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नया हरियाणा

सोमवार , 18 जून 2018

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हरयाणवी सकरांत मतलब मकर संक्रांति

सकरांत जमा न्यारा चाह होवै अर रुसे होया नै मनावै।

Makar sankranti, naya haryana, नया हरियाणा

14 जनवरी 2018

सुनीता करोथवाल

मकर संक्रांति  मतलब  के  सकरांत  । तीज  कै  बाद सकरांत हम हरियाणवियां का सबतै  बड़ा  त्योहार  सै  ।  आज काल  तो फेर  बी क्रिसमस  वगैरा घणे ए त्योहार  होगे  । पर दस- पंद्रह  साल पहले  सकरांत  का न्यारा ए चाव  हो या करदा  । 
     रात न माँ  तै कहके  सोया करदे  माँ  चार  बजे  उठा  दिये  ।   चार बजे उठके  सबतै  राम राम करदे  फेर  सारी  गळी  म्हं दूर तक  झाडू  मारदे   । गजब  का उत्साह  होया करदा  ,हाण  के  बाळकां  म्हं  , रीसम  रीस  सारा  बगड़  चमका  दिया  करते  । फेर नहा कैं बाहरणे आग्गै  आग जळा  हाथ  सेकदे  आर हर आणिये -जाणिये  ताहिं  बाबा  राम राम  ,चाचा  राम राम  ,ताई  राम राम  करकैं आशीर्वाद  लेंदे  । खूब  बातां  के , हंसी  मजाक  के गुलगुले उतरदे  । सूरज  लिकड॒ण त पहले नहाणा  जरूरी  था  ना तो  माँ  कहंदी  जो सकरांत  न नहीं  नहावैगा वो अगले जन्म म्हं  चमगादड़  बणैगा  ।  उन दिनां खूब धुंध  पड़या  करदी  । माँ या दादी  बखते ए हलवा  बणा  दिया  करदी  ।  सब गरम हलवे  का मजा  लेंदे  । कुनबे  म्हं  कोये  बुआ  आयी  होती  तो उसकी  मौज  हो जाया  करदी  । सब परिवार  के त्योहार  पै खूब गोज  ढीली छोड़  दिया  करते  । 
    फेर  काम निपटा  के चाची  ताई  माँ  कट्ठी  होकैं कपड़े  रपिये  ,घेवर  लाड्डू  परांत  म्हं धर  कैं गीत  गांदी  चाल्या  करदी  । जेठ  - देवर  ,सास-  ससुर  न  ब्योंत  हो उसा  देया  करदी और आशीर्वाद  लेंदी  । बड़े बूढ़े भोत  राजी  होंदे  के बोहड़िया  मनाण आवैगी  तो घर तै  दूर कोये  नोहरे  ,कोये  खेत  म्हं  चादर  ताण  सो जाया  करदे  । गजब  की उमंग  आर चाव होया  करदा  त्योहार  म्हं  । 
    जिस घर म्हं  नई  बहू आवै  ,उसकै  तो पीहर  तै  सबकी  सकरांत आया  करै   । आज बी लोकगीत  गाकैं  पूरे  कुनबे  न सकरांत  पहरायी  जा  सै । ज्यातर घरां  म्हं  गाजरपाक ,मालपूड़े आज बी तारे  जां  सैं  ।
     पर ,टेम कै  साथ  दिखावा बढ़  गया  । पतंगबाजी और  लाल पीळे घेवर    चाल पड़े  । नहीं  तो सकंरात रूस्यां  न मनाण  का और दान पुण्य  करण  का त्योहार  था  । परिवार  की बहू  सास, ससुर , देवर ,ननद  न सबकुछ  मान्या  करदी  । ईब  तो कोये  गऊ  पेड़ा  बणावै  सै  ,कोये सात जात  की धर्म भाण  बणावै  सै  ,कोये  सौ ढाळ  की चीज  दान म्हं  देवै सै , कोये  ग्यारह हजार  चावल  दान करै  सै  ,कोये  भंडारा  लगावै  सै  ,पर परिवार  म्हं  वा बड़ां  की कद्र  इतणी  नहीं  रह्यी । सारे  त्योहार फेसबुक  म्हं फोटो दिखा  दिखा  मन  जावैं  सैं  । ना  त्योहारां  की रौनक  रही,ना आपसी  मेल मिलाप  । बेरा  न म्हारी आगली  पीढ़ी  के खाया  करैगी,आर के  त्योहार  मनाया  करैगी  ????
         


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