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नया हरियाणा

बुधवार, 26 जून 2019

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जानिए जींद उपचुनाव में मनोहर लाल किस पर लगाएंगे दांव

जींद उपचुनाव मनोहर लाल की 4 साल में सबसे बड़ी परीक्षा कही जा सकती है।

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24 दिसंबर 2018



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आईएनएलडी विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा के निधन से खाली हुई जींद विधानसभा सीट पर दिसंबर में उपचुनाव होना है। जींद विधानसभा सीट पर बीजेपी कभी अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। जब-जब बीजेपी ने जींद विधानसभा सीट पर अकेले चुनाव लड़ा, वह मुख्य मुकाबले से बाहर रही। 2014 में बीजेपी के उम्मीदवार पूर्व सांसद सुरेंद्र बरवाला आईएनएलडी के डॉ. हरिचंद मिढ़ा से लगभग 2200 मतों के अंतर से पराजित हुए थे। इस एक चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी जींद विधानसभा सीट पर कभी मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाई। 

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प्रदेश में 4 साल से बीजेपी की सरकार है। बीजेपी की जींद विधानसभा सीट पर ज्यादा मजबूत जनाधार कभी नहीं रहा है। इस सीट पर आईएनएलडी और कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। 2014 को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी कभी जींद विधानसभा सीट के चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाई। इस लिहाज से जींद का उपचुनाव बीजेपी और सीएम मनोहर लाल के लिए उनके 4 साल के शासनकाल में सबसे कड़ी राजनीतिक चुनौती साबित होगा। इस उपचुनाव में बीजेपी हारी तो असर अगले साल होनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। 

पांच नगर निगम चुनावों में मनोहर लाल ने अपनी रणनीति से साफ कर दिया है कि जो विपक्ष उन्हें हल्के में ले रहा था, उन्हें मनोहर लाल ने पांचों खाने चित्त कर दिया था। नगर निगम चुनाव के बाद मनोहर लाल की असली परीक्षा जींद उपचुनाव में होने वाली है। एक तरफ जहां मनोहर लाल की सरकार पर जाट विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जींद सीट को जाट बहुल सीट माना जाता है। ऐसे में मनोहर लाल पर इस सीट को लेकर दोहरा दबाव साफ रहेगा। एक तरफ कभी न जीतने वाली सीट का दबाव होगा तो दूसरी तरफ जाट वोटरों को कैसे साधा जाए इसकी रणनीति बनानी होगी।

बीजेपी के लिए जींद के संभावित उपचुनाव में अपने लिए उम्मीदवार की तलाश भी कतई आसान नहीं होगी। उसकी टिकट के दावेदारों की सूची काफी लंबी है। इसमें बीजेपी के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, पूर्व सांसद और पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे सुरेंद्र बरवाला, सीएम के निजी सचिव राजेश गोयल, स्वामी राघवानंद,आदि के नाम शामिल हैं। 

जवाहर सैनी पर लगा था पैसे मांगने का आरोप

भाजपा के प्रदेश सचिव और जींद नगर परिषद चेयरपर्सन के पति जवाहर सैनी पर नगर पालिका में काम करवाने के बदले ठेकेदारों से पैसे मांगने के आरोप लगे थे। एक ठेकेदार ने ऐसे ही आरोपों का एक ऑडियो भी वायरल किया था। इस ऑडियो में जवाहर सैनी ठेकेदार से कमीशन की मांग कर रहे थे। दरअसल जींद में सफाई कार्य के लिए ठेका दिया जाना था। जिसके लिए टेंडर लगाया जाना था। इसी ठेके के लिए एक ठेकेदार से जवाहर सैनी की बातचीत वायरल हुई थी। हालांकि ठेकेदार खुद सामने नहीं आया था परन्तु जवाहर सैनी का यह ऑडियो वायरल होने के बाद विपक्ष के साथ-साथ उसकी ही पार्टी के लोगों ने उसे घेरना शुरू कर दिया था। ऐसे में ईमानदार छवि को आगे लेकर चलने वाले मुख्यमंत्री जवाहर सैनी पर दांव नहीं लगाएंगे।

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कृष्ण मिड्ढा पर लगा सकते हैं दांव

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पूर्व दिवंगत विधायक हरिचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को बीजेपी में शामिल करवाकर इनेलो को कमजोर कर दिया था। इनेलो को इस झटके से उभरने के लिए पूर्व विधायक मांगेराम गुप्ता से उस समय इनेलो में रहे सांसद दुष्यंत चौटाला ने मुलाकात भी की थी। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि कृष्ण मिड्ढा को बीजेपी बड़ी जिम्मेदारी दे कर उन्हें चुनाव न लड़ने के लिए मना सकती है, क्योंकि बीजेपी इस चुनाव में जाट प्रत्याशी को चुनाव में उतारना चाहती है।

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सुरेंद्र बरवाला पर लग सकती है फाइनल प्रत्याशी की मोहर

2014 के विधानसभा चुनाव में भी सुरेंद्र बरवाला ने इनेलो प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी थी। वो पिछला चुनाव मात्र 2200 वोटों से हारे थे। उसके बाद लगातार वो जींद में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं और बीजेपी भी किसी जाट प्रत्याशी पर दांव लगाने का मन बना चुकी है। ऐसे में बीजेपी की सरकार का सत्ता में होना, पांच नगर निगम चुनावों में जीत का परचम लहराना और जाट प्रत्याशी के बीजेपी वर्करों के हौंसले सुरेंद्र बरवाला की जीत के समीकरण बनते हुए नजर आ रहे हैं। खैर देखना ये होगा कि जींद की जनता किस पार्टी को जीतवाती है।

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