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नया हरियाणा

रविवार, 21 अप्रैल 2019

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जसविंद्र सिंह संधू को श्रद्धांजलि और पिहोवा विधानसभा का इतिहास

पिहोवा शहर धार्मिक नगरी के तौर पर जाना जाता है.

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20 जनवरी 2019



नया हरियाणा

हरियाणा विधानसभा में इनेलो विधायक दल के उपनेता और वरिष्ठ राजनीतिक जसविंदर सिंह सन्धु का शनिवार सुबह चंडीगढ़ पीजीआई में निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। पिछले कुछ समय से वह कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। सन्धु का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गुमथला गढू में किया जाएगा। जसविंदर सन्धु चौटाला सरकार में कृषि मंत्री भी रहे हैं। सभी दल के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

हरियाणा में चार बार विधायक बने जसविंदर सिंह सन्धु अपने विलक्षण कार्यशैली के लिए जाने जाते रहेंगे। इनका राजनीति में आना महज संयोग ही था। अपने विधानसभा क्षेत्र पिहोवा के अधिकतर लोगों के साथ सन्धु के निजी संबंध रहे हैं। दूसरी और अपने बेहद शांत स्वभाव के कारण भी यह अपने क्षेत्र के पसंदीदा नेता रहे हैं। इनका जन्म 4 अगस्त 1955 को गुमथला गढू में हुआ था। स्कूली शिक्षा के बाद ही इनकी राजनीति में रुचि बढ़ीऔर इन्होंने 1987 में सरपंची का चुनाव लड़ा। उस समय हरियाणा में चौधरी देवीलाल की सरकार थी। सभी अपने गांव गुमथला गढू के सरपंच बने थे। वर्ष 1991 के दौरान लोकदल में जहां बगावत का दौर चल रहा था तो दूसरी तरफ उसी दौरान जसविंदर सिंह सन्धु ने सड़क हादसे में परेशान हुए पार्टी के कद्दावर नेता संपत सिंह के परिवार की मदद की थी। संपत सिंह उन दिनों इनेलो के कद्दावर नेताओं में शुमार थे जो आजकल कांग्रेस में हैं। संपत सिंह की मदद का परिणाम यह हुआ कि बागी हुए कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सैनी का टिकट काटकर जसविंदर सिंह को दे दिया गया। सन्धु पहला ही चुनाव जीत गए और चौटाला की पार्टी में विधानसभा पहुंचे।

इसके बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में भी सन्धु ने जीत हासिल की। उसके बाद 2000 के चुनाव में भी वह विधायक बने। ओम प्रकाश चौटाला के राज में सन्धु हरियाणा के कृषि मंत्री बने। 2005 में कांग्रेस के प्रत्याशी हरमोहिंदर चड्ढा से हार गए लेकिन कांग्रेसी सरकार जाते ही 2014 में फिर से विधायक चुने गए।  2014 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तरी हरियाणा से जब चुनाव परिणाम आने शुरू हुए तो इनेलो को कालका से लेकर कुरुक्षेत्र तक हार का सामना करना पड़ा। पार्टी के अध्यक्ष अशोक अरोड़ा भी चुनाव हार गए। तब सन्धु पहले ऐसे विधायक थे जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी इनेलो की झोली में डाली।

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