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नया हरियाणा

बुधवार, 16 जनवरी 2019

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'राजा साहब' की हेकड़ी निकालने के मूड में मनोहर लाल

अहीरवाल की राजनीति ने मुख्यमंत्री पर दबाव का खेल शुरू कर दिया है।

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25 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

लोकसभा चुनाव के पहले हरियाणा भाजपा में अहीरवाल से बगावत के स्वर फूटने लगे हैं. दक्षिण हरियाणा के जिलों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की रैली-जनसभा में स्थानीय विधायकों और नेताओं की अनदेखी पर चार विधायकों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है. बताया जा रहा है कि यह चारों विधायक सांसद राव इंद्रजीत के खासमखास हैं. इन चारों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर आरोप लगाए हैं. पटोदी से विधायक विमला चौधरी, नारनोल से ओम प्रकाश, कोसली से विक्रम सिंह ठेकेदार और बावल से विधायक जन स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनवारी लाल ने सीएम पर सीधा हमला बोला है. इन चारों ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री और सरकार की उपेक्षा से नाराज हैं. वह भाजपा आलाकमान से इसकी शिकायत करेंगे. प्रेस वार्ता में विधायक विमला चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पटौदी रेवाड़ी और नांगल चौधरी के दौरे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर गुटबाजी को बढ़ावा दिया है. उनके हल्के में रैली और जनसभा होने के बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से स्थानीय विधायकों को निमंत्रण न देकर उनका अपमान किया गया है. विधायकों का आरोप है कि सीएम के शिलान्यास कार्यक्रम में विधायकों की उपेक्षा की गई और शिलान्यास पर उनका नाम भी नहीं लिखा गया. साथ ही स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत का नाम भी नहीं लिखने से विधायक काफी आक्रोशित दिखे.

इन चारों विधायकों ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार भाजपा को कमजोर कमजोर करेगा. इस राजनीतिक नुकसान के लिए सीएम ही सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे. विमला चौधरी ने कहा इस तरह की राजनीति के कारण पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के कार्यकाल से ही कांग्रेस का जनाधार खत्म हुआ और उसी चीज को मनोहर लाल दोहरा रहे हैं. चारों विधायकों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर खुलकर आरोप लगाते हुए कहा कि फर्जी डिग्री मामले में फंसे नरबीर सिंह को मुख्यमंत्री बचाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं, जबकि भाजपा अनुशासन की पार्टी है और मुख्यमंत्री निजी मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं. मुख्यमंत्री को इस मामले में संज्ञान लेते हुए उन्हें मंत्री पद से हटा देना चाहिए था.

प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने चारों विधायकों से बात करने का आश्वासन दिया है और उनकी समस्याओं का समाधान करने को कहा है. वहीं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रवक्ता सत्य प्रकाश जरावता ने कहा कि लोकरा गांव में निजी कार्यक्रम था. इसमें मुख्यमंत्री के साथ जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है. इसमें विमला चौधरी क्यों नहीं पहुंची. इसका जवाब वही दे सकती हैं. कार्यक्रम पंडाल के अंदर और बाहर मुख्यमंत्री के साथ बिमला चौधरी के भी होल्डिंग लगवाए गए थे उनके आरोप निराधार हैं.

सांसद राव इंद्रजीत और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच खींचतान कोई नई खींचतान नहीं है, बल्कि अलग-अलग अवसरों पर इस खींचतान के स्वर सार्वजनिक मंचों से भी सुनाई देते रहे हैं। मनोहर लाल की कार्यशैली से साफ पता चलता है कि वो राव इंद्रजीत की कार्यशैली को समझकर ही अपनी रणनीति को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने राव इंद्रजीत को कमजोर करने के लिए एक तरफ राव नरबीर सिंह का कद बढ़ा दिया तो दूसरी तरफ विपुल गोयल को शक्ति संपन्न कर दिया। जिसे इन दो मंत्रियों ने भली भांति समझते हुए जमकर भुनाया भी है। राव इंद्रजीत के साथ समस्या हो रही है कि उनके समर्थन में अहीरवाल बेल्ट से अब केवल चार विधायक ही साथ रह गए हैं।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि राव इंद्रजीत हरियाणा नगर निगम में मिली जीत के बीच अपने दबाव को मुखर रूप देना चाहते हैं। दूसरी तरफ उन्हें अपनी बेटी के लिए सोहना से टिकट की भी दरकार है। ऐसे में उन्हें सदन में विपक्ष घेरे उससे पहले ही खुद पहला दांव खेल दिया है। सरकार सदन में जीत की खुशी मनाती उससे पहले राव ने विधायकों के कंधे पर रखकर बंदूक चला दी है। मुख्यमंत्री के तेवरों से साफ लग रहा है कि वो अब राव इंद्रजीत के सामने ज्यादा झूकने वाले नहीं है। राजा साहब की हेकड़ी निकालने के मूड में मुख्यमंत्री नजर आ रहे हैं।


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