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नया हरियाणा

रविवार, 19 अगस्त 2018

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चौधरी चरण सिंह : किसानों की दशा सुधरेगी तो देश की दशा सुधरेगी

सवाल यही है कि किसानों की दशा कैसे सुधरेगी? वह कौन-सी नीति होगी?

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23 दिसंबर 2017

नया हरियाणा

निजी जीवन
जन्म: 23 दिसम्बर, 1902, नूरपुर, यूनाइटेड प्रोविंस, ब्रिटिश इंडिया. निधन: 29 मई, 1987 कार्य: राजनेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री. चरण सिंह का विवाह सन 1929 में गायत्री देवी के साथ हुआ। इन दोनों के पांच संताने हुईं। उनके पुत्र अजित सिंह अपनी पार्टी ‘राष्ट्रिय लोक दल’ के अध्यक्ष हैं।
चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को यूनाइटेड प्रोविंस (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के नूरपुर गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। इनके परिवार का सम्बन्ध बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह से था जिन्होंने 1887 की क्रान्ति में विशेष योगदान दिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने नाहर सिंह को दिल्ली के चाँदनी चौक में फ़ाँसी पर चढ़ा दिया था। अंग्रेज़ों के अत्याचार से बचने के लिए नाहर सिंह के समर्थक और चौधरी चरण सिंह के दादा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में निष्क्रमण कर गए। चौधरी चरण सिंह को आरम्भ से ही शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हुआ जिसके कारण उनका शिक्षा के प्रति अतिरिक्त रुझान रहा। उनकी प्राथमिक शिक्षा नूरपुर में ही हुई और उसके बाद मैट्रिकुलेशन के लिए उनका दाखिला मेरठ के सरकारी हाई स्कूल में करा दिया गया। सन 1923 में में चरण सिंह ने विज्ञान विषय में स्नातक किया और दो वर्ष बाद सन 1925 में उन्होंने ने कला वर्ग में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से क़ानून की पढ़ाई की और फिर विधि की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सन 1928 में गाज़ियाबाद में वक़ालत आरम्भ कर दिया। वकालत के दौरान वे अपनी ईमानदारी, साफगोई और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। चौधरी चरण सिंह उन्हीं मुकदमों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष उन्हें न्यायपूर्ण प्रतीत होता था।

लेखन
एक राजनेता के साथ चौधरी चरण सिंह एक कुशल लेखक भी थे और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छा अधिकार रखते थे। उन्होंने ‘अबॉलिशन ऑफ़ ज़मींदारी’, ‘लिजेण्ड प्रोपराइटरशिप’ और ‘इंडियास पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस’ नामक पुस्तकों का लेखन भी किया।
चौ. चरण सिंह के नाम पर जारी डाक टिकट  संग्रहकर्ता शैलेंद्र सर्राफ के पास सुरक्षित है। उनके प्रयासों से ही जय जवान जय किसान भी टिकट जारी हुआ था, जिसमें किसान खेत में फसल काटता हुआ नजर आता था।


चौ. चरण सिंह किसानों के मसीहा नाम से जाने जाते हैं. उन्होंने कहा था कि जब तक किसानों की दशा नहीं सुधरेगी, तब तक देश की दशा नहीं सुधरेगी. लेकिन सवाल वही है कि वह कौन-सी नीति है, जिसके माध्यम से सभी किसानों की दशा सुधर जाए? या यह सवाल केवल वोट लेने भर के लिए इस्तेमाल होने वाला वाक्य भर है?
उनके बारे में लिखा जाता है कि किसानों की समस्याओं को वो जितना समझते थे, उतना कम ही नेता समझते थे. वो बार-बार कहा करते थे कि जब तक किसानों की आय नहीं बढ़ेगी, तब तक कारखानों में उत्पादित माल के खरीदार नहीं बढ़ेंगे. खरीदार नहीं बढ़ेंगे तो कारखाने मुनाफे में कैसे रहेंगे?
निजी जीवन
जन्म: 23 दिसम्बर, 1902, नूरपुर, यूनाइटेड प्रोविंस, ब्रिटिश इंडिया. निधन: 29 मई, 1987 कार्य: राजनेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री. चरण सिंह का विवाह सन 1929 में गायत्री देवी के साथ हुआ। इन दोनों के पांच संताने हुईं। उनके पुत्र अजित सिंह अपनी पार्टी ‘राष्ट्रिय लोक दल’ के अध्यक्ष हैं।
चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को यूनाइटेड प्रोविंस (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के नूरपुर गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। इनके परिवार का सम्बन्ध बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह से था जिन्होंने 1887 की क्रान्ति में विशेष योगदान दिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने नाहर सिंह को दिल्ली के चाँदनी चौक में फ़ाँसी पर चढ़ा दिया था। अंग्रेज़ों के अत्याचार से बचने के लिए नाहर सिंह के समर्थक और चौधरी चरण सिंह के दादा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में निष्क्रमण कर गए। चौधरी चरण सिंह को आरम्भ से ही शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हुआ जिसके कारण उनका शिक्षा के प्रति अतिरिक्त रुझान रहा। उनकी प्राथमिक शिक्षा नूरपुर में ही हुई और उसके बाद मैट्रिकुलेशन के लिए उनका दाखिला मेरठ के सरकारी हाई स्कूल में करा दिया गया। सन 1923 में में चरण सिंह ने विज्ञान विषय में स्नातक किया और दो वर्ष बाद सन 1925 में उन्होंने ने कला वर्ग में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से क़ानून की पढ़ाई की और फिर विधि की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सन 1928 में गाज़ियाबाद में वक़ालत आरम्भ कर दिया। वकालत के दौरान वे अपनी ईमानदारी, साफगोई और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। चौधरी चरण सिंह उन्हीं मुकदमों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष उन्हें न्यायपूर्ण प्रतीत होता था।

लेखन
एक राजनेता के साथ चौधरी चरण सिंह एक कुशल लेखक भी थे और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छा अधिकार रखते थे। उन्होंने ‘अबॉलिशन ऑफ़ ज़मींदारी’, ‘लिजेण्ड प्रोपराइटरशिप’ और ‘इंडियास पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस’ नामक पुस्तकों का लेखन भी किया।
चौ. चरण सिंह के नाम पर जारी डाक टिकट  संग्रहकर्ता शैलेंद्र सर्राफ के पास सुरक्षित है। उनके प्रयासों से ही जय जवान जय किसान भी टिकट जारी हुआ था, जिसमें किसान खेत में फसल काटता हुआ नजर आता था।


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