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नया हरियाणा

बुधवार, 26 जून 2019

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ओमप्रकाश चौटाला की गलतियों के लिए दुष्यंत चौटाला मांगेंगे कंडेला में माफी

दुष्यंत चौटाला ओमप्रकाश चौटाला के लिए आफत बनने वाले हैं।

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25 दिसंबर 2018



नया हरियाणा

कंडेला कांड का जिन्न एक बार फिर उठने वाला है। ओमप्रकाश चौटाला के राजनीतिक जीवन के कुछ एक बुरे कामों में से एक कंडेला कांड रहा है। जिसे विपक्ष समय-समय पर उठाता रहा है। पर इस बार उनके पोते दुष्यंत चौटाला इसे जींद उपचुनाव को फोकस में रखते हुए उठा रहे हैं। जिन मुद्दों पर कुछ समय पूर्व तक अपने दादा के पक्ष में दलीले देते थे, आज वो ही पोते दादा के खिलाफ कंडेला में हुंकार भरेंगे। एक तरह से देखा जाए तो दुष्यंत चौटाला अपने दादा ओमप्रकाश चौटाला के लिए आफत बनने वाले हैं।

चौटाला शासन में प्रदेश के जींद जिले में हुए कंडेला कांड में निहत्थे किसानों और मजदूरों को उस समय सरकारी गोलियों से भून दिया गया था। जनरल डायर की तरह कंडेला की दीवारों तक को छलनी कर दिया गया था। उसके बाद हरियाणा में ऐसा जलजला उठा कि चौटाला को सत्ता से ही नहीं हाथ थोना पड़ा। कंडेला कांड 2002 का है। सोशल मीडिया पर अक्सर सांसद दुष्यंत चौटाला से कंडेला कांड के लिए माफी मांगने की बात कही जाती थी। कहा जाता रहा है कि "तब दुष्यंत चौटाला 14 साल के रहे होंगे। माना छोटे थे। पर अब तो बड़े हो चुके हैं। देखते हैं इनमें भी अपनी गलतियों को मानने की हिम्मत है या नहीं। क्या दुष्यंत कभी मंच या सोशल मीडिया या साइबर चौपाल पर खुलकर मानेंगे की इनेलो की 2002 वाली सरकार किसान विरोधी थी। क्या दुष्यंत और उनके सजायाफ्ता पिता और दादा कभी माफी मांगेंगे? माफी नहीं मांगेंगे तो मतलब वो तत्कालीन इनेलो सरकार के कदम को सही मानते हैं। फिर तो सबको पता ही है कि सरकार बनकर कैसे किसानों के वारे न्यारे करेंगे।"

इनेलो में रहते दुष्यंत चौटाला ने कभी कंडेला कांड के लिए माफी नहीं मांगी, पर जींद में उपचुनाव को ध्यान रखते हुए वो कंडेला में जाकर कंडेला कांड के माफी मांगेंगे। जींद उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए जहां एक तरफ बीजेपी ने कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला को बीजेपी में शामिल किया है। 

दुष्यंत चौटाला का चुनाव मैनेजमेंट के नजरिए यह कदम सकारात्मक माना जाएगा। क्योंकि इनेलो से अलग पार्टी बनाने के बाद अब उन पर इनेलो द्वारा किए गए कार्यों को लेकर कोई दुविधा  नहीं रहेगी और इनेलो के गलत कामों को लेकर माफी मांगने में दुष्यंत की छवि इनेलो की तुलना में नरम भी बनेगी। एक तरह से दुष्यंत चौटाला का पूरा जोर इस बात पर रहेगा कि खुद को इनेलो से कैसे अलग और विशिष्ट दिखाया जाए। इसके लिए उन्हें चाहे इनेलो को पूरी तरह किसान विरोधी, शहर विरोधी, व्यापारी विरोधी पार्टी के रूप में क्यों न स्थापित करना पड़े।

सार्वजनिक मचों से जिस दादा द्वारा राजनीति सीखाए जाने की बात की जाती थी, आज उसी मंच से दादा को दोषी करार दिया जाएगा। इसीलिए कहा जाता है कि राजनीति में कोई सगा और स्थाई दुश्मन नहीं होता। परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। इनेलो और जेजेपी बदली हुई परिस्थितियों में एक-दूसरे के खिलाफ लगातार आक्रामक होती जाएंगी।


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