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नया हरियाणा

रविवार, 19 अगस्त 2018

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हिंदू हृदय सम्राट महाराजा सूरजमल

महाराज शिवाजी के बाद वे एकमात्र अजेय हिन्दू महाराजा थे।

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25 दिसंबर 2017

महाराजा सूरजमल स्वाभिमान संगठन

महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ. यह इतिहास की वही तारीख है, जिस दिन हिन्दुस्तान के बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हुई थी. मुगलों के आक्रमण का मुंह तोड़ जवाब देने में उत्तर भारत में जिन राजाओं का विशेष स्थान रहा है, उनमें राजा सूरजमल का नाम बड़े ही गौरव के साथ लिया जाता है. उनके जन्म को लेकर यह लोकगीत काफ़ी प्रचलित है.

'आखा' गढ गोमुखी बाजी, माँ भई देख मुख राजी.

       धन्य धन्य गंगिया माजी, जिन जायो सूरज मल गाजी.

             भइयन को राख्यो राजी, चाकी चहुं दिस नौबत बाजी.'

महाराजा सूरजमल एक ऐसे सम्राट थे जिन्हें पूरा हिंदुस्तान एक हिंदुआ सूरज के रूप में जानता है।

▶उन्होंने मुगलों पठानों अफगानों रुहेलों ब्लुचों आदि सभी मुस्लिमो से लोहा लिया और उन्हें हराया।

▶उनका साम्राज्य राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तक फैला हुआ था।और जटवाड़ा कहलाता था।

▶उन्होंने मंदिरों, गौमाता, सनातन संस्कृति के प्रतीक पीपल के पेड़, महिलाओं व हिन्दू धर्म की जीवनपर्यंत रक्षा की।

▶कुछ मुस्लिम शासकों में उनका इतना खौफ था कि उन्होंने अपने क्षेत्र में भी गौहत्या बन्द कर दी थी व गौहत्या करने वालों को फांसी की सजा देनी शुरू कर दी थी व वे इसकी जानकारी उन्हे पत्र लिखकर सौंपते थे।

▶उनके होते हुए किसी भी महिला पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं होती थी। उन्होंने एक हिन्दू लड़की हरदौल की इज्जत की रक्षा के लिए दिल्ली पर आक्रमण कर दिया था व उन्हें मुगलों से बचाया।

▶उन्हें हिन्दू एकता करने के लिए जाना जाता है उनका खजांची दलित था, उनका गुरु व सलाहकार ब्राह्मण था व उनकी सेना में सब जातियों के लोग थे। उनकी स्थायी सेना के अतिरिक्त उनके राज्य का हर नागरिक अस्थाई सैनिक था।

▶उन्होंने कई दूसरे राज्यों को भी जरूरत पड़ने पर सहायता की। उन्होंने मराठा, राजपूत समेत सब हिन्दू राजाओ की सहायता की।

▶वे बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के धनी थे। उन्होंने मथुरा भरतपुर गोवर्धन आदि समेत ब्रज क्षेत्र में सैंकड़ो मन्दिर तीर्थ स्थान घाट बनवाये।

▶उन्होंने अपनी राजधानी भरतपुर का नाम भगवान श्री राम के छोटे भाई भरत के नाम पर रखा। वे श्री कृष्ण भगवान के वंशज थे, बजरंग बली के बहुत बड़े भक्त थे,और भगवान लक्ष्मण को अपना कुलदेवता मानते थे।

▶उनके युद्ध का झंडा कपिध्वज था जिस पर हनुमान जी की मूर्ति अंकित थी।उनकी रियासत के केसरिया झंडा हमेशा शान से लहराता रहा।

▶वे दोनों हाथों से तलवार चलाना जानते थे व उन्होंने छोटे बड़े लगभग 80 युद्ध किये थे जिनमे वे हमेशा विजयी रहे जिसके कारण उन्हें एक अजेय महाराजा के तौर पर जाना जाता है।

▶उनके बनाये गया भरतपुर का लोहागढ़ किला देश का एकमात्र अजेय किला है जिसे न मुगल जीत पाये और न ही बाद में अंग्रेज।

▶उनका राज्य बहुत ही विशाल, समृद्ध न्यायप्रिय और खुशहाल था। वे सादगी के प्रतीक थे व सिर्फ विशेष अवसरों पर ही मुकुट और राजशाही पौशाक पहनते थे।उनकी पगड़ी हमेशा मोरपंख से सजी रहती थी।

▶वो जनता के बीच रहना पसंद करते थे व ज्यादातर अपनी लोकभाषा का ही प्रयोग करते थे।

▶महाराजा शिवाजी के बाद वे एकमात्र अजेय हिन्दू महाराजा थे।

⏩उनका बलिदान दिवस 25 दिसंबर को है

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