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नया हरियाणा

बुधवार, 26 जून 2019

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जींद में पहली बार कमल खिलेगा : मनोहर लाल

उन्होंने कहा कि जनता विकास पर मोहर लगाएगी।

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6 जनवरी 2019



नया हरियाणा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पिछले 4 सालों में पिछली सरकारों की तुलना में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सुशासन विकास सामाजिक सामर्थ से समाज की दिशा ठीक करने का कार्य किया है। जिस पर प्रदेश के लोगों ने नगर निगम के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को भारी मतों से जीता कर मोहर लगाई है और यही जींद विधानसभा के उपचुनाव में 28 जनवरी को लोग दोहराएंगे और पहली बार जींद में निश्चित रूप से कमल का फूल खिलेगा।

उन्होंने कहा कि जींद उपचुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित है। वहां के उम्मीदवार के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं और शीघ्र ही कमेटी द्वारा इस के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। इस चुनाव में जीत के लिए उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि वह अपने रिश्तेदारों व सगे संबंधियों से भी कहें कि वह भाजपा के उम्मीदवार को वोट दें। 

जींद उपचुनाव में सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे दलों की तरफ मुंह तांके हुए यह देख रहे हैं कि वह किसे टिकट देंगे। पहले आप पहले आप की नीति पर चलते हुए सभी दल असमंजस की स्थिति में साफ दिख रहे हैं। इस से साफ पता चलता है कि सभी दल जातिगत समीकरणों को साधने के लिए दूसरों दलों के उम्मीदवारों के चेहरों को देखना चाहते हैं। हालांकि भाजपा के पास सबसे ज्यादा दावेदार हैं। उसके बाद कांग्रेस के पास दावेदार हैं। जेजेपी और इनेलो दोनों की स्थितियां स्पष्ट नहीं दिख रही हैं।

जींद उपचुनाव में जातिगत समीकरण ही बड़ा खेल बनाएंगे और बिगाड़ेंगे

जींद उपचुनाव में सभी दल वेट एंड वॉच की नीति पर चलते हुए अपनी रणनीति बना रहे हैं। जींद उपचुनाव कि अगर हम बात करें तो यहां पर जातिगत समीकरण बहुत हद तक मायने रखते हैं। वोटों के अगर जातिगत आंकड़े की ओर ध्यान दिया जाए तो यहां कुल मतदाता 169210 हैं। जिनमें

जाट - 47156

ब्राह्मण - 14986

पंजाबी - 14888

सैनी 14488

महाजन 14143

चमार 13998

बाल्मीकि 8897

कुम्हार 6848

धानक 5212

खाती 3867

बैरागी 2951

लौहार 2781

नाई 2526

सुनार 1637

बादी 1265

खटीक 1178

सांसी 1167

अन्य जातियां 11225

बीजेपी इस बार जींद उपचुनाव में पिछड़ा वर्ग के किसी प्रत्याशी को चुनाव मैंदान में उतार सकती है। क्योंकि बाकी दलों की रणनीति में पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार की तरफ कम ध्यान दिया जा रहा है। जबकि वोट प्रतिशत के हिसाब से पिछड़ा वर्ग जीत-हार में बड़ा फैक्टर साबित होने वाला है। इस सीट पर 1987 में परमानंद ही पिछड़ा वर्ग से एक बार विधायक बने हैं।

पिछड़ा वर्ग को फोकस करने राजनीति करने वाले राजकुमार सैनी ने भी किसी पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी को  टिकट नहीं दी। उन्होंने ब्राह्मण समुदाय के विनोद आसरी को टिकट दी है।


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