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नया हरियाणा

गुरूवार, 3 दिसंबर 2020

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जानिए क्यों पड़ा है भूपेंद्र हुड्डा के घर सीबीआई का छापा

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर की अलमारियों के ताले खोलने के लिए दो एक्सपर्ट बुलाने पड़े।

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25 जनवरी 2019



नया हरियाणा

सीबीआई ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक स्थित आवास समेत दिल्ली और हरियाणा में 30 से ज्यादा जगहों पर शुक्रवार सुबह छापा मारा। बताया जा रहा है कि हुड्डा घर पर ही मौजूद हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई गुरुग्राम में जमीन घोटाले से जुड़े मामले में की।

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर की अलमारियों के ताले खोलने के लिए दो एक्सपर्ट बुलाने पड़े। ये करीब एक घंटा अंदर रहे। बाहर निकल कर रमेश और दारा सिंह सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 6 से 7 अलमारियों की लॉक खोले हैं। सीबीआई के इस छापे को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से जमीन आवंटन के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या है एजेएल मामला?

एजेएल कांग्रेस नेताओं और गांधी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी है। कंपनी को हुड्डा के मुख्यमंत्री और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के चेयरमैन रहते प्लॉट रि-अलॉट किया गया। मोतीलाल वोरा एजेएल के चेयरमैन रहे हैं। 
24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया।
28 अगस्त 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए थे। इसी दौरान पंचकूला में एसोसिएट जर्नल लिमिटेड को जमीन आवंटित की थी।
आरोप है कि एजेएल को यह जमीन आवंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हुआ। ये प्लॉट 496 स्केवयर मीटर से लेकर 1280 स्केवयर मीटर तक के थे, जिसके लिए हुड्डा के पास 582 आवेदन आए थे। अलॉटमेंट के लिए 14 का चयन किया गया था। 
खट्टर सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।


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