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नया हरियाणा

सोमवार , 22 जुलाई 2019

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खलनायक जितना सफल होता है, फिल्म भी उतनी ही ज्यादा सफल होती है : अल्फ्रेड हिचकॉक

हॉलीवुड हॉरर फिल्मों के बादशाह अल्फ्रेड हिचकॉक.

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24 दिसंबर 2018



नया हरियाणा

अपनी फिल्मों में जबर्दस्त सस्पेंस और थ्रिल से दर्शकों में डर पैदा करने वाले मशहूर हॉलीवुड फिल्म निर्देशक अल्फ्रेड हिचकॉक का मानना था- खलनायक जितना सफल होता है, फिल्म भी उतनी ही ज्यादा सफल होती है। इनकी तकरीबन सभी फिल्मों में विलेन का रोल पावरफुल था।

अल्फ्रेड हिचकॉक का जन्म 13 अगस्त 1899 को लंदन में हुआ था और 1980 में इनका निधन हुआ था। 1920 में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले इन्होंने कुछ समय के लिए इंजीनियरिंग का भी काम किया। इनकी पहली फिल्म thrillers (1925) थी। 1929 में इन्होंने फिल्म Blackmail बनाई, जिसे ब्रिटेन की पहली टॉकी फिल्म (मूक चलचित्र) कहा जाता है।

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फिल्म इतिहास में अल्फ्रेड हिचकॉक एकमात्र ऐसे निर्देशक रहे हैं जो बिना भूत-पिशाच, काल्पनिक कथानकों के, हमेशा रहस्य, हत्या, अपराध और मानव मन के भय से जुड़ी फिल्में बनाते रहे। दिलचस्प कथानकों, बेहतरीन साउंडट्रैक, विनम्र संवाद शैली से सजी उनकी कई कामयााब फिल्मों से दो बेहतरीन फिल्में साइको(psycho-1960) और द बडर्स (the birds-1963) भयानक रस की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

हिचकॉक की तीन फिल्मों रिबेका (rebecca-1940), स्ट्रेंन्जर्स ऑन अ ट्रेन(1951), डायल एम फॉर मर्डर(1954) में भय-भाव, रोमांच और चित्ताकर्ष दृश्यों, संवादों से सुसज्जित, भय के विचित्र विभावों का प्रयोग है। इन तीन पिल्मों एक बात सर्वनिष्ठ है, वह है कृत्रिम भय।

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हिचकॉक की फिल्मों का बॉलीवुड पर असर


- Vertigo और To Catch a Thief की रिमेक - ज्वैल थीफ (विजय आनंद निर्देशित)
- Rebecca और Pyscho पर आधारित - कोहरा (बिस्वजीत और वहीदा रहमान अभिनीत)
- Strangers In The Train की रिमेक- सोच (सुशेन भटनागर निर्देशित)
- Dial M For Murder की कॉपी - हमराज (अब्बास-मस्तान निर्देशित)
- Rebecca की रिमेक - अनामिका (अनंत महादेवन निर्देशित)

कृत्रिम भय तब तक भय रहता है, जब तक उसकी सत्यता निर्धारित न हो जाए। कानून और व्यवस्था से उपजा डर, हिचकॉक की फिल्मों में बार-बार एक विशिष्ट कारण के रूप में उभर कर सामने आता है। कहा जाता है कि अल्फ्रेड के पिता ने अपने शरारती बेटे को सबक सिखाने के लिए अपनी पुलिस दोस्त के साथ मिलकर अपने बेटे को पांच मिनट के लिए हवालात में बंद करवा दिया था। बाल मन पर इसका दुरगामी प्रभाव पड़ा। कहा जाता है कि इस घटना का असर हिचकॉक की जिंदगी पड़ा और फिल्मों में भी यह प्रभाव साफ दिखता है। जिंदगी भर उन्हें जेल की दहशत डराती रही, जिसके कारण वह बार-बार ऐसी फिल्में बनाते रहे।

उदाहरण के लिए- शैडो ऑफ डाउट, आई कन्फेस, रिउर विंडो, द रांग मैन, मार्नी

भारतीय काव्यशास्त्र में रस सिद्धांत में भयानक रस का स्थायी भाव भय है। भरतमुनि के अनुसार भयानक रस के तीन प्रकार बताए हैं- कृत्रिम, अपराधजन्य और त्रासज। अल्फ्रेड हिचकॉक की अधिकतर फिल्मों में कृत्रिम और अपराधजन्य भयानक रस की फिल्में बनाते रहे। भूत-प्रेत, दानवों या किसी अन्य त्रास से होने वाली फिल्में त्रासज हैं, जो बहुतायत में देखने को मिलती है। 

 हॉलीवुड के जानेमाने निर्देशक और फिल्म निर्माता थे जिन्होंने रोमांचक फिल्मों में बहुत से नए प्रयोग किये। इन्होंने ब्रिटिश फिल्मों में अपना कैरियर स्थापित करके हॉलीवुड में प्रवेश किया और मूक फिल्मों से लेकर रंगीन फिल्मों तक करीब ५० फिल्मों का निर्देशन किया। अपने जीवनकाल में ये विश्व के सबसे जानेमाने निर्देशक थे और इनकी फिल्में आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।

पुरस्कार    

इर्विंग जी थालबर्ग स्मारक पुरस्कार 
1968 जीवनकार्य सम्पादन
सर्वश्रेष्ठ टेलिविजन कार्यक्रम
1958 एल्फ़्रेड हिचकॉक प्रेसेन्ट्स (एल्फ़्रेड हिचकॉक प्रस्तुति) 
सीसिल डेमील पुरस्कार
1972 जीवनकार्य सम्पादन
न्यू यॉर्क फिल्म समालोचक वृत्त का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार
1938 द लेडी वैनिशेज़ 
नैशनल बोर्ड ऑफ रिव्यु का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार
1969 टोपाज़ 
एएफआई जीवन उपलब्धि पुरस्कार
1979 जीवनकार्य सम्पादन


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