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नया हरियाणा

सोमवार , 25 मार्च 2019

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नरवाना विधानसभा : ओमप्रकाश चौटाला को जब किया था रणदीप सुरजेवाला ने ढेर

कहा जाता है कि उस समय ओमप्रकाश चौटाला ने सबसे ज्यादा नौकरियां नरवाना में दी थी।

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27 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

जींद ज़िले के नरवाणा की सीट को दिलचस्प बनाने के लिए ओमप्रकाश चौटाला ने 2000 में पहला चुनाव लड़ा था. जिसमें उन्हें 41923 वोट मिले थे और कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला को 39729 वोट मिले थे। 2005 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला को 50954 वोट मिले थे। उन्हें कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने हराया था। उन्हें 52813 वोट मिले थे। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने इस सीट को सामान्य से आरक्षित में बदल दिया था।

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गौरतल है कि 2005 के नरवाणा चुनाव की रिपोर्टिंग के अनुसार-

उनको चुनौती दे रहे हैं युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला. ऐसा नहीं है कि दोनों पहली बार आमने सामने हैं. वे एक दूसरे के ख़िलाफ़ पहले भी तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं. दो बार ओमप्रकाश चौटाला की जीत हुई है तो एक बार रणदीप सिंह सुरजेवाला भी जीत चुके हैं. लेकिन इस बार की लड़ाई का मामला ही अलग है. इसका एक कारण तो यह है कि ओमप्रकाश चौटाला ग़ैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रुप में पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं. इस कार्यकाल के बाद यह उनका पहला चुनाव है. दूसरा यह तथ्य भी है कि पिछली बार जब पूरे हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल की हवा चल रही थी जब भी ओमप्रकाश चौटाला की जीत का अंतर लगभग दो हज़ार वोट ही था. इस बार आमतौर पर लोग मान रहे हैं कि चौटाला को सत्ता में होने वाले दलों को जो नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है वह इस बार चौटाला सरकार को मिल सकती है. उधर रणदीप सिंह सुरजेवाला भी कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं. वे हरियाणा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रह चुके सुरजेवाला के बेटे हैं, मध्यप्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़ के रिश्तेदार हैं और युवक कांग्रेस में सबसे ऊँचे पद पर काम का अनुभव भी उन्हें है. फिर वे इस समय वे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. इसके बाद वे सोनिया गाँधी और उनके परिवार के लिए भी परिचित ही हैं. नरवाणा चुनाव क्षेत्र के जो लोग सुरजेवाला का समर्थन करते हैं वे मानते हैं कि रणदीप सिंह सुरजेवाला मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं. हालांकि ऐसा तो कांग्रेस के आधा दर्जन नेताओं के बारे में कहा जा रहा है.

ओमप्रकाश चौटाला के चुनाव प्रचार का ज़्यादातर काम उनके बेटों और पोते ने संभाल रखा है.लोग बताते हैं कि पिछले पाँच सालों में प्रदेश की बेरोज़गारी की समस्या का हल भले ही न निकला हो मुख्यमंत्री चौटाला ने अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की बहुत चिंता की है. इसका उनके पक्ष में इस्तेमाल भी किया जा रहा है. लोग मानते थे कि मुख्यमंत्री की सीट होने के कारण नरवाणा और जींद ज़िले को लाभ होगा लेकिन वैसा हुआ नहीं. लोग उदाहरण देकर पूछते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्रियों भजनलाल और बंसीलाल के चुनाव क्षेत्रों की तुलना में तो नरवाणा का कोई विकास ही नहीं हुआ. उधर रणदीप सिंह सुरजेवाला मानते हैं कि ओमप्रकाश चौटाला तो नरवाणा के लिए एक बाहरी व्यक्ति हैं. वे दावा करते हैं कि ओमप्रकाश चौटाला को शहर में किसी जगह अकेले छोड़ दिया जाए तो वे बिना किसी से पूछे किसी स्थान पर नहीं जा सकते.रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनावों में ओमप्रकाश चौटाला के भ्रष्टाचार के मुद्दों को बेहद उछाला है. वे दावा करते हैं कि उनके पास भ्रष्टाचार के सारे प्रमाण हैं. हालांकि चौटाला का प्रचार कार्य संभाल रहे भारत भूषण इन आरोपों को झूठा ठहराते हैं. इस समय मतदाता दोनों प्रत्याशियों के आरोपों प्रत्यारोपों को ध्यान से सुन रहे हैं. नतीजे क्या होंगे यह तो 27 फ़रवरी को ही पता चलेगा. ओमप्रकाश चौटाला यदि हारे तो उन्होंने अपने लिए रोड़ी में वैकल्पिक सीट तलाश रहे हैं और वहां से भी चुनाव लड़ रहे हैं. यदि रणदीप सिंह सुरजेवाला हारे तो भी उनके पास राजनीति के दूसरे विकल्प हैं.


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