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नया हरियाणा

बुधवार, 24 जुलाई 2019

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ऑन लाइन मुशायरे में करेंगे 50 से भी अधिक शायर और शायरा शिरकत

आज के समय में ग़ज़ल साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा हो गई है।

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25 दिसंबर 2018



नया हरियाणा

25 दिसम्बर को अर्णव कलश एसोसिएशन के साहित्यिक मिशन कलम की सुगंध के सौजन्य से व्हाट्सएप ग्रुप में सांय 5 बजे से ऑन लाइन मुशायरा होना तय किया गया है. जिसमें राष्ट्रीय स्तर के ग़ज़लकार और ग़ज़लकारा अपनी उपस्थिति से महफ़िल को चार चाँद लगाने को तैयार हैं. कलम की सुगंध ने सभी ग़ज़लकारों को एक बैनर पर जोड़ अदभुत कार्य किया है। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. नज़र द्विवेदी ने बताया कि कलम की सुगंध का यह तृतीय ऑन लाइन राष्ट्रीय मुशायरा है। जिसका संचालन कल्पना अग्रवाल लखनऊ कर रही हैं और उनका सहयोग खुशबू हांसी हरियाणा तथा बिनोद हँसोड़ा  दरभंगा बिहार से कर रहे हैं, जबकि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हीरालाल मुम्बई से होंगे. कार्यक्रम के सूत्रधार संजय कौशिक विज्ञात ने बताया कि कार्यक्रम के संयोजक सुनीता मैत्रेई चंडीगढ़ से हैं, जबकि सह संयोजक धर्मराज देशराज सिहोर मध्यप्रदेश से हैं. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि दीपशिखा सागर छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश से रहेंगी. कार्यक्रम का आगाज़ माँ वीणापाणि की वंदना से डॉ. अनिता रानी भारद्वाज करेंगी.

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साहित्यकारों के इस तरह के आयोजनों से समाज की दशा और दिशा का ज्ञान होता रहता है। मुंशी प्रेमचंद ने साहित्यकारों के समाज में दिए जाने वाले योगदान को काफी महत्त्व दिया था। आज के समय में ग़ज़ल साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा हो गई है। ग़ज़ल कहना बहुत आसान है, पर उसके लालित्य, भाव, वजन, क़ाफ़िया, रदीफ़, व व्याकरण आदि को उसकी पृष्ठभूमि के आधार पर निभाना उतना ही कठिन है। दुष्यंत कुमार जी, नीरज जी, रमेश राज जी और विविध साहित्यकारों ने अपने-अपने तरीकों से ग़ज़ल को परिभाषित किया है। वर्तमान समय में दो तरह की ग़ज़ल कही जाती हैं, पहली हिंदी गजल और दूसरी उर्दू ग़ज़ल, मैं भाई हरि फ़ैज़ाबादी की ग़ज़लों को हिंदुस्तानी ग़ज़ल कहूँगा, क्योंकि उन्होने हिंदी के शब्दों केसाथ-साथ उर्दू के शब्दों से भी गुरेज़ नहीं किया है। इनकी भाषा आम-जन की भाषा है, हिंदुस्तानी भाषा है। इस अपनी हिंदुस्तानी हिंदी के लिए इन्होने एक शेर में कहा है-

जब से उर्दू से मोहब्बत हो गई
मेरी हिन्दी ख़ूबसूरत हो गई


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