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नया हरियाणा

रविवार, 24 मार्च 2019

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बीजेपी राजस्थान के बाद हरियाणा में झेलेगी कर्मचारियों की मार

कर्मचारियों के साथ सरकार तालमेल नहीं बना पा रही है.

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14 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

सर्व कर्मचारी संघ ने मनोहर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की तरह हरियाणा में भी सरकार को कर्मचारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। राजस्थान में रोडवेज कर्मचारियों की चुनाव अधिसूचना जारी होने तक हड़ताल जारी रही, लेकिन सरकार ने उनसे बात करना भी जरूरी नहीं समझा। इसी तरह, छत्तीसगढ़ के कर्मचारी भी अपनी मांगों को पिछले 6 महीने से निरंतर संघर्ष के द्वारा सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनसे भी बातचीत न करते हुए दमन और उत्पीड़न का रास्ता अपनाया। जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारी, मजदूर और उनके परिवारों में सरकार के प्रति गुस्सा विधानसभा के चुनाव के नतीजे के रूप में सामने आया।
सर्व कर्मचारी संघ ने कहा है कि 8 और 9 जनवरी, 2019 को कर्मचारी राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल सुनिश्चित करके सरकार को यह अहसास दिलाएंगे कि वह अब एकजुट हैं। कर्मचारी संघ के महासचिव ने कहा कि हरियाणा में मनोहर सरकार भी राजस्थान, छत्तीसगढ़ के नक्शे कदम पर चल रही है। ऐसे में मनोहर सरकार को भी कर्मचारियों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।
10 सितंबर को विधानसभा घेराव के समय कर्मचारियों पर किए गए लाठीचार्ज, वाटर कैनन, आंसू गैस के गोलों की वर्षा की गई। नेताओं के विरुद्ध झूठे मुकदमें बनाकर आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई। यही नहीं, उन्होंने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों की 18 दिन चली हड़ताल के बावजूद भी सरकार चंद ट्रांसपोर्टरों को फायदा पहुंचाने के लिए प्राइवेट बसों को किराए पर लेने के निर्णय से पीछे हटने को तैयार नहीं हुई है।
बिना पर्याप्त स्टाफ के ओवरटाइम बंद करना, रात्रि ठहराव को समाप्त करना, लंबी दूरी के रूटों पर परिवहन सेवाएं बंद करना और 355 चालक- परिचालकों को नौकरी से हटाना सरकार के ये ऐसे कदम हैं जिनसे मनोहर सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पुरानी पेंशन स्कीम व एक्सग्रेसिया रोजगार स्कीम को बहाल करने, पंजाब के समान वेतन व पेंशन देने, विधानसभा में बिल पारित कर संघ के सुझावों के अनुसार सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, समान-काम, समान-वेतन देने आदि की मांगों को लेकर सरकार ने अभी भी घोर उपेक्षा पूर्ण रवैया जारी रखा हुआ है।


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