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नया हरियाणा

बुधवार, 24 अप्रैल 2019

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हरियाणवी पहलवान बजरंग पूनिया काे मिला पद्मश्री सम्‍मान

गणतंत्र दिवस पर हरियाणा को बड़ी खुशखबरी मिली है।

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26 जनवरी 2019



नया हरियाणा

गणतंत्र दिवस पर हरियाणा को बड़ी खुशखबरी मिली है। राज्‍य की पांच ह‍स्तियों को पद्म पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है। पहलवान बजरंग पूनिया काे पद्मश्री सम्‍मान मिला है। दर्शन लाल जैन  को समाज सेवा के लिए पद्म भूषण सम्‍मान दिया गया है। कंवल सिंह चौहान को कृषि, नरेंद्र सिंह और सुल्तान सिंह को पशुपालन क्षेत्र में उल्‍लेखनीय कार्य के लिए पद्मश्री सम्‍मान दिया गया है।

अपने भार वर्ग में दुनिया के नंबर-एक पहलवान बजरंग पूनिया ने पद्मश्री सम्मान मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा 'इससे मुझे खुशी और गौरव की अनुभूति हो रही है। इस सम्मान ने जिम्मेदारी बढ़ा दी है। मेरे सामने 2020 का टोक्यो ओलंपिक और अन्य कई प्रतियोगिताएं हैं। कोशिश रहेगी कि हर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत कर दूं।

वर्ष 2018 एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले बजरंग ने कहा कि सम्मान से खिलाड़ी को भविष्य में और अधिक मेहनत करने की ऊर्जा मिलती है। यह सम्मान हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए प्रेरित करेगा। यह भी साबित होता है कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और यह अंतत: आपको सफलता के किसी मुकाम की ओर ले जाती है। सभी को सदैव देश के लिए बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।

बजरंग ने कहा कि पिछले वर्ष खेल रत्न अवॉर्ड नहीं मिलने पर भी निराशा नहीं हुई थी, क्योंकि मैं आशावादी हूं और इन सब बातों को भूल कर खेल पर ध्यान केंद्रित रखता हूं। मेरे गुरु समान और बड़े भाई पहलवान योगेश्वर दत्त ने हमेशा मुझे खेल पर ध्यान केंद्रित रखने की शिक्षा दी है और मैं उसी पर अमल करता हूं। इस घोषणा से कुश्ती जगत का सम्मान बढ़ा है। उम्मीद है कि इससे अन्य पहलवानों को हौंसला बढ़ेगा।

भारतीय पुरुष रेसलिंग का भविष्य माने जाने वाले पूनिया से 2020 टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड की उम्मीद की जा रही है। कुश्ती उन्हें विरासत में मिली है। यहां खुड्डन गांव में रहने वाले बजरंग के पिता बलवान पूनिया भी पहलवान रहे हैं। गांव के आस पास होने वाले दंगल में वह अक्सर जाया करते थे और अपने बेटे हरेंद्र तथा बजरंग को भी दंगल दिखाते थे। बजरंग की पढऩे में कोई खास रुचि थी नहीं। इसलिए उन्होंने अपना पूरा ध्यान पहलवानी पर ही लगा दिया।

11 साल की उम्र में बजरंग ने छारा गांव में विरेंद्र पहलवान के अखाड़े में जाना शुरू कर दिया जो कि उनके गांव से करीब 35 किलोमीटर दूर है। यहां अखाड़े में ही पहली बार उन्होंने मैट देखा। करीब 2008 तक वो उसी अखाड़े में रहे, फिर उसके बाद परिवार सोनीपत में शिफ्ट हुआ। यहीं उन्हें अपने गुरु योगेश्वर दत्त मिल गए, जिन्होंने उन्हें बड़ा सोचना सिखाया।

65 किलोग्राम भारवर्ग में दुनिया के नंबर-एक पहलवान बजरंग ने राष्ट्रमंडल तथा एशियाई खेलों में पदक जीते हैं। पिता बलवान पूनिया ने बताया कि बजरंग का ध्यान वल्र्ड चैंपियनशिप पर है जो ओलिंपिक का टिकट हासिल करने का रास्ता भी है।

 


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