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नया हरियाणा

सोमवार , 20 मई 2019

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बड़े नौकर से तो छोटा मालिक बनना लाख गुणा अच्छा होता है

सरकारी और प्राइवेट नौकरियों के पीछे भागने के चक्कर में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है।

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10 जनवरी 2019



नरेंद्र सहारण

ये सच्ची कहानी है एक ऐसे पढ़े लिखे वेल एजुकेटेड संपन्न होनहार नौजवान की जो अपनी सालाना दस लाख के पैकेज वाली नौकरी छोड़ कर आज मिल्क पार्लर चला रहे हैं इस कहानी में प्रेरणा है कुछ अलग ही तरह की इंस्पिरेशन है बेरोजगारों के लिए जो नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं इस कहानी में हल है हर उस नौजवान इंसान की समस्या का जो बड़े दबाव में आकर अपनी नौकरी को जैसे-तैसे करता है!

सोचने की बात है क्या कभी धीरूभाई अंबानी अगर खुद का छोटा मोटा काम शुरू नहीं करते तो क्या ईतनी बड़ी रिलायंस इंडस्ट्री खड़ी हो पाती? क्या रतन टाटा के पिता जमशेद भाई टाटा किसी के यहां नौकरी करते तो क्या आज इतना बड़ा टाटा ग्रुप खड़ा हो पाता ?अनेकों ऐसे उदाहरण है इस देश में जो लोग छोटे-मोटे काम शुरू करके आज आसमान में पहुंच गए हैं।

बस जरूरत होती है शुरुआत की जो आदमी ठान ले शुरुआत करने की वही कुछ कर बैठता है, और ऐसे इंसानों को प्रोत्साहन देना उनकी हौसला अफजाई करना इनकी मदद करना उनको प्रमोट करना समाज के हर इंसान को उनका साथ देना बहुत जरूरी है क्योंकि ऐसे लोगों से हमेशा प्रेरणा मिलती है।

जब आप अपने हुनर से हट कर कोई अपनी रूचि के अनुसार काम करना शुरू करते हैं या फिर असंभव-सा दिखने वाला कोई कारनामा शुरू करने का संकल्प लेते हैं तो मान लीजिए कि आप रात के समय तूफान में छत पर चढ़ कर दीपक जलाना चाह रहे हैं लोग आपकी निंदा भी करेंगे आपका मजाक भी उड़ाएंगे और आप को मूर्ख और अहमक करार देंगे वे कहेंगे कि कैसा पागल बेवकूफ आदमी है जो आंधी तूफान में भी दीपक जलाने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन खुद के लिए एक मजबूत स्टैंड लेना पूरे जमाने को चुनौती देने जैसा होता है वही किया प्रदीप श्योराण ने 33 वर्षीय प्रदीप हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री धारक प्रदीप जिन्होंने अपनी मल्टीनेशनल कंपनी में दस लाख रुपए सालाना पैकेज की नौकरी को छोड़ कर कुछ ऐसा करने की ठानी ली जिससे बहुत कुछ आयाम हासिल हो सकते हैं। इनका यह कदम हर बेरोजगार और हर नौकरी पेशा इंसान को सोचने पर मजबूर कर सकता है और जब मैंने इनकी स्टोरी पढ़ी तो वाकई मुझे लगा इंसान कितने मानसिक तनाव में छोटी छोटी नौकरियों के लिए पिसता रहता है।

प्रदीप ने रोहतक शहर में अलग अलग जगह पर मिल्क पार्लर खोल कर शहरवासीयो को ताजा गर्म दूध पिलाने का काम शुरू किया है साथ में ऑर्गेनिक गुड दूध के साथ देते हैं इनके इस काम के पीछे इनकी सोच बहुत ही उम्दा है प्रदीप का कहना है मेरा ऐसा करना मुझे स्वतंत्रता की अनुभूति प्रदान कर रहा है मुझे सुखद एहसास होता है!

मेरा ऐसा करना कितने लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है और कितने लोगों की सेहत का मैं ख्याल रख रहा हूं मेरा खुद का यह काम मुझको तो संतुष्टि प्रदान कर ही रहा है साथ में जिस मिट्टी के कुल्लड में दूध लोगों को पिलाया जाता है उसके कारण कुम्हार जाति के लोगों को रोजगार और आस पास के किसान ताजा दूध इनके पार्लर पर भेजते हैं यह दूध को गर्म करके लोगों को पिलाते हैं सुबह शाम मॉर्निंग इवनिंग वॉक करने वाले लोग इनके मिल्क पार्लर पर दूध पीते हैं।

सोचने की बात है जिस वेल एजुकेटेड इंसान को लगभग ₹80000 प्रति माह की नौकरी किसी कंपनी ने दी हो और वह उस नौकरी को छोड़कर लोगों को दूध पिलाने का काम करें तो यह जानना बहुत जरूरी है कि ऐसा क्यों किया जाता है जो कंपनी इतना पैसा दे रही है वह एक इंसान को मशीन के रूप में इस्तेमाल करके उससे कई गुना ज्यादा पैसा उससे बनवा जाती है नौकरी करने वाला हर इंसान कोल्हू के बैल जैसा होता है परंतु जिस दिन वह छोटा सा मालिक बन जाता है उसी दिन उसको स्वतंत्रता का आभास होता है उसे लगता है कि वह वाकई एक स्वाधीन इंसान हैं।

रही बात लोगों के कहने सुनने की निंदा करने की निंदा"से घबराकर अपने "लक्ष्य" को ना छोड़े क्योंकि लक्ष्य" मिलते ही निंदा करने वालों की"राय"बदल जाती है।

दोस्तों यह कहानी हमें एक सीख देती है कि हम जिंदगी में कुछ भी कर सकते हैं और ऐसे लोग हमारे आस पास अगर कुछ करने की कोशिश करें तो हमें उनका सहयोग जरूर करना चाहिए प्रदीप मेरे आभासी दुनिया के दोस्त हैं और इनके इस काम के लिए मैं सदैव इनका सहयोग करना चाहूंगा अगर आपको यह प्रेरणादायक सच्ची कहानी पसंद आए तो इसे शेयर करें ताकि और लोग भी कुछ सीख सकें और आत्मनिर्भर बनें स्वाभिमान की जिंदगी जीना चाहें तो जी ले।


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