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नया हरियाणा

सोमवार , 22 जनवरी 2018

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हरयाणवी सकरांत मतलब मकर संक्रांति

सकरांत जमा न्यारा चाह होवै अर रुसे होया नै मनावै।


Haryanvi makar sankranti, naya haryana

14 जनवरी 2018

सुनीता करोथवाल

मकर संक्रांति  मतलब  के  सकरांत  । तीज  कै  बाद सकरांत हम हरियाणवियां का सबतै  बड़ा  त्योहार  सै  ।  आज काल  तो फेर  बी क्रिसमस  वगैरा घणे ए त्योहार  होगे  । पर दस- पंद्रह  साल पहले  सकरांत  का न्यारा ए चाव  हो या करदा  । 
     रात न माँ  तै कहके  सोया करदे  माँ  चार  बजे  उठा  दिये  ।   चार बजे उठके  सबतै  राम राम करदे  फेर  सारी  गळी  म्हं दूर तक  झाडू  मारदे   । गजब  का उत्साह  होया करदा  ,हाण  के  बाळकां  म्हं  , रीसम  रीस  सारा  बगड़  चमका  दिया  करते  । फेर नहा कैं बाहरणे आग्गै  आग जळा  हाथ  सेकदे  आर हर आणिये -जाणिये  ताहिं  बाबा  राम राम  ,चाचा  राम राम  ,ताई  राम राम  करकैं आशीर्वाद  लेंदे  । खूब  बातां  के , हंसी  मजाक  के गुलगुले उतरदे  । सूरज  लिकड॒ण त पहले नहाणा  जरूरी  था  ना तो  माँ  कहंदी  जो सकरांत  न नहीं  नहावैगा वो अगले जन्म म्हं  चमगादड़  बणैगा  ।  उन दिनां खूब धुंध  पड़या  करदी  । माँ या दादी  बखते ए हलवा  बणा  दिया  करदी  ।  सब गरम हलवे  का मजा  लेंदे  । कुनबे  म्हं  कोये  बुआ  आयी  होती  तो उसकी  मौज  हो जाया  करदी  । सब परिवार  के त्योहार  पै खूब गोज  ढीली छोड़  दिया  करते  । 
    फेर  काम निपटा  के चाची  ताई  माँ  कट्ठी  होकैं कपड़े  रपिये  ,घेवर  लाड्डू  परांत  म्हं धर  कैं गीत  गांदी  चाल्या  करदी  । जेठ  - देवर  ,सास-  ससुर  न  ब्योंत  हो उसा  देया  करदी और आशीर्वाद  लेंदी  । बड़े बूढ़े भोत  राजी  होंदे  के बोहड़िया  मनाण आवैगी  तो घर तै  दूर कोये  नोहरे  ,कोये  खेत  म्हं  चादर  ताण  सो जाया  करदे  । गजब  की उमंग  आर चाव होया  करदा  त्योहार  म्हं  । 
    जिस घर म्हं  नई  बहू आवै  ,उसकै  तो पीहर  तै  सबकी  सकरांत आया  करै   । आज बी लोकगीत  गाकैं  पूरे  कुनबे  न सकरांत  पहरायी  जा  सै । ज्यातर घरां  म्हं  गाजरपाक ,मालपूड़े आज बी तारे  जां  सैं  ।
     पर ,टेम कै  साथ  दिखावा बढ़  गया  । पतंगबाजी और  लाल पीळे घेवर    चाल पड़े  । नहीं  तो सकंरात रूस्यां  न मनाण  का और दान पुण्य  करण  का त्योहार  था  । परिवार  की बहू  सास, ससुर , देवर ,ननद  न सबकुछ  मान्या  करदी  । ईब  तो कोये  गऊ  पेड़ा  बणावै  सै  ,कोये सात जात  की धर्म भाण  बणावै  सै  ,कोये  सौ ढाळ  की चीज  दान म्हं  देवै सै , कोये  ग्यारह हजार  चावल  दान करै  सै  ,कोये  भंडारा  लगावै  सै  ,पर परिवार  म्हं  वा बड़ां  की कद्र  इतणी  नहीं  रह्यी । सारे  त्योहार फेसबुक  म्हं फोटो दिखा  दिखा  मन  जावैं  सैं  । ना  त्योहारां  की रौनक  रही,ना आपसी  मेल मिलाप  । बेरा  न म्हारी आगली  पीढ़ी  के खाया  करैगी,आर के  त्योहार  मनाया  करैगी  ????
         


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