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नया हरियाणा

बुधवार, 24 जुलाई 2019

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जानिए लाल डोरा क्यों कहा जाता है?

लाल डोरा कोई रबड़ नहीं जो बढ़ाया जा सके और ना ही कोई साँप है जिसे मारा जा सके।

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4 जनवरी 2019



नया हरियाणा

 लाल डोरा है क्या?

लाल डोरा को अंग्रेजों ने सन 1908 में बनाया था | उस समय रेवेन्यू रिकॉर्ड रखने के लिए खेतीबाड़ी की जमीन के साथ स्थित गाँव की आबादी को अलग-अलग दिखाने के मकसद से नक़्शे पर आबादी के बाहर लाल लाइन खिची जाती थी | लाल डोरे के अंदर लोग कब्जे के मालिक होते हैं।जिसे लाल डोरा भी बोला जाता है |  लाल डोरा कोई कानूनी एक्ट क़ानून नहीं है। लाल डोरे से बाहर की जमीन के अलग अलग नंबर होतेहै। जिसे लाल डोरा भी बोला जाता है।

हरियाणा सरकार के लाल डोरा खत्म करने के फैसले पर सोशल मीडिया पर दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों ने इसका स्वागत किया है और जनहित का कदम बताया है। दूसरी तरफ जिन्हें सरकार के हर कदम में खामियां देखने की आदत हो गई है, उन्होंने भय प्रदर्शित तो किया पर अपने भय का तार्किक कारण नहीं बताया।

वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और शहरी निकाय मंत्री कविता जैन की सदस्यता वाली कैबिनेट सब कमेटी गांवों का लाल डोरा खत्म करने के हक में है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाले मंत्री समूह में जब यह प्रस्ताव आया तो पूरी सरकार इससे सहमत नजर आई। मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के सदस्यों ने गांवों की तमाम जमीनें लाल डोरे के दायरे से बाहर निकालने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 

भाजपा के मीडिया प्रभारी के नाते सबसे पहले राजीव जैन ने गांवों का लाल डोरा खत्म करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था।उनके पत्र को आधार बनाकर मुख्यमंत्री ने कैबिनेट सब कमेटी बनाई। इसके बाद एक के बाद एक हुई बैठकों में लाल डोरा खत्म करने पर सहमति बनी। बैठक में हालांकि यह प्रस्ताव भी आया कि लाल डोरे का दायरा बढ़ा दिया जाए, लेकिन सहमति तमाम प्रॉपर्टी को लाल डोरे के दायरे से बाहर करने पर बनी। लाल डोरा खत्म होने से होंगी जमीन की रजिस्ट्री: लाल डोरा खत्म करने से करीब 70 फीसद गांव में बसने वाली आबादी को सीधा फायदा होगा। लाल डोरे के दायरे में आने वाली तमाम प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो सकेगी और भू-संपत्तियों की खरीद-फरोख्त शुरू होने के साथ ही जमीन की मार्केट वेल्यू में इजाफा होगा।


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