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रविवार, 19 अगस्त 2018

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अर्थजगत की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचे मोदी

भारतीय लजीज देसी व्यंजनों और योग सत्र की झलक के साथ कल से दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक शुरू होगी।

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22 जनवरी 2018

नया हरियाणा

World Economic Form

विश्व आर्थिक फोरम स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। स्विस अधिकारीयों द्वारा इसे एक निजी-सार्वजनिक सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इसका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर वैशविक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है।

 इसी देश के एक छोटे से शहर में दुनिया के बड़े-बड़े सियासी और कारोबारी फ़ैसले परवान चढ़ते हैं. इस शहर का नाम है दावोस, जो फ़िलहाल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की वजह से चर्चा में है. वो वहां वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम में हिस्सा लेने जा रहे हैं. साल 1997 के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार यहां जा रहे हैं. इसकी वजह पूछी गई तो मोदी ने कहा, ''दुनिया भली-भांति जानती है कि दावोस अर्थजगत की पंचायत बन गया है.''

लजीज देसी व्यंजनों और योग सत्र की झलक के साथ कल से दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक शुरू होगी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे जहां वह भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि इंजन के रूप में पेश कर सकते हैं। 5 दिन तक चलने वाली WEF की 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़ी 3,000 से अधिक शख्सियतें शिरकत करेंगी। भारत की ओर से 130 से ज्यादा प्रतिभागी सम्मिलित होंगे।

वहां ऑस्ट्रेलियाई अभिनेत्री केट ब्लेंचेट और संगीतकार एलन जॉन होंगे, तो बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान को भी क्रिस्टल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इन तीन सेलेब्रिटी को यह अवॉर्ड दुनिया की सुधार की दिशा में काम करने के लिए मिलेगा। यह सम्मेलन बर्फ से ढंके आल्पस पर्वत के पास स्थित रिजार्ट टाउन के बेहद खूबसूरत माहौल में होगा। इस बार सम्मेलन की थीम है, क्रिएटिंग ए शेयर्ड फ्यूचर इन ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड। डब्ल्यूईएफ के चेयरमैन क्लाउस श्वाब सोमवार शाम को थीम की घोषणा के साथ सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे।

दावोस दुनिया के लिए इतना ख़ास क्यों है? क्यों पूरी दुनिया की अर्थनीति वहां से प्रभावित होती है? क्यों ऑस्ट्रेलिया से अमरीका तक के दिग्गज नेता यहां क्यों पहुंचते हैं?

यहां दुनिया भर के राजनीतिक और कारोबारी दिग्गज साल में एकबार ज़रूर जुटते हैं और सरल भाषा में इस अहम बैठक को 'दावोस' ही कहा जाता है. इसके अलावा ये स्विट्ज़रलैंड का सबसे बड़ा स्की रिज़ॉर्ट भी है. फ़ोरम की वेबसाइट के मुताबिक उसे दावोस-क्लोस्टर्स की सालाना बैठक के लिए जाना जाता है. बीते कई साल से कारोबारी, सरकारें और सिविल सोसाइटी के नुमाइंदे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए यहां जुटते हैं और चुनौतियों से निपटने के लिए समाधानों पर विचार करते हैं.

 प्रोफ़ेसर क्लॉज़ श्वॉब ने जब इसकी नींव रखी थी तो इसे यूरोपियन मैनेजमेंट फ़ोरम कहा जाता था. ये फ़ोरम स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर का गैर-लाभकारी फ़ाउंडेशन हुआ करता था. हर साल जनवरी में इसकी सालाना बैठक होती थी और दुनिया भर के जाने-माने लोग यहां पहुंचते थे. वेबसाइट के मुताबिक शुरुआत में प्रोफ़ेसर श्वाब इन बैठकों में इस बात पर चर्चा करते थे किस तरह यूरोपीय कंपनियां, अमरीकी मैनेजमेंट कंपनियों की कार्यप्रणाली को टक्कर दे सकती हैं.

 

प्रोफ़ेसर श्वाब का विज़न 'मील के पत्थर' तक पहुंचने के साथ-साथ बड़ा होता गया और बाद में जाकर वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम में बदल गया. साल 1973 में ब्रेटन वुड्स फ़िक्स्ड एक्सेंज रेट मैकेनिज़्म का ढहना हो या फिर अरब-इसराइल युद्ध, ऐसी घटनाओं ने इस सालाना बैठक को मैनेजमेंट से आगे ले जाते हुए आर्थिक और सामाजिक मुद्दों तक विस्तार दिया.

नरेंद्र मोदी का दावोस जाना इतनी बड़ी ख़बर बन रहा है. लेकिन जनवरी 1974 में पहली बार इस बैठक में राजनीतिक नेता शामिल हुए थे. इसके दो साल बाद फ़ोरम ने 'दुनिया की 1000 प्रमुख कंपनियों' के लिए सदस्यता देने का सिस्टम शुरू किया. यूरोपियन मैनेजमेंट फ़ोरम पहला गैर-सरकारी संस्थान है जिसने चीन के इकॉनॉमिक डेवलपमेंट कमिशन के साथ साझेदारी की पहल की. ये वही साल था जब क्षेत्रीय बैठकों को भी जगह दी गई और साल 1979 में 'ग्लोबल कम्पीटीटिव रिपोर्ट' छपने के साथ ही ये नॉलेज हब भी बन गया. साल 1987 में यूरोपियन मैनेजमेंट फ़ोरम वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम बना और विज़न को बढ़ाते हुए विमर्श के मंच में तब्दील हुआ.

वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक के अहम पड़ावों में साल 1988 में दावोस घोषणापत्र पर यूनान और तुर्की के दस्तख़त करना शामिल है, जो उस वक़्त जंग के मुहाने पर खड़े थे. इसके अगले साल दावोस में उत्तर और दक्षिण कोरिया की पहली मंत्री-स्तर की बैठक हुई थी. दावोस इसके अलावा भी कई अहम घटनाक्रम देख चुका है. वहां हुई एक बैठक में पूर्वी जर्मनी के प्रधानमंत्री हांस मोडरो और जर्मन चांसलर हेलमुत कोह्ल दोनों जर्मनी के मिलने पर चर्चा के लिए मिले थे.

 

साल 1992 में दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति डे क्लर्क ने सालाना मीटिंग ने नेल्सन मंडेला और चीफ़ मैंगोसुथु बुथलेज़ी से मुलाक़ात की. ये दक्षिण अफ़्रीका के बाहर उनकी पहली बैठक थी और देश के राजनीतिक बदलाव में मील का पत्थर माना जाता है. साल 2015 में फ़ोरम को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय संस्थान का दर्जा मिला.

 


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