरू एफएम पर नौकरी करने गया तो एक आदमी रिकॉर्डिंग के लिए आये. उन्होंने कहा कि मेरा नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज है. मैंने कहा- "अच्छा ! किस काम के लिए?" उन्होंने बताया कि मेरे पास दुनिया का सबसे छोटा पता है. उस पते पर डाक पहुँचती है. उनका नाम और पता इतना सा है- दिलचस्प, चुरू, इण्डिया. मैंने उनसे कहा कि मैं नाहक ही लम्बे और सही पते के फेर में परेशान रहता हूँ. मैं भी अपना पता केसी, बाड़मेर, इण्डिया कर सकूं तो कितना अच्छा हो.

मेरे राशन कार्ड, बैंक अकाउंट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, भारत सरकार के नौकर के परिचय पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस आदि में अलग नाम और पते लिखे हुए हैं. मैं चाहूँ तो भी इनको एक सा नहीं करवा सकता. इसलिए कि ये एक श्रृंखला है. किसी भी कार्मिक और अधिकारी को यही सीख दी जाती रही है कि पीछे देखो-आगे चलो. उनको ये नहीं कहा जाता कि पीछे की त्रुटियों को ठीक भी करते रहो. मैं सोचता हूँ कि इससे तो अंग्रेजों का टाइम ठीक था. जैसा आपने नाम बोला वैसा उन्होंने लिख लिया और सही अंग्रेजी में लिखा. दिपिया, रामियो, कालूड़ो. ऐसे नाम वाले लोग रेलवे जैसे विभाग में पहली क्लास के अधिकारी होकर ससम्मान रिटायर हुए. हालाँकि एक अभियान चलाकर इस तरह के नाम ठीक भी किये गए थे.

गुजरात में बाड़मेर पासिंग व्हीकल के प्रवेश करते ही हर नाके पर चैकिंग की जाती है. आरजे जीरो फोर का अर्थ है कि इस गाड़ी में ज़रूर कोई बंधाणी, अफीमची, दारुड़िया बैठा होगा. पुलिस वालों को विश्वास होता है कि सुबह-सुबह बोहणी हो जाएगी. मेरे पास एक दोस्त की हरियाणा पासिंग कार है. पुलिस वालों ने एपेक्स सर्कल पर नाके में रुकवा ली. "कहाँ से आये हो और कहाँ जा रहे हो?" मैंने कहा- "जगतपुरा से आया हूँ गांधीनगर जा रहा हूँ" पुलिस वाले ने निगाहों से गाड़ी की तलाशी ली फिर कहा- "हाई बीम पर क्यों चला रहे हो?" मैंने कहा- "ना भाई लाइट तो सही सै" उसने आँख से इशारा किया कि जाओ.

इसलिए सोचा कि नयी कार का रजिस्ट्रेशन तो जयपुर का ही लेना है ताकि अजनबी समझ कर बार-बार रोका न जाये. अब नयी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए मकान की रजिस्ट्री लेकर जाना, किसी स्थनीय आईडी प्रूफ का न होना संकट की बात थी. इधर ड्राइविंग लाइसेंस भी रिन्यूवल पर आ गया. मैंने राजस्थान परिवन सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी जो मेरे सहपाठी और लेखक मित्र हैं उनसे अनुरोध किया कि लाइसेंस में स्थायी पता जयपुर का करवा दीजिये. ताकि मुझे भविष्य में आसनी रहे. दो एक साल में जयपुर ट्रांसफर भी ले लूँ तब तक के लिए स्थानीय होने का कोई प्रमाण पत्र रहे. 
आखिरकार आज मेरे पास इतने लम्बे जीवन में पहली बार सही पते वाला पहचान पत्र है. मैं ख़ुश तो बहुत हूँ. लेकिन ये आसन काम न था इतने बड़े-बड़े अधिकारियों ने मेरी बात को समझा और मेरे दस्तावेजों को समय निकाल कर जांचा और फिर ठीक पते को स्वीकार किया. शुक्रिया है आपको.

"हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी 
जिस को भी देखना हो कई बार देखना" 
निदा फ़ाज़ली साहब ने ये शेर मेरे परिचय पत्रों के लिए ही कहा होगा.

किशोर चौधरी के साहित्य संसार से जुड़ना और पढ़ना चाहते हैं तो इस लिंक पर सैर कर आइये..

http://kishorechoudhary.blogspot.in/


बाकी समाचार