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नया हरियाणा

गुरूवार, 3 दिसंबर 2020

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कंडेला बना जींद राजनीति की धुरी

जींद की राजनीति में कंडेला का एक अहम रोल रहा है. कंडेला कांड के बाद से चौटाला परिवार से बनी दूरी अब 18 साल बाद दूर हुई है.

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22 जनवरी 2019



नया हरियाणा

भाजपा को अपनी ओर से अलविदा कह चुके कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने विनोद आशरी पर भरोसा जताया है. जनता उन पर कितना भरोसा करती रहती है, यह 31 जनवरी को मतगणना के दिन तय हो जाएगा. लेकिन आशरी अपनी जीत का गणित ब्राह्मण, सैनी व अन्य वर्गों के सहारे बिठाने में लगे हुए हैं.  जींद उपचुनाव में राजकुमार सैनी को नई पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के बैनर तले पहली बार अपनी जमीनी हकीकत का भी पता चल जाएगा. विनोद आशरी अन्य दलों के उम्मीदवारों के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं. जींद उपचुनाव में जीत उसी उम्मीदवार की होगी जो सभी वर्गों के मत हासिल करेगा. कुल 1 लाख 70 हजार मतदाता उम्मीदवारों का सियासी भविष्य लिखेंगे. इनमें 52 हजार जाट, 17 हजार ब्राह्मण, 15 हजार पंजाबी, 13 हजार वैश्य, 12 हजार सैणी तथा 10 हजार वाल्मीकि और साढ़े सात हजार पिछड़ा वर्ग के मतदाता शामिल है. जिनके आगे सभी उम्मीदवार चुनावी बीन पर नाच रहे हैं.

कंडेला जींद की राजनीति की धुरी बन चुका है. जींद उपचुनाव में दिग्विजय के बाद दुष्यंत, फिर रणदीप और फिर मनोहरलाल से लेकर ओम प्रकाश धनखड़ तक यहां के चक्कर काट चुके हैं.  कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कंडेला के चबूतरे से ग्रामीणों को भाजपा जीताने की अपील की.  
यह  वह गांव है जहां एक खागड़ ने तत्कालीन सरकार से लोहा ले लिया था. चौटाला सरकार ने बिजली बिल वसूली के लिए दबाव डाला, तो सारे ग्रामीण एक हो गए. ऐसे में सरकार की ओर से चलाई गई गोलियों से लोहा एक खागढ़ ने लिया. कंडेला के लोगों ने इस खागड़ को शहीद का दर्जा देते हुए इसकी समाधि बना दी है. अब यहां सभी नेता नतमस्तक होते हैं.
जींद की राजनीति में कंडेला का एक अहम रोल रहा है. कंडेला कांड के बाद से चौटाला परिवार से बनी दूरी अब 18 साल बाद दूर हुई है. यहां उपचुनाव में पहली एंट्री दुष्यंत चौटाला और दूसरी एंट्री अभय चौटाला की हुई. मनमुटाव को दूर करते हुए कंडेला चबूतरे पर अभय सिंह चौटाला ने  तत्कालीन सरकार के रवैए को लेकर माफी मांगी. उन्होंने कहा कि सरकारों से गलतियां हो जाती है, लेकिन इन बातों को दिल से लगाकर नहीं रखना चाहिए.
टेकराम कंडेला के पुत्र राम मेहर कंडेला के मुताबिक वर्ष 2001 में बिजली बिलों को भरने के लिए सरकार ने दबाव बनाया और कंडेला और शाहपुर की बिजली काट दी. जबरन बिल वसूली के लिए सरकार ने किसानों पर गोलियां चलवाई. उस समय इस खागड़ ने सरकार की घोड़ा पुलिस को गांव से खदेड़ दिया था. बाद में गांव वालों ने खागड़ की सेवा अधिक कर दी. घी और बिनोले अधिक मात्रा में देने से उसकी मृत्यु हो गई. मृत्यु के बाद ग्रामीणों ने खागड़ की समाधि बनवा दी. जिसे कंडेला कांड के शहीद के नाम से जाना जाता है.

 


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