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नया हरियाणा

सोमवार , 22 जनवरी 2018

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राखी गढ़ी : गौरवशाली इतिहास पर भारी वर्तमान राजनीति

राखी गढ़ी में विश्व की प्राचीनतम सभ्यता मिली है। यह स्थल दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है.


rakhi garhi par politics, naya haryana

11 जनवरी 2018

नया हरियाणा

राखी गढ़ी पर राजनीति
राखी गढ़ी में विश्व की प्राचीनतम सभ्यता मिली है। यह स्थल दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। क्योंकि यहां पर्यटकों के लिए म्यूजियम तैयार करवाया जा रहा है, शोधार्थियों के लिए हॉस्टल बनवाया जा रहा है। यहां पर्यटन स्थल विकसित होने से इस क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। 
1997 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग(आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की तरफ से राखी गढ़ी में जगह चिन्हित की गई और खुदाई शुरू करवाई गई। गांव के लोगों ने इकट्ठे होकर इसके खिलाफ 1997 में माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। 29 मार्च 2012 को कोर्ट का फैसला गांव वालों के खिलाफ आ गया। परंतु उन्होंने नेताओं के बहकावे में आकर कोर्ट के फैसले को नहीं माना, जिसके कारण उन पर कोर्ट की अवमानना का केस भी हो गया और दूसरी तरफ उस समय की हुड्डा सरकार ने डी-नोटिफाई करके उन्हें राहत नहीं दी। कोर्ट ऑफ कंटेम्प्ट वाले केस की सुनवाई 18 फरवरी 2018 को होनी है। 

