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नया हरियाणा

मंगलवार, 29 सितंबर 2020

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खट्टर साहब, नकली गाय भक्त बनने से काम नहीं चलेगा: केजरीवाल

उन्होंने कहा कि हम प्रति गाय प्रति दिन 40 रुपये देते हैं। खट्टर साहब, आपको भी 40 रुपये देने पड़ेंगे.

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15 जनवरी 2019



नया हरियाणा

"मैं खट्टर सरकार से कहना चाहता हूँ कि नकली गाय भक्त बनने से काम नहीं चलेगा। आपको एलान करना पड़ेगा। हम प्रति गाय प्रति दिन 40 रुपये देते हैं। आपको भी 40 रुपये देने पड़ेंगे।" हांसी के श्री गौशाला साला डेरी डाटा में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ये बात कही। 
केजरीवाल ने कहा, "मैंने कल कहा था कि खट्टर सरकार प्रति गाय प्रति दिन केवल 40 पैसे देती है। 40 पैसे में क्या होता है। पत्रकारों ने इस बात पर जब बीजेपी के एक बड़े नेता से सवाल पूछ लिया तो वह बोले हम 40 पैसे तो देते हैं। मैं कहना चाहता हूँ कि आप अहसान नहीं करते। ये जनता का पैसा है।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार है। भाजपा 'गाय-गाय-गाय-गाय' के नाम पर वोट मांगती है लेकिन गाय के चारे के लिए पैसे नहीं देती।  केजरीवाल ने कहा, "मुझे दुख तब होता है जब गाय के नाम पर वोट मांगा जाता है। जब गाय के नाम पर राजनीति होती है। गाय से ज्यादा शांति प्रिय जानवर दूसरा नहीं है। लेकिन उसके नाम पर ये लोग दंगा कराकर, मार पीट कराकर गलत किस्म की राजनीति करते हैं।" 
उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों-अस्पतालों के कायाकल्प, प्राइवेट स्कूलों की फीस ना बढ़ने देने, देश में सबसे सस्ती बिजली, फसल बर्बाद होने पर किसानों को 20 हजार रुपये प्रति कीले के मुआवजे, शहीदों के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने जैसे कामों के बारे में तो हर कोई जानता है कि लेकिन हमारा एक काम आप सबको पता नहीं होगा कि हमने दिल्ली की गौशालाएं भी ठीक कर दी हैं। दिल्ली की बवाना गौशाला को बेस्ट गौशाला का अवार्ड भी मिल चुका है। आप सब जब दिल्ली आओ तो हमारे स्कूल- अस्पताल के साथ-साथ हमारी गौशाला भी देखो।

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"आम आदमी पार्टी आजादी की दूसरी लड़ाई है। आम आदमी पार्टी क्रांति का दूसरा नाम है। आम आदमी पार्टी आंदोलन का नाम है। आम आदमी पार्टी, अन्ना आंदोलन से निकली हुई है। अन्ना आंदोलन में हमने लाठियां खाई हैं। हम जेल गये। हमें मजबूरी में पार्टी बनानी पड़ी। हमें राजनीति करनी नहीं आती। आजादी के दीवानों के अधूरी सपने को पूरा करना है।" हांसी की श्री गौशाला साला डेरी डाटा में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ये बात कही। केजरीवाल ने ये भी कहा कि जो देश, जो समाज, अपने शहीदों की शहादत का सम्मान नहीं करता, वो कभी तरक्की नहीं कर सकता। 
उन्होंने कहा, "मैं बहुत छोटा सा व्यक्ति हूँ। आज से पांच साल पहले मुझे कोई नहीं जानता था। मुख्यमंत्री बनने से पहले जब मैं देखता था कि कोई खिलाड़ी क्रिकेट मैच जीत कर आता था तो उसे कोई 1 करोड़ कर इनाम देता था, कोई 5 करोड़ का इनाम देता था। परन्तु बड़ा ही दुःख होता था, जब हमारा कोई जवान शहीद होता था तो कोई उसके परिवार को पैसा देना तो दूर की बात, सांत्वना देने भी नहीं आता था। मैंने शहीदों के परिवारों को रोते हुए देखा है। उस समय हम सोचते थे कि अगर भगवान की कृपा हुई और हमारी कभी चली तो सबसे पहले शहीदों के सम्मान में 1 करोड़ रुपये देंगे।
केजरीवाल ने कहा कि 14 फरवरी, 2015 को दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और 24 फरवरी को हमने ये योजना लागू कर दी कि आज के बाद अगर कोई दिल्ली का रहने वाला सैनिक बॉर्डर पर शहीद होता है, दिल्ली पुलिस का सिपाही अपनी ड्यूटी करते हुए शहीद होता है या दिल्ली फायर सर्विस का कोई सिपाही लोगों की जान बचाते हुए शहीद होता है तो दिल्ली सरकार उसके परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान करेगी। सरकार बनने के केवल 10 दिन के अन्दर हमने देश पर शहीद होने वाले अपने सिपाहियों के लिए कानून बना दिया और पहला सम्मान हमने दिल्ली पुलिस के एक कर्मचारी के परिवार को दिया था। 
केजरीवाल ने कहा, "आप सभी जानते हैं कि दिल्ली में सरकार चलाना हमारे लिए कितना मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार हमारे हर काम में रोड़ा अटका रही है। लेकिन मोदी जी ने सबसे खराब काम शहीदों के सम्मान में उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये दिए जाने वाली स्कीम पर रोक लगाकर किया। इन अड़चनों से परेशान होकर हमें सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट से हमें अनुमति मिली, तब जाकर हम शहीदों के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने की स्कीम को दोबारा लागू कर सके।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि जब मैंने ये स्कीम शुरू की थी तब बीजेपी-कांग्रेस वालों ने इसका बहुत विरोध किया। बीजेपी-कांग्रेस वाले बोल रहे थे कि केजरीवाल पैसे बर्बाद कर रहा है। हमने अब तक 20 शहीदों के परिवारों 1-1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी है। दिल्ली सरकार अपने शहीदों के सम्मान में 20 करोड़ रुपये खर्च करके गरीब नहीं हो गई।


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