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नया हरियाणा

बुधवार, 30 सितंबर 2020

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शिखर पर बेटियां: महक ने अर्जेंटीना की माउंट बोनेट की फतेह

करनाल की बेटी व कर्ण की नगरी से निकली पहली पर्वतारोही महक ज्योत ने किया कारनामा.

Daughters on the summit, Karnal's daughter Mehak, Fateh of Mount Bonnet of Argentina, naya haryana, नया हरियाणा

17 जनवरी 2019



नया हरियाणा

करनाल की बेटी व कर्ण की नगरी से निकली पहली पर्वतारोही महक ज्योत ने दक्षिण अमेरिका के देश अर्जेंटीना की चोटी माउंट बोनेट पर तिरंगा लहराने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय बच्ची बनने का गौरव हासिल कर लिया है. 
इसी के साथ इस पर्वत चोटी पर पहुंचने वाली वो विश्व की पहली सिख लड़की भी बनी है. गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर उसने माउंट बोनेट शिखर पर निशान साहेब लहरा कर गुरु के शहादतों से भरे महान जीवन को अपनी श्रद्धा अर्पित की है.
महक ज्योत के पिता व सामाजिक संस्था निफा के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने बताया की महक ज्योत विगत 5 जनवरी को सबसे ऊंची चोटी अकांकगुआ को फतह करने के लिए रवाना हुई थी. सबसे ऊंची चोटी विंसन पर तिरंगा लहराने वाली महक की गाइड अनीता कुंडू ने भी उसे हौसले व धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी. महक की माता मनजीत कौर का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है.
नाबालिक होने व जरूरी अथॉरिटी लेटर न होने के कारण महक की यात्रा 1 दिन के लिए स्थगित हो गई और उसे बिना आराम किए 37 घंटे की यात्रा के बाद ही चढ़ाई शुरू करनी पड़ी.  1 सप्ताह की चढ़ाई के बाद महक प्लाजा द मूला कैंप में पहुंची. यहां से आगे का सफर शुरू करने के बाद खराब मौसम और तूफान ने उनका रास्ता रोका. लेकिन उन्होंने हिम्मत न हारते हुए आगे बढ़ने का निर्णय लिया. कैंप के टेंट भी आधे से ज्यादा बर्फ में दब गए और बर्फ हटाने के चक्कर में काफी समय उन्हें - 30 से 40 डिग्री टेंपरेचर में ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ा. जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई थी. उन्हें बुखार से दो-चार होना पड़ा. मात्र 17 वर्ष की आयु की महक ज्योत को उसके गाइड और डॉक्टर्स ने न जाने की सलाह दी. लेकिन वे हर हालत में आकांकगुआ की चोटी पर फतह हासिल करना चाहती थी. जो उसके लिए जानलेवा हो सकता था. इसकी जानकारी ईमेल द्वारा उनके पिता को दी गई.  साथ ही बताया गया कि कैंप के बाद इमरजेंसी के बचाव के लिए हेलीकॉप्टर भी नहीं पहुंच सकता. सबसे कम उम्र की भारतीय बच्ची बनने के संकल्प को पूरा करने के लिए महक की जीत और हौसले को देखते हुए उसे माउंट बोनेट को फतेह करने की सलाह दी गई. जो 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.


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