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नया हरियाणा

रविवार, 24 मार्च 2019

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महम कांड में अभय सिंह चौटाला समेत 6 को पेश होना पड़ेगा कोर्ट में

महम का जिक्र आते ही ऐतिहासिक चबूतरे और नब्बे के उपचुनाव में हुए खून-खराबे की याद ताजा होती है।

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16 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

महम का जिक्र आते ही ऐतिहासिक चबूतरे और नब्बे के उपचुनाव में हुए खून-खराबे की याद ताजा होती है। इन्हीं दो वजहों से महम विधानसभा सीट पर सभी की नजरें बनी रहती हैं। चबूतरे के कारण इसलिए क्योंकि इस पर कई सामाजिक और राजनीतिक फैसले होते हैं, जो चुनाव की दशा और दिशा तय करते हैं। नब्बे का कांड इसलिए क्योंकि हिंसा की वजह से उस उपचुनाव का नतीजा घोषित नहीं हो पाया था। यह सीट इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि ताऊ देवीलाल ने यहां जीत की हैट्रिक बनाई थी। लेकिन 1990 में जब उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला उपचुनाव लड़े तो चुनावी हिंसा हो गई। चौटाला ने तो दोबारा इधर झांक कर नहीं देखा, अलबत्ता उनकी पार्टी जरूर मुकाबले में रही है।
इस उपचुनाव ने उस वक्त राष्ट्रीय स्तर पर कौतुहल और बेचैनी पैदा कर दी थी. इसमें एक मुख्यमंत्री (और एक उप-प्रधानमंत्री) की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. फरवरी 1990 में यहां हुए उपचुनावों में इतनी हिंसा हुई थी कि नतीजा तक घोषित नहीं हो पाया था. दोबारा चुनाव कराए गए. फिर हिंसा हुई, चुनाव रद्द हो गए. 1991 में तीसरी बार चुनाव हुए और तब जाकर कोई नतीजा निकल पाया. लोग इसे ‘महम कांड’ के नाम से जानते हैं. तब के अंग्रेज़ी अखबारों ने यहां के लिए महम से मिलते जुलते अंग्रेज़ी शब्द ‘mayhem’ का इस्तेमाल किया.
महम कांड की यादें एक बार फिर से जिन्दा हो गई हैं, इस कांड को हरियाणा प्रदेश पर एक बदनुमा दाग की तरह से भी देखा जाता रहा है। इस कांड की आंच राजनीतिक पार्टी इनेलो के नेताओं को खासकर अभय चौटाला को जला रही है। बता दें कि 1990 में रोहतक के महम विधान सभा क्षेत्र में एक खूनी चुनाव में 10 व्यक्तियों की मौत व आधे दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए थे, जिसका नाम महम कांड दिया गया था।

रोहतक की अदालत की ओर से इनेलो पार्टी के नेताओं को जारी नोटिस के बाद से इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। जहां इनेलो ने इस मामले में सीधे-सीधे भाजपा सरकार को शामिल माना है, वहीं भाजपा का कहना है कि अपराध कभी छुपता नहीं, वह कभी ना कभी सामने आ ही जाते हैं।

किस मामले में पेश होना पड़ेगा अभय सिंह चौटाला को

महम कांड में हरियाणा विधानसभा में विपक्ष की नेता अभय सिंह चौटाला समेत 6 लोगों को कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी हुआ है। अदालत ने 1 फरवरी 2019 को पेश होने के आदेश दिए हैं। जिन्हें कोर्ट में पेश होने को कहा गया है उनमें हरियाणा के पूर्व डीजीपी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, फतेहबाद के जिला खेड़ा के अजित, हिसार गांव के दौलतपुर निवासी पप्पू, भिवानी के पूर्व डीएसपी सुखदेव राज राणा और दरियापुर गांव के भूपेंद्र उर्फ भुप्पी शामिल हैं।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फखरुद्दीन की अदालत में अर्जी लगाई है। रामफल ने इसमें कहा है कि 27 फरवरी 1990 को महम में मतदान के बाद शाम करीब 6:00 बजे वह परिवार और महेंद्र पुत्र भगवाना नामक एक मेहमान के साथ अपने घर में बैठे हुए थे। उस समय गोली कांड में मारे गए याचिकाकर्ता के बड़े भाई हरि सिंह भी वहां मौजूद थे। तभी पंचायती उम्मीदवार आनंद सिंह दांगी और उनके बड़े भाई धर्मपाल भी वहां पहुंचे और उन्होंने हरिसिंह से अगले दिन सुबह होने वाले पुर्नमतदान के लिए प्रचार में मदद करने की अपील की। जिसे हरि सिंह ने स्वीकार कर लिया और वह तुरंत ही उनके साथ चल दिए। अगले दिन सुबह 8:00 बजे खुद याचिकाकर्ता अपने भतीजे जोगिंद्र पुत्र हरि सिंह व गांव खरक जाटान निवासी महेंद्र पुत्र भगवान के साथ गांव बैंसी के राजकीय कन्या हाई स्कूल के गेट पर पहुंचे।

