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चौधरी चरण सिंह थे इंटरकास्ट मैरिज के समर्थक

आज किसान दिवस है। किसान नेता चरण सिंह के जन्मदिन को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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23 दिसंबर 2017

अभिषेक लाकरा

आज किसान दिवस है। किसान नेता चरण सिंह के जन्मदिन को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिस क्षेत्र से मैं आता हूं वो क्षेत्र पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की कर्मभूमि कहा जाता है।  दिल्ली से लगता बागपत चरण सिंह का लोकसभा क्षेत्र रहा है और छप्परौली उनका विधानसभा क्षेत्र, यहीं से वे चुनाव लड़ते थे। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो यहां पर कुछ भी ऐसा नहीं है जो चरणसिंह ने दिया हो। जितने भी स्कूल , कॉलेज है वे सब यहां के लोगों ने खुद बनाये है, जो जोहड़, तालाब, नहर, रजवाहे हैै वे भी चरण सिंह से पहले ही बने हुए है। सड़कें तो खैर बनती रहती है, वैसे पूरे एनसीआर में सबसे खराब सड़कें बागपत की ही है। फिर भी इस इलाके में या कहे कि पूरी यूपी में चरण सिंह एक बड़ी शख्सियत है।

चरण सिंह ने कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की। खुद को गांधीवादी कहते थे बाद में समाजवादी हो गए। अंग्रेजी जमाने मे कुछ समय क्रांतिकारी भी रहे। जाति और वर्गभेद मिटाने की बात करते थे पर कम्युनिस्ट नहीं थे। कोऑपरेटिव फार्मिंग के विरोधी थे। किसानों के मालिकाना हक की बात करते थे। कुछ विचारक उनको बड़े जमींदारों का नेता बताते थे पर जिस तरीके से बिना कोई लूप हॉल छोड़े जमींदारी उन्मूलन किया उसने हर गरीब किसान के दिल दिमाग में चरण सिंह को भगवान बना दिया। यूपी जैसे स्टेट में चकबंदी कर दी। जो किसान साहूकारों के नीचे दबा पड़ा था, बड़े जमींदारों के लिए खेती करता था , वो एक झटके में मालिक बन गया। एक नारा था, जमीन किसकी? जो बो रहा उसकी! 

इससे किसान का नेचर भी बदल गया और धीरे धीरे खेती का भी। साहूकारी से निकला एक बड़ा किसान वर्ग धीरे धीरे खुद वही बन गया जिससे वो निकला था। जहां खेती बढिया थी वहां किसानों के बीच एक बड़ा बर्जुआ वर्ग भी पैदा हुआ। मालिकाना मिलते ही उसका स्वभाव भी बदल गया। किस हद तक बदला और क्या ठोस कारण था, ये अध्यन का विषय है। यूपी में बड़ी बड़ी मंडिया बनवाई। खासकर ईस्ट यूपी में। 

चरण सिंह कांग्रेस में रहे पर किसी से बनी नहीं। फिर खुद की पार्टी बनाई तो भी वे स्थिर नहीं रहे। उन्होंने पिछड़े वर्ग को भी उभार दिया। असल मे चरण सिंह ही पिछड़े वर्ग की राजनीति की शुरुआत करने वाले है। उन्होंने पिछड़े वर्ग को उभारा भी और इनके नेताओं को भी। बिना किसी लाग लपेट या लालच के मुलायम सिंह को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप गए। गांव के गरीब यादव, त्यागी, कुर्मी, जाट ,गुज्जर किसान बिरादरियों को बता गए, खेत के साथ साथ राजनीति पर भी ध्यान दो। इसका असर इतना था कि बड़े बुड्ढे पहले अखबारों की बात को सच नहीं मानते थे। कहते थे कि ये सब लालाओं के अखबार है, टाटा बिड़ला के, ये क्यों किसान के पक्ष में बात लिखेंगे। लिखेंगे तो ये खुद खत्म हो जाएंगे। 

चरण सिंह पॉलटिक्स का असर ये था कि लोगों में बड़े कारपोरेट, बनियों के खिलाफ़ एक नज़रिया बन गया था। इसका फायदा कम्युनिस्टों को भी मिला। चरण सिंह मुजफ्फरनगर जो जाट हार्टलैंड था, वहां से अपने राजीनीतिक जीवन की पहली और एकमात्र हार मिली। कामरेड ने उन्हें यहां से हरा दिया। बड़ौत जैसी सीट से माकपा का विधायक रहा। क्योंकि चरण सिंह की बनिया वर्ग विरोधी जाति विरोधी बातों ने कम्युनिस्टों को भी एक आधार दे दिया था। पूंजीपति विरोधी राजनीति की एक बात पॉल आर ब्रास की किताब में पढ़ी थी। वे लिखते है जिस दिन चरण सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर देश का बज़ट पेश किया था उस दिन बम्बई में विरोध में स्टॉक मार्केट बंद कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस में फ्रंट पेज पर हेडलाइन थी।

उनके बारें में कईं मिथ भी है। एक तो लोग उनको गांव का अनपढ़ जाट बताते है। हालांकि वे काफी पढ़े लिखे थे। एमएससी साइंस, एलएलबी साथ मे कईं किताबे भी लिखी। दुनिया के कई विश्विद्यालयों में रिसर्च में इस्तेमाल होती है। एक बात ये है कि वे जाट नेता थे। पर वे जिंदगी में कभी जाट महासभा जैसे संगठन तक के कार्यक्रम में नहीं गए। जाट स्कूल में वाइस प्रिंसिपल बनने से इसलिए मना कर दिया था कि स्कूल के नाम मे जातीय शब्द है। जब मौका मिला तो जाट कॉलेज को जनता कॉलेज बना दिया। मुजफ्फरनगर के जाट कॉलेज का नाम भी बदलवाया। भूमि सुधार में जब दलितों को जमीन दी तो उनके खिलाफ दिल्ली में जाटों ने पंचायत भी की पर उन्होंने फैसला नहीं बदला। इंटर कास्ट मैरिज के समर्थक थे। नेहरू से गुजारिश की थी, सरकारी नौकरी के लिए इंटरकास्ट मैरिज अनिवार्य हो। 

खैर ये तो वे बात है जो मुझे पता है। चरण सिंह भले ही मेरे हीरो न हो, पर किसान आज भी उन्हें अपना हीरो मानते है। चरण सिंह की जिंदगी में कईं विरोधाभास भी है। कांग्रेसी भी रहे, और समाजवादी भी, कम्युनिस्टों से भी गठबंधन किया और जनसंघियों से भी। इसलिए सबके अपने अपने विश्लेषण है। चरण सिंह के जन्मदिन पर इतना ही।


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