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नया हरियाणा

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

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हाईकोर्ट ने दिया 25 हजार कर्मचारियों को बड़ा झटका

सिंगल बेंच ने इन कर्मचारियों को पक्का करने के अगस्त में आदेश जारी किए थे.

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26 जनवरी 2019



नया हरियाणा

हरियाणा के विभिन्न बोर्डो, कारपोरेशन आदि में काम करने वाले करीब 25000 से अधिक कर्मचारियों की नियमित होने की आस को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. सिंगल बेंच ने इन कर्मचारियों को पक्का करने के अगस्त में आदेश जारी किए थे. जिसके खिलाफ हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी. अब खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही सिंगल बेंच के सामने याचिकाकर्ता रहे कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है. हरियाणा के बोर्ड और कॉरपोरेशन के कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह वर्षों से अस्थाई तौर पर काम कर रहे हैं. कई कर्मचारी तो 20 से 30 वर्षों से अस्थाई तौर पर कार्यरत है. बावजूद उन्हें रेगुलर नहीं किया गया है. हाईकोर्ट को बताया गया था कि सरकार ने वर्ष 2011 में एक पॉलिसी बनाई थी जिसमें तय किया गया था कि वे कर्मचारी जो 10 अप्रैल, 2006 से 10 वर्षों तक कार्यरत है उन्हें रेगुलर किया जाएगा. बावजूद इसके कर्मियों को रेगुलर नहीं किया गया. सरकार ने इन कर्मियों को यह कहते हुए रेगुलर करने से इनकार कर दिया था कि यह कर्मी जिस पद पर रेगुलर होने की मांग कर रहे हैं, उस पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं. सिंगल बेंच ने सरकार की इस दलील को भी खारिज करते हुए कहा था कि जो कर्मचारी ने लंबे समय तक काम कर रहे हैं उनके अनुभवों को भी उनकी योग्यता माना जा सकता है. हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर कई फैसलों का भी हवाला दिया. लेकिन अस्थाई कर्मचारियों को 1 फरवरी तक सरकार इस आदेश को लागू नहीं करती तो सरकार को प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50 -50 हजार रुपये जुर्माना भर इन सभी के खातों में जमा करवाना होगा.

हरियाणा सरकार ने 4 अक्टूबर के सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ चीफ जस्टिस की डबल बेंच में अपील दायर कर कहा है कि सिंगल बेंच ने जो आदेश दिए हैं वह ना सिर्फ याचिकाकर्ताओं बल्कि सभी अस्थाई कर्मियों पर लागू हो जाएंगे और यह आदेश बैक डेट से लागू करने होंगे. इस तरह जो इन कर्मियों से पहले रेगुलर हुए हैं उनमें से ज्यादातर इनसे जूनियर हो जाएंगे. डबल बेंच ने सरकार की दलीलें सुनने के बाद सिंगल बेंच के इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है और सभी याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है. एजी बीआर महाजन ने हाईकोर्ट को बताया था कि सिंगल बेंच के फैसले के चलते 25 हजार से अधिक कर्मियों को बैक डेट से उतरना पड़ता है जो बेहद मुश्किल है.


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