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राखी गढ़ी का बिजनेस मॉडल
डेक्कन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर वसंत शिंदे ने कहा कि वैसे तो हर खुदाई के बाद रिसर्च पूरी होने के बाद हम उस साइट को मिट्टी से पाट देते हैं। लेकिन यहां हम चाहते हैं कि इस खुदी हुई साइट को इतिहास के पदचिह्नों की तरह संरक्षित किया जाए। इन जगहों पर एक शेड डाला जाए। सैलानी यहां हड़प्पा सभ्यता के निशानों को किसी म्यूजियम में देखने की जगह सीधे यहां आकर देखें। यकीनन दुनियाभर से लोग यहां आएंगे। यह कदम आय का एक बड़ा जरिया बनने के साथ ही राखीगढ़ी को मशहूर करेगा। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। दूसरा प्रस्ताव है कि यहां एक संग्रहालय बने। जिसका उद्घाटन भी मार्च में हो गया है। तीसरा प्रस्ताव कन्जर्वेशन साइट बनाने का है जिससे आस-पास मिली चीजों को यहां संरक्षित किया जा सके। यहां रिसर्च की भी सुविधा हो। दूर दूर से यहां आकर लोग रिसर्च करें। तीसरा यहां इस गांव में खूब हवेलियां हैं। उन हवेलियों को टूरिज्म के मकसद से सैलानियों के रहने के लिए तैयार किया जाए। कुल मिलाकर ऐतिहासिक पर्यटन का एक बेमिसाल मॉडल तैयार किया जा रहा है। ऐसा मॉडल इससे पहले बनाया जाना तो दूर की बात, यह सोचा तक नहीं गया है।
1997 में अमरेंद्रनाथ की अगुवाई में यहां खुदाई शुरू हुई। 2001 में उन पर आर्थिक धांधली का आरोप लगा। जिसकी सीबीआई जांच शुरू हुई।
गांव वालों में यह उम्मीद बंधी है कि इस खुदाई स्थल के विकास से उनके लिए नौकरियों के अवसर खुलेंगे. एएसआइ ने फिलहाल काम रोक दिया है क्योंकि फंड के प्रबंधन को लेकर सीबीआइ जांच चल रही है, पर गांववाले चाहते हैं कि अब इस स्थल के संरक्षण में ज्यादा सक्रियता बरती जाए. एएसआइ के प्रवक्ता बी.आर. मणि कहते हैं, ''गांव का आंशिक रूप से संरक्षण किया गया है. पूरे स्थान को बाड़ से तभी घेरा जा सकता है, जब एएसआइ जमीन हासिल कर ले.”  एएसआइ तो शुरू से चाहता था कि उसे खुदाई के लिए पूरा गांव मिले क्योंकि वहां और भी अवशेषों के पाए जाने की संभावना है, लेकिन गांववालों को कहीं और बसाने का मसला अभी तक सुलझ नहीं पाया है. मणि कहते हैं, ''यह इतना आसान नहीं है. सिर्फ राज्य सरकार ही उनका पुनर्वास कर सकती है.”
राखी गढ़ी में संसार की सबसे पुरानी सभ्यता के अवशेष
पुरातत्त्व वैज्ञानिक अब इस निष्कर्ष पर लगभग पहुंच गए हैं कि सिंधु-घाटी सभ्यता की राजधानी हरियाणा के जिला हिसार में स्थित गांव राखीगढ़ी में थी। दुनिया के सबसे बड़े एवं पुराने सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों में एक राखीगढ़ी तेज आर्थिक विकास के उफान के कारण विलुप्ति के कगार पर पहुँच गया है। पुरातत्ववेत्ताओं ने हरियाणा स्थित राखीगढ़ी की खोज 1963 ई. में की थी और तब इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर माना गया। उस समय के शोधार्थियों ने सप्रमाण घोषणाएं की थीं कि यहां दफ्न नगर, कभी मुअनजोदड़ो और हड़प्पा से भी बड़ा रहा होगा।
विलुप्त सरस्वती नदी के किनारों पर ही स्थित था यह शहर। पुरातत्त्वविदों का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता का प्रारंभ इसी राखीगढ़ी से माना जा सकता है। 1997 में यहां से, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग को जो कुछ भी उत्खनन के मध्य मिला, उससे पहला तथ्य यह उभरा कि ‘राखीगढ़ी’ शहर लगभग साढ़े तीन किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ था। यहां से जो भी पुराने अवशेष मिले उनकी उम्र पांच हजार वर्ष से भी अधिक है।
 विश्व विरासत कोष की मई 2012 रिपोर्ट में 'ख़तरे में एशिया के विरासत स्थल' में 10 स्थानों को चिह्नित किया है। रिपोर्ट में इन 10 स्थानों को 'अपूरणीय क्षति एवं विनाश' के केन्द्र करार दिया गया है। इनमें हरियाणा में स्थित राखीगढ़ी भी है। जिसके बाद इसके सरंक्षण का दबाव भारत पर बढ़ गया था।
भारतीय पुरातत्व विभाग ने राखीगढ़ी में खुदाई कर एक पुराने शहर का पता लगाया था और तकरीबन 5000 साल पुरानी कई वस्तुएँ बरामद की थीं। राखीगढ़ी में लोगों के आने जाने के लिए बने हुए मार्ग, जल निकासी की प्रणाली, बारिश का पानी एकत्र करने का विशाल स्थान, कांसा सहित कई धातुओं की वस्तुएँ मिली थीं।
ऐसा दावा किया जा रहा है कि राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार ज़िले में सरस्वती तथा दृषद्वती नदियों के शुष्क क्षेत्र में स्थित एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान है। राखीगढ़ी सिन्धु घाटी सभ्यता का भारतीय क्षेत्रों में धोलावीरा के बाद दूसरा विशालतम ऐतिहासिक नगर है। राखीगढ़ी का उत्खनन व्यापक पैमाने पर 1997-1999 ई. के दौरान अमरेन्द्र नाथ द्वारा किया गया। राखीगढ़ी से प्राक्-हड़प्पा एवं परिपक्व हड़प्पा युग इन दोनों कालों के प्रमाण मिले हैं। राखीगढ़ी से महत्त्वपूर्ण स्मारक एवं पुरावशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें दुर्ग-प्राचीर, अन्नागार, स्तम्भयुक्त वीथिका या मण्डप, जिसके पार्श्व में कोठरियाँ भी बनी हुई हैं, ऊँचे चबूतरे पर बनाई गई अग्नि वेदिकाएँ आदि मुख्य हैं।
ख़तरे में एशिया के विरासत स्थल
विश्व विरासत कोष ने इस सूची में ख़तरे में जिन स्थलों को रखा है, उनमें काशगर भी शामिल है, जो चीन के अंतिम रेशम मार्ग स्थलों में है। इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान स्थित मेस आयनाक भी है, जो प्राचीन बौद्ध मठ है। इसमें थाइलैंड में स्थित अयुथ्या, फ़िलीपींस का क़िला सेंटियागो, बांग्लादेश स्थित महाष्टंगण, म्यांमार स्थित म्यूक-यू, कंबोडिया स्थित प्रीह विहियर आदि हैं। विश्व विरासत कोष के कार्यकारी निदेशक जेफ़ मोरगन ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि ख़तरे में विरासत के 10 स्थल एशिया में अलग-अलग स्थानों पर हैं। इन स्थानों पर पुरातन विरासत है।


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