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नया हरियाणा

सोमवार , 18 जून 2018

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हरियाणा में फिर खुली 'खटारा सिस्टम' की पोल

विपक्ष के सिर ठिकरा फोड़कर कब तक अपनी नाकामियों पर पर्दा ढकेगी सरकार.

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25 जनवरी 2018

नया हरियाणा

हरियाणा सरकार की एक बार फिर से नाकामी की सजा आम जनता को भुगतनी पड़ रही है. गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा सरकार कानून व्यवस्था के मामले में असफल रही हो. इससे पहले संत रामपाल का मामले में, जाट आरक्षण आंदोलन के समय, बाबा राम रहीम के मामले और अब राजपूतों के पद्मावत फिल्म के विरोध का मामला हो. हर बार सरकार की नाकामी की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी है. मनोहरलाल हर बार अपनी पीठ थपथपाने का मौका नहीं छोड़ते. दूसरी तरफ बलात्कार जैसी संगीन अपराधों में भी उन्होंने पिछली सरकारों पर दोषारोपण करके पल्ला झाड़ने का प्रयास किया था। आखिर समय रहते ऐसे असामाजिक तत्त्वों को पकड़कर जेल में क्यों नहीं डाला जाता? 
आखिर सरकार की आंखें कब खुलेंगी और आम जनता कब तक इसकी कीमत चुकाती रहेगी. केंद्र सरकार की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है. सोशल मीडिया पर सरकार की नाकामी पर लगातार प्रहार किए जा रहे हैं, परंतु सरकार कान में तेल डालकर आराम से बैठी है और बयान देकर खानापूर्ति कर लेती है. आखिर इन बयानों से आम जनता को राहत तो नहीं मिलती। विपक्ष की साजिश कहने भर से कुछ नहीं होता, जब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस एक्शन नहीं लिया जाता। सरकार अपनी नाकामी का ठिकरा आखिर कब तक दूसरों पर फोड़ती रहेगी?
पद्मावत फ़िल्म को लेकर जारी हंगामा और सत्ता में बैठे लोगों की ख़ामोशी से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं. उपद्रवी लोगों से सख़्ती से निबटने की बात तो दूर, कोई उनके उपद्रव के बारे में मुँह खोलने तक को तैयार नहीं दिख रहा, और ये सब ऐसे समय पर हो रहा है जबकि भारतीय संविधान के लागू होने का उत्सव मनाया जा रहा है.
इस फिल्म के ख़िलाफ़ गुजरात के अहमदाबाद और हरियाणा के गुरुग्राम में भारी तोड़फोड़ देखने को मिली है.इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया से संबंधित थिएटरों ने इस फ़िल्म को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोआ में प्रदर्शित नहीं करने का फ़ैसला लिया है. मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया से देश के 75 फ़ीसदी थिएटर संबंधित हैं.


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