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नया हरियाणा

बुधवार, 16 जनवरी 2019

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जींद उपचुनाव में इनेलो पार्टी नहीं लड़ेगी चुनाव!

जींद उपचुनाव में सभी दलों और कार्यकर्ताओं के दिलों की धड़कने बढ़ती जा रही हैं।

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5 जनवरी 2019

नया हरियाणा

राजनीति संभावनाओं का कम समीकरणों का ज्यादा खेल होती है। यह बात जींद उपचुनाव के संदर्भ में बेहतर ढंग से समझी जा सकती है। इसके ताजा उदाहरण मांगेराम गुप्ता हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए सभी दलों में सभी तरह की संभावनाओं को खंगाल लिया। जबकि उन्होंने जातिगत व राजनीतिक समीकरणों की तरफ कम ध्यान दिया इसी वजह से वह आज सभी पार्टियों से नकार दिए गए हैं।

जननायक जनता पार्टी के बाद बीजेपी में अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने के बाद कल अभय सिंह चौटाला से मांगे राम गुप्ता की मुलाकात में उनके राजनीतिक भविष्य को खतरे में डाल दिया है।
राजनीति में पल-पल बदल रहे समीकरणों को देखें तो  पूरी संभावना है कि जींद उपचुनाव में इनेलो चुनाव नहीं लड़ेगी क्योंकि उसने जातिगत वह राजनीतिक समीकरणों को समझते हुए बसपा को चुनाव लड़ाने का निर्णय ले सकते हैं।
इनेलो को इसके दो फायदे मिल सकते हैं पहला यह कि वह अपने बसपा और दलों के गठबंधन को इस चुनाव में पड़ सकता है। दूसरा बसपा पर दांव लगाने के साथ-साथ वह किसी जाट उम्मीदवार को चुनाव में उतार सकती है। इससे दोनों दलों के जातिगत समीकरण साधने की पूरी संभावना रहेगी और जो यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि जेजेपी इनेलो को नुकसान पहुंचा सकती है उसकी संभावनाएं कम से कम रह जाएंगी। जेपी के बेटे विकास के चुनाव मैदान में उतरने की अटकलों ने जे जे पी की मुश्किलें पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ा दी हैं। कांग्रेस का जेपी के बेटे पर दांव लगाना का कांग्रेस के भीतर जान भर सकता है।
नाग जनता पार्टी के अब तक के फैसलों को देखें तो सभी बैक फायर करते हुए नजर आ रहे हैं पार्टी जमीनी स्तर पर अपने फैसले को लेकर एक नकारात्मक संदेश ज्यादा दे पा रही है। इन्होंने पहले राव इंद्रजीत के साथ मुलाकात करके यह प्रचार करने की कोशिश की कि राव इंदरजीत जेजेपी में शामिल हो सकते हैं। 

उसके बाद गोपाल कांडा से मुलाकात करके यह दिखाने की कोशिश की कि वह भी पार्टी में आ सकते हैं। इसके बाद जींद उप चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मांगेराम गुप्ता के घर जा कर यह दर्शाने की कोशिश की कि वह उनकी पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं। परंतु मांगेराम गुप्ता ने बीजेपी के नेताओं से मुलाकात करके यह प्रदर्शित कर दिया कि उन्हें जे जे पी पर ज्यादा विश्वास नहीं है अन्यथा वह बीजेपी और अभय सिंह से मुलाकात नहीं करते।


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