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नया हरियाणा

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

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आखिर क्यों होते हैं बलात्कार

बलात्कार के कारणों की मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक विज्ञान की पड़ताल जरूरी है.

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15 जनवरी 2018

नया हरियाणा

हरियाणा में बलात्कार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे. हर नया मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर देता है कि आखिर क्यों होते हैं बलात्कार? इन बलात्कारों के अलग-अलग कारण हो सकते हैं. अक्सर बलात्कार के बाद सरकार को दोषी बताया जाता है या लड़की को ही दोषी बताया जाता है.
ज्यादातर लोग छोटे कपड़ों को बलात्कार का कारण मानते हैं. 
जबकि मानव सभ्यता की शुरुआत से ही मौसम की मार से बचने के लिए शरीर को ढकने की जरूरत महसूस की गई. बीतते समय के साथ जानवरों की छाल पहनने से लेकर आज इतने तरह के कपड़े मौजूद हैं. जीवनशैली के आसान होने के साथ साथ कपड़ों के ढंग भी बदले हैं और अब यह अवसर, माहौल, पसंद और फैशन के हिसाब से पहने जाते हैं. फिर पूरे बदन को ढकने वाले कपड़ों पर जोर क्यों?
बलात्कार के कारणों पर अलग-अलग दृष्टिकोणों से विचार विमर्श
मुम्बई की Clinical Psychiatrist सोनाली गुप्ता कहती हैं कि 'पुरुषों द्वारा रेप करने की पहली वजह तो ये है कि हमारी सोसाइटी कितने ही लोगों के लिए पावर दिखाने का मीडियम बन जाती है. ऐसे लोग अपना हक़ जमाकर अपनी एक आइडेन्टिटी क्रिएट करना चाहते हैं. 
दूसरा कारण है कि अगर कोई लड़की उन्हें पसंद आ जाती है, वो उन्हें लगता है कि वो हर हाल में मिलनी चाहिए, चाहे वो हां कहे या ना. तीसरी अहम वजह है कि वे अपनी काम उत्तेजना को कंट्रोल नहीं कर पाते. न ही वे इसे कंट्रोल करना चाहते हैं. ऐसे लोगों के लिए रेप बदला लेने का माध्यम भी बन जाता है.
 कुछ ऐसे मनोरोगी भी होते हैं कि उन्हें दूसरों को नुकसान पहुंचाकर अच्छा लगता है. इन लोगों के लिए रेप या किसी को चोट देना मानसिक संतुष्टि जैसा होता है. इन्हें इलाज की ज़रुरत होती है. क्योंकि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं होता.
सोसाइटी में जो नजरिया है औरतों के प्रति, वो यही है कि अगर वो मॉडर्न है तो उसे लोग 'तैयार' मानते हैं. वो उसके साथ कुछ भी करने के लिए सोचते हैं. हमें सिखाया ही नहीं गया कि लड़कियां भी लड़कों जैसी ही होती हैं, उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ सेक्स नहीं करना चाहिए. इसके अलावा जो मीडिया हैं समाज में मेसेज देने वाले, उनमें अगर सेक्सुअल वॉयलेंस दिखाया जाएगा, उनका कोई फेवरिट हीरो लड़की के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती करेगा, तो लोग उसे रोल मॉडल की तरह ही लेते हैं. हम अभी भी मीडिया के तौर पर उतने सेंसिटिव नहीं हुए. म्यूज़िक वीडियो, सॉन्ग या फिल्मों में औरत को 'वस्तु' की तरह पेश किया जाता है. जब तक पुरुष खुद को पॉवर पोजीशन में देखेंगे, रेप होते रहेंगे. हमें औरत के प्रति मानसिकता बदलनी ही होगी.'
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की Psychiatrist डॉ. अंतरा गुप्ता कहती हैं कि 

'पुरुषों में एक श्रेष्ठता की भावना भरी होती है कि वे कुछ भी कर सकते हैं, जैसे सड़कों पर घूमना, कहीं भी आना-जाना आदि, लेकिन जब ये चीज़ें कोई लड़की करती है तो उन्हें लगता है कि एक लड़की ऐसा भला कैसे कर सकती है? ये भावना उन्हें उस लड़की के साथ ज़बरदस्ती करने को फ़ोर्स करती है. मर्दों को रेप करना अपनी ताक़त को दिखाने का ज़रिया नज़र आता है. 

जिन लोगों की पेरेंटिंग अच्छी होती है, वे इस तरह की चीज़ों को समझते हैं. लेकिन हमारे देश में लोग शिक्षा और सही समय पर मिलने वाली सेक्स एजुकेशन, दोनों न मिलने के कारण ज्यादा हिंसक हो जाते हैं. वे सेक्स से संबन्धित ज़रूरी बातें हिंसक तरीके से सीखते हैं, जैसे पॉर्न आदि के द्वारा, इसलिए उन्हें लगता है कि ये ही सही तरीका है. जो बच्चे सड़कों पर पले-बढ़े हों, या मजदूरी करते हों, तो फिर वे अच्छी तरह से शिक्षित नहीं होते, वे अपने बचपन में इस तरह की हिंसक घटनाओं की चपेट में आ सकते हैं, इसलिए उनके दिमाग में वो चीज़ें बनी रहती हैं., जिसे मौका मिलने पर वे भी हिंसक तरीके से ही करते हैं. इसलिए ज़रूरी है कि स्कूलों में सेक्स एजुकेशन दी जाए और माता-पिता भी इसके लिए अवेयर रहें कि उनके बच्चे क्या सीख रहे हैं. क्योंकि औरत की देवी के रूप में पूजा करने की ज़रूरत नहीं है, उसे इन्सान समझने की ज़रूरत हैं.'
 

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