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नया हरियाणा

रविवार, 16 जून 2019

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धमकियों की वजह से हम बैलेट पेपर के युग में नहीं जाएंगे : चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा

उन्होंने कहा कि ईवीएम की विफलता और गड़बड़ियों के परीक्षण से सीखने का दौर भी बीत गया है.

Due to threats, we will not go into the age of ballot paper, Election Commissioner Sunil Arora, naya haryana, नया हरियाणा

25 जनवरी 2019



नया हरियाणा

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों और मतपत्र से चुनाव कराने की मांग को तर्कसंगत बताकर खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग किसी भी प्रकार के दबाव या धमकियों से डर कर मतपत्र के दौर में वापस नहीं लौटेगा. अरोड़ा ने आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया को समावेशी एवं सहज बनाने के विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ईवीएम पर उठ रहे सवालों के हवाले से कहा कि हम राजनीतिक दलों सहित सभी पक्षकारों की ओर से ईवीएम के हर प्रकार के फीडबैक और आलोचना को खुले मन से स्वीकार करते हैं. इस मामले में हम हर बार बेहतर सीखने के लिए तैयार है. लेकिन इसके साथ ही हम किसी के दबाव या धमकियों से डरकर मतपत्र के दौर में लौटने वाले नहीं है.
ईवीएम को तकनीकी गड़बड़ी से बचाने के लिए किए गए उपायों को बताते हुए अरोड़ा ने कहा कि इस मशीन को सार्वजनिक क्षेत्र की उन दो कंपनियों ने बेहद पुख्ता तकनीकी सुरक्षा उपायों से लैस करते हुए बनाया है जो हमारे देश के रक्षा प्रतिष्ठान के लिए बहुत उमदा काम कर रही है. साथ ही हमारे पास देश के श्रेष्ठतम प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों की समिति है जो ईवीएम वीवीपैट की निर्माण प्रक्रिया पर बहुस्तरीय सतत निगरानी रखती है. उन्होंने ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालों को नकारते हुए कहा कि हम इसे (ईवीएम) फुटबॉल क्यों बना रहे हैं और इस पर छींटाकशी क्यों कर रहे हैं. ईवीएम पर आरोप-प्रत्यारोप के सही या गलत होने का फैसला सम्मेलन में मौजूद लोग करेंगे.
ईवीएम की विफलता और गड़बड़ियों के परीक्षण से सीखने का दौर भी बीत गया है. यद्यपि सीखने का समय कभी पूरा नहीं होता है. इसीलिए ईवीएम को परिपक्व और अचूक बनाने के लिए आयोग हर बेहतर पाठ सीखने के लिए सदैव तत्पर है. अरोड़ा ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दलील दी कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जो परिणाम आया था. उसके कुछ महीने बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिल्कुल भिन्न चुनाव परिणाम आया. इसके बाद हिमाचल, गुजरात, कर्नाटक, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम और अब छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के विधानसभा एवं उपचुनावों में लगातार भिन्न-भिन्न चुनाव परिणाम देखने को मिले हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसी एक दल के पक्ष में परिणाम आने पर ईवीएम सही और विपरीत परिणाम आने पर गलत कैसे हो सकती है.


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