Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

पहला पन्‍ना English सर्वे लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

किसानों पर फायरिंग के बाद कंडेला खाप ने चौटाला परिवार की एंट्री बंद कर दी थी

गांव के लोगों ने चौटाला के काफिले पर पथराव कर दिया था.

Fearing on farmers, Kandela Kand, Om Prakash Chautala, Kandela Khap, Chautala family entry closed, Dushyant Chautala, naya haryana, नया हरियाणा

27 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

जिस गांव में इनेलो सुप्रीमो और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला तक को अपने गांव में नहीं आने दिया अब उसी गांव में हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला का स्वागत हुआ है. माना जा रहा है कि दुष्यंत के इनेलो से अलग होने और नई पार्टी जननायक जनता दल (जेजेपी के गठन की वजह से बदले हुए राजनीतिक हालातों को देखते हुए कंडेला गांव के लोगों ने दुष्यंत को एंट्री दी है. वरिष्ठ भाजपा नेता और गांव के सरपंच रहे विनोद भारद्वाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दुष्यंत कंडेला खाप के चबूतरे पर पहुंचे. हालांकि मार्च 2005, में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी चौटाला ने एक बार गांव में जाने की कोशिश की थी. लेकिन गांव के लोगों ने चौटाला के काफिले पर पथराव कर दिया था. आज उसी गांव में दुष्यंत चौटाला की एंट्री ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.
जींद का कंडेला गाँव जहां सामाजिक रूप से महत्व रखता है वहीं प्रदेश की राजनीति में भी इसकी अपनी अहम भूमिका है. खापों के प्रभाव वाले हरियाणा में कंडेला खाप ही सबसे बड़ी खाप मानी जाती है. करीब 16 साल पहले 2002 में आंदोलन कर रहे किसानों पर फायरिंग के बाद कंडेला खाप ने चौटाला परिवार की एंट्री बंद कर दी थी. दरअसल किसान बिजली बिल सहित विभिन्‍न मुद्दों पर आंदोलन कर रहे थे अौर उन्‍होंने इस दौरान अधिकारियों को बंधक बना लिया था. इसके बाद पुलिस और किसानों में टकराव हो गया. इस पर पुलिस ने फायरिंग की. इसमें नौ किसानों की मौत आैर करीब 80 लोग घायल हो गए थे. उस समय आेमप्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्‍यमंत्री थे. ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो सरकार के कार्यकाल में भारतीय किसान यूनियन ने कंडेला गांव को अपने आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया था. किसान आंदोलन को खत्म कराने के लिए चौटाला सरकार ने तमाम प्रयास किए, लेकिन बात नहीं बनी. ऐसे में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी और नौ किसानों की मौत हो गई. आज कंडेला में न जगह बदली है और न ही नेता। अगर कुछ बदला है तो केवल यह कि उस समय प्रदेश में इनेलो-भाजपा की सत्ता थी और आज भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में है।


बाकी समाचार