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नया हरियाणा

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

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भूपेंद्र हुड्डा पर पड़ी सीबीआई रेड के केस का हाईकोर्ट से मिला था सीबीआई जांच का आदेश

आरोप है कि हुड्डा सरकार ने भय दिखाकर बिल्डरों से किसानों की जमीनें खरीदी थी.

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26 जनवरी 2019



नया हरियाणा

कांग्रेस सरकार में 2009-10 के बीच सेक्टर-58 से 67 के बीच पड़ने वाले 8 गांव की जमीन अधिग्रहण के मामले में अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अन्य अफसरों पर लगातार सीबीआई का शिकंजा कस रहा है. आरोप है कि हुड्डा सरकार ने भय दिखाकर बिल्डरों से किसानों की जमीनें खरीदी थी. सरकार द्वारा सेक्टर-4 लागू कर देने के कारण भयभीत हो गए और उन्होंने सस्ते दामों पर बिल्डरों को जमीन बेच दी. बाद में सरकार ने अधिग्रहित की गई 1417 एकड़ जमीन में से 1330 एडक को छोड़ दिया. यह जमीन सेक्टर-58 से 67 के बीच पड़ने वाले 8 गांव बादशाहपुर, बेहरामपुर, नागली, उमारपुरा, तिगरा, उल्लाहवास, खादरपुर, घाटा और मडवास की है.
1 जनवरी 2018 को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. मामले के मुख्य याचिकाकर्ता देवदत्त का कहना है कि सरकार को 2009-10 में 4-सेक्टर विकसित करने के लिए 1417 एकड़ भूमि को अधिग्रहण करना था. हरियाणा सरकार ने रिहायशी और व्यावसायिक विकास के लिए 2009 में इन गांव के 8 गांव के जमीन अधिग्रहण की धारा- 4 की अधिसूचना निकाली. लेकिन 2010 में सिर्फ 800 एकड़ जमीन के लिए ही धारा 6 की अधिसूचना जारी की. बाकी जमीन छोड़ दी. इसके बाद 2012 मई में सिर्फ 87 एकड़ जमीन का मुआवजा दिया गया. बाकी सारी जमीन छोड़ दी गई.इसको लेकर किसानों में गुस्सा पैदा हो गया. देवदत्त का कहना है कि किसानों को बिल्डरों ने अधिग्रहण का भय दिखाकर सस्ते दामों पर जमीन ले ली और बिल्डरों के खरीदने के बाद सेक्टर विकसित करने के लिए सरकार ने उस जमीन को अधिग्रहण किया. ऐसे में सांठ-गांठ की आशंका लगाई जा रही थी. आरोप है कि जिन लोगों ने बिल्डरों को जमीन दे दी है, उनकी जमीन अधिग्रहण से छोड़ दी गई और जिन्होंने बिल्डरों को जमीन नहीं दी उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई. अधिग्रहण को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. हाईकोर्ट में देवदत्त की याचिका पर अधिग्रहण रद्द कर दिया था. जिसके खिलाफ हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच को 1 नवम्बर 2017 को आदेश दिए.


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