जहां  पुर्नमतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। वहां उन्हें अपना बड़ा भाई हरि सिंह भी दिखाई दिया जो कि आनंद सिंह दांगी व धर्मपाल दांगी समेत कई लोगों के साथ स्कूल के गेट पर खड़ा था। तभी तीन चार गाड़ियां स्कूल के गेट पर पहुंची और पहले से मौजूद धर्मपाल दांगी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जिस पर अभय सिंह चौटाला ने धर्मपाल दांगी पर फायर कर दिया लेकिन निशाना चूकने से गोली निदाना निवासी दलबीर को लगी। इसके बाद गाड़ी से उतरे अन्य लोगों ने भीड़ पर गोलियां चला दी। जिनमें एक गोली उसके सगे भाई हरि सिंह को लगी। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गोली कांड में हरि सिंह के अलावा कई अन्य की भी मौत हुई थी। रामफल ने बताया कि 28 फरवरी 1990 में महम थाना में इसकी शिकायत दर्ज करवाई थी।

आखिर महम कांड में इनेलो पार्टी का क्या रोल था?
फरवरी 1990 में जब महम कांड हुआ था, तब अभय सिंह चौटाला के पिता चौधरी ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। और उनके दादा चौधरी देवीलाल केंंद्र की वीपी सिंह सरकार में उप प्रधानमंत्री थे। वर्ष 1989 में केंद्र में जनता दल की सरकार बनने के बाद चौधरी देवीलाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और चौधरी ओमप्रकाश चौटाला को हरियाणा की बागडौर सौंप कर केंद्र में उप प्रधानमंत्री पद संभाल लिया था। उस समय चौधरी ओमप्रकाश चौटाला राज्य विधानसभा के सदस्य नहीं थे और मुख्यमंत्री बने रहने के लिए नियमानुसार छह माह के भीतर उनका विधान सभा का चुनाव जीतना अनिवार्य था। चौधरी देवीलाल ने लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद महम की अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था और यह सीट तब रिक्त पड़ी थी।

ओमप्रकाश चौटाला के खिलाफ आनद सिंह दांगी ने भरा नामंकन
चुनाव आयोग ने महम विधान सभा का उपचुनाव कराने के लिए 27 फरवरी 1990 का दिन तय कर दिया और चुनावी प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी। चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव लडऩे के लिए महम से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया, लेकिन चौधरी देवीलाल के एक सिपहसालार आनंद सिंह दांगी ने, जो उस समय हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन थे, चेयरमैनी से इस्तीफा देकर महम से पंचायती उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल कर दिया। इससे पूरे इलाके में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया। जब मतदान हुआ तो सभी पक्षों ने चुनाव में एक दूसरे पर धांधली करने के आरोप लगाये और राष्ट्रीय प्रैस ने इस धांधली को मुख्य मुद्दा बना दिया। 

एक पुलिसकर्मी को भी चुकानी पड़ी थी कीमत
पुलिस को भी इस खूनी चुनाव में कीमत चुकानी पड़ी थी। गांव बेंसी में जब डांगी समर्थनों ने अभय चौटाला को निशाना बनाना चाहा तो वे भीड़ से बच के पुलिस मुलाजिमों के साथ एक प्राईमरी स्कूल में छिप गए थे।  यहां एक पुलिस मुलाजिम हरबंस सिंह को अभय चौटाला के कपड़े पहनने के लिए दबाव दिया गया, जिस को बाद में अभय समझ कर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था।

भाजपा ने कहा अतीत आया सामने
इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश महासचिव व नेता प्रतिपक्ष अजय चौटाला व अन्य को महम कांड के सन्दर्भ में कोर्ट द्वारा किए गए नोटिस में भाजपा सरकार का हाथ होने के लग रहे आरोपों का मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने खंडन करते हुए कहा कि प्रदेश  सरकार का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है और इनके ऊपर अगर कोई कार्रवाई करनी होती तो सरकार बनते ही कर दी जाती।

राजीव जैन ने कहा कि जब इंडियन नेशनल लोकदल की सरकार थी तो लोगों पर केस बना कर उन्हें किस तरह से प्रताडि़त किया जाता था। उन्होंने कहा कि अतीत कभी पीछा नहीं छोड़ता और अपराध कभी भी नहीं छुपता है, वह कभी ना कभी सामने आ ही जाता है। जैन ने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति के साथ अतीत हमेशा उसके साथ चिपका रहता है, उन्होंने आगे कहा कि महम कांड के बाद मीडिया ने इनकी सरकार कि किस तरह से छिछालेदर की थी वो याद होना चाहिए और आज वही दिन फिर दोबारा से बाहर निकला है।


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