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नया हरियाणा

बुधवार, 16 जनवरी 2019

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नगर निगम चुनावों के परिणाम : इनेलो को मिली जाटों की 'संजीवनी'

अभय सिंह चौटाला ने अलग पार्टी गठित करने वाले सांसद दुष्यंत चौटाला को भी जवाब दिया है

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20 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा में पूर्व सीएम हुड्डा को ही जाटों का नेता माना जाता था, लेकिन नगर निगम चुनाव में जाटों ने हुड्डा को नकार कर इनेलो का साथ दिया। इस चुनाव में जाट इनेलो की तरफ जाता दिखा। हाल ही में दो फाड़ हुई इनेलो को नगर निगम मेयर चुनाव में बेहतर मत मिलने से संजीवनी मिल गई है। इनेलो प्रत्याशी संचित नांदल ने भाजपा के प्रत्याशी मनमोहन गोयल के 65822, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सीताराम सचदेवा के 51046 के बाद 32775 वोट हासिल किए हैं। शहर में कभी इनेलो 5000 से ज्यादा विधानसभा चुनाव में वोट हासिल नहीं कर पाती थी। वहां 30,000 से अधिक वोट हासिल करना भविष्य के अच्छे संकेत हैं। उधर अभय सिंह चौटाला ने अलग पार्टी गठित करने वाले सांसद दुष्यंत चौटाला को भी जवाब दिया है, क्योंकि दुष्यंत खुद को असली बताकर युवाओं में अपनी पैठ बताते रहे हैं। (दैनिक जागरण की रिपोर्ट) क्या हरियाणा में बीजेपी की जाट विरोधी छवि अभय सिंह चौटाला के प्रति जाटों के इतने बड़े झुकाव का कारण बन रही है? 

जहां मेयर चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने इनेलो और कांग्रेस को पूरी तरह से चुनावी अखाड़े में पटखनी दी, वहीं हार के बावजूद इनेलो को उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है. पूर्व सीपीएस माजरा ने बताया कि सीएम सिटी करनाल में इनेलो के शहरी वोटों में 43,000 की बढ़ोतरी हुई है जो कि 2014 के विधानसभा चुनाव में 18000 थी. इस बार पानीपत नगर निगम के चुनाव में इनेलो के वोट बैंक में 3 गुना बढ़ोतरी हुई है. 2014 में यहां इनेलो उम्मीदवार को 2630 वोट मिले थे जबकि इस बार 7300 से अधिक वोट हासिल हुए हैं. हिसार में हालांकि वोट 2536 रह गए, लेकिन यहां दुष्यंत चौटाला केे अलग पार्टी बनाने का नुकसान इनेलो को हुआ है. विधानसभा चुनाव में इनेलो को हिसार से 3329 वोट हासिल हुए थे और यमुनानगर में बसपा के संदीप गोयल को 32,000 से अधिक वोट मिले हैं.
रामपाल माजरा का कहना है कि शहरों में इनेलो का ग्राफ बढ़ा है. आने वाले चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा कृषि क्षेत्र और बेरोजगार युवाओं को रोजगार की कमी का होगा. चुनाव में मिली हार पर इनेलो जल्द ही मंथन करके आगे की रणनीति बनाने वाली है. भाजपा को शहरी और इनेलो को गांव की पार्टी माना जाता रहा है. इनेलो-बसपा गठबंधन का यह प्रदेश में पहला चुनाव था, जिसमें अभय सिंह चौटाला ने पहली बार शहरों में पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने का हौसला दिखाया. मगर उम्मीद के मुताबिक जीत हासिल नहीं हुई. इनेलो के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीपीएस रामपाल माजरा का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की उम्मीदवार रेनू बाला गुप्ता के खिलाफ इनेलो ने करनाल में आशा वाधवा को समर्थन दे रखा था. जबकि जाटलैंड रोहतक में संचित नांदल आखिर तक मैदान में डटे रहे. पानीपत में प्रियंका और हिसार में अमित सैनी को पार्टी ने चुनाव लड़ाया. यमुनानगर की सीट बसपा के खाते में गई. पिछले विधानसभा चुनाव में रोहतक में इनेलो प्रत्याशी को करीब 4000 वोट मिले थे लेकिन हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में इनेलो को अब 33 हजार के आसपास वोट मिले हैं. इससे साफ कहा जा सकता है कि इनेलो के दो फाड़ होने के बाद भी नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला शहरों में अपनी पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे हैं.


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