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नया हरियाणा

बुधवार, 20 मार्च 2019

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नींदें हराम कर देने वाला मंटो मेरा दोस्त मेरा दुश्मन

खुदा के बनाये बन्दे ज़िन्दगी जी के मर जाते हैं पर मंटो तुमने किरदारों को ज़िन्दगी देकर अमर कर दिया.

Sahadat Hasan Manto, naya haryana, नया हरियाणा

11 जनवरी 2019

नया हरियाणा

ये नाम आते ही जहन में तस्वीर उभरती है एक बेपरवाह, बेबाक, जमाने के साथ चलता जमाने से दूर, हाज़िरजवाब शख़्स की;.. जितना ज़्यादा पढ़ती हूँ उसके करीब जाती हूँ.

मैं इस्मत चुग़ताई नहीं जो हक़ से कह दे, मंटो मेरा दोस्त मेरा दुश्मन,. न उपेन्द्रनाथअश्क, जैसी उनकी रेडियो सहकर्मी कि लिख दूँ मंटो मेरा दुश्मन, न मेरे रिश्ते अहमद नदीम कासिमी जैसे हैं जो बेबाक़ी से लिख दूँ, मंटो मेरा यार, न मैं नरेन्द्र मोहन जैसी उसको चाहने वाली हूँ जो उसकी जीवनी लिख दूँ मंटो ज़िंदा है
मंटो मेरे लिए वो है जो मेरी रातों की नींदें हराम कर सकता है. वो शख़्स जिसकी कहानी. महज़ पन्द्रह-सोलह साल की लड़की बहुत कुछ न समझते हुए भी अन्दर तक अपने सीने को नश्तर से चिरा पाती है और फिर तलाश शुरू हो जाती है मंटो को जानने की. एक कतरा भी मंटो को पढ़ कर घंटों तक उसके बारे में सोचते रहना कि वो क्यों कर ऐसा? हाँ मंटो मेरा जुनून ही तो है.
एक शख़्स जिसने बयालीस साल आठ महीने और सात दिन ज़िन्दगी के जिए और दुनिया को सदियाँ दे गया उसके बारे में सोचने के लिए, लिखने के और उसके लिखे को समझने के लिए. एक मासूम.. पिता से डरने वाला शख़्स किस क़दर जुनूनी होता चला गया और बदहवास भी.. फिर भी कलम का तीखापन. उसकी धार कम न हुई।
मंटो की आलोचना करने वाले मेरी नज़र में उसके सबसे ज़्यादा चाहने वाले हैं. वो आलोचना करते गए. मंटो अमर होता गया. मंटो को अश्लील क़रार देने वाले खुद अश्लील सोच वाले हैं. पता नहीं वास्तविकता में, सच्चाई में उन्होंने अश्लीलता कैसे ढूँढ ली?
कैसे ठंडा गोश्त किसी को वासना से लबरेज़ लग सकता है? कैसे खोल दो, मुर्दा सकीना; किसी के अन्दर की वासना को जगा सकती है? जिसकी जागती है, मेरी निग़ाह में वो अश्लील है. मंटो का एक-एक शब्द. एक-एक अफ़साना जिस्म का एक- एक क़तरा निचोड़ सकता है.
बक़ौल मंटो
ज़बान में बहुत कम लफ्ज़ फ़हश (वासना) ही है, तरीके-इस्तेमाल ही एक ऐसी चीज़ है जो पाकीज़ा से पाकीज़ा अल्फ़ाज़ भी फ़हश बना देता है. मेरा ख्याल है कोई भी चीज़ फ़हश नहीं, लेकिन घर की कुर्सी और हांड़ी भी फ़हश हो सकती है, अगर उसको फ़हश तरीके से पेश किया जाये– फ़हश चीजें बनाई जाती हैं किसी ख़ास ग़रज़ के मातहत.
मंटो मुझको बाँध लेता है.. बढ़ने ही नहीं देता. एक शख़्स जो महफिलबाज़ है, शराब का शौक़ीन है, दोस्तों की महफ़िल में घटिया से घटिया जोक पेश करता है. पर अपनी बीवी; के सामने आने पर खामोश.. अपनी तीनों बच्चियों के शोर-शराबे में भी अपने अफ़साने लिखता रहता है.. क्योंकि ये उसका काम है. मंटो मुझे उस दौर में ले जाता है जो मैंने देखा नहीं.
मंटो कहता है
 मेरे अफ़साने तंदुरुस्त और सेहतमन्द लोगों के लिए हैं, नार्मल इंसानों के लिए. जो औरत और मर्द के रिश्ते को इश्तेजाब (आश्चर्य) की नज़र से नहीं देखते 
मंटो मुझमें जीता है और इस क़दर जीता है कि मेरी भूख-प्यास सब मार देता है. उसकी सौगंधी, सकीना, सुल्ताना, घाटन लड़की, ईशर सिंह, कुलवंत कौर, सरदार बिशन सिंह,  सब चीख-चीख कर गवाही देते हैं.. हाँ मंटो है. यहीं कहीं है .. उनको अमर करने वाला मर नहीं सकता . वो ज़िन्दा है 
मंटो के दुबले-पतले शरीर और जुनूनी चेहरे पर चश्मे के पीछे वो उसकी बड़ी-बड़ी शरीर को आर-पार कर देने वाली दो बोलती आँखें.. अक़्सर करके अपने बदन पर चिपकी हुई पाती हूँ ;.. बस सजग हो जाती हूँ कि मंटो जरूर मुझपर कोई बोलता अफ़साना लिख रहा होगा.. और मेरी शख़्सियत– जो अक़्सर करके मैं छिपा कर रखती हूँ.. उधेड़ कर सामने रख देगा और अपने वहशी ठहाकों के साथ बोल देगा  किस मुग़ालते में थी तुम? कि मंटो तुमको बख़्श देगा ? मैं यक़ीनन नहीं चाहती कि बख़्शी जाऊँ. तुम मुझे तारीख़ में दर्ज़ करा देते .. तुम होते मंटो. तो तुमसे मिलती ज़रूर. और भरोसा है मुझे खुद पर कि तुम्हें ख़ुद को भूलने नहीं देती.

जो तुमने अपनी क़ब्र पर लिखवा रखा है न
यहाँ सआदत हसन मंटो दफ़न है, उसके सीने में फ़न-व-अफ़सानानिगारी के सारे इसरार व रमूज़ दफ़न हैं. वो अब भी मनो मिट्टी के नीचे सोच रहा है कि वो बड़ा अफ़सानानिगार है या खुदा.
खुदा के बनाये बन्दे ज़िन्दगी जी के मर जाते हैं पर मंटो तुमने किरदारों को ज़िन्दगी देकर अमर कर दिया. माना कि मनों मिट्टी तले दफ़न हो गए पर तुम्हारी आँखें उस मिट्टी का सीना चीरकर भी झाँकती होंगी;.. जुनून की हद तक तुम्हारे चाहने वालों को और तुम्हारी निगाहें मुझपर जरूर ठहरती होंगी.. जानती हूँ मैं


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