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नया हरियाणा

बुधवार, 16 जनवरी 2019

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करनाल नगर निगम चुनाव में क्या मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मेहनत रंग लाएगी!

करनाल निगम चुनाव के दबाव में मनोहर लाल को अपनी जाति बताकर वोट मांगने पड़ गए।

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14 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

करनाल नगर निगम के चुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अपनी जाति के आधार पर वोट मांगेन पर मजबूर होना पड़ा। कहां तो मनोहर लाल ने अपने नाम के आगे से खट्टर हटा दिया था, कहां अब खुद को पंजाबी बताकर वोट मांगने पड़ रहे हैं।

करनाल मुख्यमंत्री मनोहर लाल का निर्वाचन क्षेत्र रहा है।यहाँ से मेयर की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित है। यहां से मेयर रह चुकी रेनू बाला गुप्ता पर भाजपा ने दाव लगाया है। यहां से इनेलो व कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारने की जगह  निर्दलीय उम्मीदवार आशा मनोज वाधवा को समर्थन दिया है। इस समर्थन ने इस मेयर चुनाव को  कांटे की टक्कर दी है।
यही नहीं, राजकुमार सैनी ने भी कोमल चंदेल को  चुनावी मैदान में उतारा है। करनाल में मुख्य बात है कि आशा मनोज वाधवा को पहले इनेलो-बसपा ने गठबंधन का उम्मीदवार बनाना चाहा था। लेकिन उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया। आशा जब निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरी, तो इनेलो-बसपा ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर दिया। ऐसे में मुकाबले को और कड़ा बनाने के लिए पूर्व सीएम हुड्डा ने भी अपना समर्थन देकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। खुद सीएम करनाल में समाधि लगाकर बैठे हुए हैं।

यमुनानगर, जगाधरी और रादौर हलकों के एरिया को जोड़कर यमुनानगर नगर निगम बना है। भाजपा ने यहां से चुनाव मैदान पर मदन चौहान को उतारा है। तो गठबंधन की ओर से बसपा से संदीप गोयल मैदान में आ खड़े हुए हैं। कांग्रेस ने यमुनानगर में ब्राह्मण वोट बैंक को साधते हुए राकेश शर्मा को समर्थन दिया है। यहां त्रिकोणीय स्थिति बनी हुई दिखाई दे रही है जिसमें मेयर की सीट बुरी तरह से फंस गई है। यह चुनाव जगाधरी विधायक और स्पीकर कंवरपाल गुर्जर के अलावा यमुनानगर विधायक घनश्याम सर्राफ और रादौर विधायक विधायक श्याम सिंह राणा की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। यमुनानगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कर्मक्षेत्र है। मनोहर लाल भी अपना पूरा जोर लगा रहे हैं कि यहाँ से जीत निश्चित की जा सके। निगम चुनाव के प्रचार की शुरुआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहाँ से ही की थी। इस जिले की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है और यही उसकी साख का  सवाल भी बने हुए है।

पानीपत सिटी और पानीपत ग्रामीण हलको से मिलकर बने पानीपत निगम के सियासी ताप को महसूस करते हुए भाजपा ने अवनीत कौर को चुनावी मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस जो चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ रही, लेकिन प्रत्याशियों को समर्थन देकर अपनी उपस्थिति बनाए हुए है, ने अंशु कौर को अपना समर्थन देकर चुनाव में उतारा है. कांग्रेस के इस दांव ने भाजपा का सियासी खेल बिगाड़ दिया है. रही-सही कसर इनेलो और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने पूरी कर दी. इनेलो ने प्रियंका सोनी और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने सीमा सैणी को मंच पर उतारा है. यहां मेयर की सीट पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। दोनों हलको में भाजपा विधायक है। इसराना विधायक और केबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार भी पानीपत में रहते हैं। 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा को इस इलाके में पूरा समर्थन मिला था। अबकी बार निगम चुनावों में हालात पूरी तरह से पलट गए है। मुख्य बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस समर्थित दोनों की पार्टी उम्मीदवारों का मायका और ससुराल निगम क्षेत्र में ही पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव अन्य क्षेत्रों की तरह ही कड़ा जान पड़ता है। भाजपा ने विधानसभा चुनावों में भले ही शिकस्त का सामना किया है लेकिन कांग्रेस को करारी टक्कर भी दी है। लोगों की नाराजगी को दूर कर अपने मजबूत इरादों के साथ भाजपा का लक्ष्य जीतना तय है।

हिसार नगर निगम में हिसार शहर के अलावा नलवा और आदमपुर विधानसभा हलके के कुछ गांव भी शामिल है। बीजेपी के डॉ. कमल गुप्ता हिसार से विधायक हैं और नारनौंद हलके से विधायक कैप्टन अभिमन्यु प्रदेश के वित्त मंत्री हैं। भाजपा ने हरियाणा जनहित कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लड़ चुके गौतम सरदाना को चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतारा है। जबकि भाजपा के पुराने नेता हनुमान ऐरन अपनी पत्नी रेखा ऐरन के लिए टिकट मांग रहे थे। लेकिन भाजपा ने उन्हें टिकट देने से साफ इंकार कर दिया। 
हालात को भाँपते हुए भजन लाल और जिंदल परिवार ने हाथ मिला लिया है। उन्होंने हनुमान ऐरन की पत्नी रेखा ऐरन को कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में मैदान पर उतार दिया है। वहीं इनेलो ने अमित सैनी और लोकतंत्र सुरक्षा मंच ने मास्टर महावीर सैनी को प्रत्याशी बनाया है। 
रेखा ऐरन के मैदान में आते ही भाजपा के लिए यह सीट भी फंसती दिखाई दे रही है। सभी पार्टियां इस मेयर चुनाव में अपनी राजनीतिक पारी के अनुभवों को आजमाते हुए भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करने का काम कर रही है। लेकिन भाजपा विपक्ष की इन राजनीतिक चालों और प्रत्याशियों से डरने वाली नहीं है। भाजपा के लिए यह चुनाव अपनी साख को बचाने के साथ-साथ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है। जिसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी कमरकस तैयारी शुरू कर दी है।


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