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ब्रेकअप : जिंदगी का एक पीड़ात्मक सच ये भी है

जिसने भी प्यार किया है, उसकी जिंदगी में ब्रेकअप वाला क्षण लगभग जरूर आता है. कितना अकेलापन और पीड़ादायक होता है वह क्षण.

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23 दिसंबर 2017

डॉ. अजित सिंह

भूमिका:

ब्रेकअप पर 'ब्रेकअप सांग' गाने वाले विरले होते हैं, शायद फिल्म फंतासी की एक दुनिया है. इसलिए फिल्म में ब्रेकअप सांग गाने की कल्पना की जा सकती है। जिनका हाल ही में ब्रेकअप हुआ है, उन्हें ऐसे गाने एक सम्बल दे सकते हैं. इसकी संभावना थोड़ी कम नजर आती है. क्योंकि ब्रेकअप के बाद ब्रेकअप का जश्न मनाना थोड़ा मुश्किल काम है। दर्शन की भाषा में कहूँ तो जुड़ना और टूटना शाश्वत प्रक्रिया है,  विज्ञानवादी मस्तिष्क इसे अणुवाद के माध्यम से समझ सकते हैं। ब्रेकअप के प्रभाव विशुद्ध रूप से मनोवैज्ञानिक होते हैं. कभी आत्मदोष तो कभी परनिंदा के मध्य फंसा हुआ वजूद अलग-अलग किस्म से रिश्तों को परिभाषित करता है। कभी मैंने ब्रेकअप पर कुछ फुटकर नोट्स लिखे थे उन्हें आज आपके साथ शेयर कर रहा हूँ. इस उम्मीद से कि ये कभी जरूर पढ़ने लायक समझें जाएंगे।
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' ब्रेकअप महज दो शब्दों का योग नही था, इसकी ध्वनि में एक विचित्र-सी खीझ थी. खुद के प्रति एक अनजाना गुस्सा इसमें शामिल था, खुद के बारे में हाउ स्टुपिड जैसे कथन घनघोर हो गरजते थे। शब्दकोश में अकेला शब्द था ब्रेकअप। संज्ञा से विशेषण बना था, मगर व्याकरण के लिहाज से इसमें था वाक्य दोष. इसका वाक्य में प्रयोग छोड़ जाता था ऐसी त्रुटि की पूर्ण विराम लगाने के लिए उठी कलम उठी ही रह जाती, नही मिलती थी उसको रखने की जगह। ब्रेकअप तरल था पानी की तरह ब्रेकअप ठोस था पारे की तरह।
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ब्रेकअप के बाद की सुबह रात की प्रतिलिपि मांगकर लाती थी उधार. इसलिए सूरज निकलता था कुछ देर की विलम्ब से। ये अगला दिन गायब हो जाना चाहता था विश्व के कैलेंडर से. यहां तक मंजन करते समय हम चाहते हैं कि आज पेस्ट ब्रश से न करके अंगुली से किया जाए, क्योंकि उस दिन चुभती थी ब्रश की ध्वनि भी। ब्रेकअप से अगला दिन दरअसल रात की तरह ही था. बस फर्क इतना लगता कि हम आँख बंद करके अंधेरे में अँधेरे को नही देख सकते थे।
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ब्रेकअप एक थकन भरी सांत्वना थी. जो बताती है कि मनुष्य के तौर पर विकल्पहीनता सबके हिस्से में आती है एकदिन। उम्मीद दुबकी रहती मन के एक कोने में कि शायद एकदिन फिर से सब ठीक हो जाए। 'शायद' बोलचाल के शब्द के बाद सबसे गहरा अर्थ ब्रेकअप के बाद ही समझ आता है। जैन मुनियों ने यही से लिया होगा अपने दर्शन का 'स्यादवाद'।
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ब्रेकअप की घोषणा प्रायः एकतरफा होती दोनों चाहकर भी एकस्वर में नही कर पाते घोषणा ब्रेकअप की। इसमें एक वक्ता होता और एक श्रोता. यह दुनिया की सबसे विकट जनसभा होती जिसमें नही जरूरत पड़ती किसी लाउडस्पीकर की। ब्रेकअप अंतिम उपाय नही होता, हां! बस इसे चुन लिया जाता अंतिम उपाय से कुछ देर पहले।
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ब्रेकअप के बाद ईश्वर देख पाता मनुष्य के एकान्त को, भीड़ में उसको चिन्हित करना होता ईश्वर के लिए बेहद आसान. ईश्वर के अलावा कोई एक दोस्त भी देख सकता था लगभग समान रूप से। ब्रेकअप दोस्त को बना देता एक पल में ईश्वर, जिसको गले लगाकर रोया जा सकता बेसबब, मगर ब्रेकअप नही मिलने देता था ऐसे ईश्वर बने दोस्त से कभी भी।


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