Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

पहला पन्‍ना English सर्वे लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

हाथ कंगन को आरसी क्‍या? जानिए इस कहावत का मूल अर्थ

आरसी दरअसल एक छल्‍लेनुमा अँगूठी हुआ करती थी जिसे महिलाएँ अपने दाएँ हाथ के अँगूठे में पहना करती थीं।

A self-evident fact requires no proof? Know the meaning of this proverb, naya haryana, नया हरियाणा

15 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

बातचीत के दौरान हम कितनी ही बार इस कहावत का प्रयोग करते हैं, जिसका अर्थ है प्रत्‍यक्ष को प्रमाण की आवश्‍यकता नहीं। आज किसी ने बातों-बातों में मुझसे पूछा कि बाकी सब तो समझ में आता है, लेकिन यह आरसी क्‍या है? सवाल अच्‍छा था और जवाब दिलचस्‍प तो सोचा आप सबसे साझा करूँ।

दरअसल, आरसी संस्‍कृत शब्‍द ‘आदर्श’ से बना है। संस्‍कृत में आदर्श का एक अर्थ होता है, किसी क्षेत्र में उत्‍कृष्‍टता का मानक उदाहरण, नमूना या मिसाल जिसे अंग्रेज़ी में ideal या आइडियल कहते हैं और दूसरा अर्थ होता है, दर्पण या आईना। यह जानना दिलचस्‍प होगा कि आदर्श शब्‍द में मूल धातु या शब्‍द दृश् अर्थात् देखना है। दर्पण में आप खुद को देखते हैं इसलिए उसे आदर्श कहा जाता है और किसी आदर्श व्‍यक्ति आदि में आप वह आचरण आदि देखते हैं जिसे आप खुद अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं, इसलिए वह आदर्श कहलाता है।

तो आरसी का अर्थ हुआ, दर्पण। आरसी दरअसल एक छल्‍लेनुमा अँगूठी हुआ करती थी जिसे महिलाएँ अपने दाएँ हाथ के अँगूठे में पहना करती थीं। बिहारी ने इस शब्‍द का अपने काव्‍य में खूब प्रयोग किया है। जब महिलाएँ अपने प्रेमी को स्‍त्रीसुलभ लज्‍जा के चलते देखने में संकोच करती थीं तो वे इस आरसी आभूषण का प्रयोग चुपके से उनकी झलक पाने के लिए करती थीं और कंगन का अर्थ तो आप सब जानते ही हैं। संस्‍कृत के कंकण से बना हिन्‍दी का कंगन अर्थात् कड़ा।

अब कहावत का अर्थ स्‍वत:स्‍पष्‍ट हो गया होगा; हाथ कंगन को आरसी क्‍या यानी अगर आपने हाथ में कंगन पहना है तो उसे देखने के लिए आपको किसी दर्पण के सहारे या अँगूठी के छल्‍ले में लगे दर्पण की ज़रूरत नहीं। वह तो आपको और दुनिया को प्रत्‍यक्ष ही नज़र आ रहा है। 

Tags:

बाकी समाचार