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शनिवार, 23 जून 2018

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आदित्यनाथ योगी ने बनाया अपराधियों के खिलाफ कड़ा कानून

उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी खबर है क्योंकि यूपीकोका कानून पारित हो चुका है। ऐसे में जाहिर है कि अब अपराधियों के लिए प्रदेश में मुश्किल वक्त शुरू हो चुका है।

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20 दिसंबर 2017

नया हरियाणा

उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी खबर है क्योंकि यूपीकोका कानून पारित हो चुका है। ऐसे में जाहिर है कि अब अपराधियों के लिए प्रदेश में मुश्किल वक्त शुरू हो चुका है। इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होने वाले अभियोग मंडलायुक्त तथा परिक्षेत्रीय पुलिस पर महानिरीक्षक की दो सदस्यीय समिति के अनुमोदन के बाद ही पंजीकृत किया जाएगा। अब तक पुलिस पहले अपराधी को पकड़कर कोर्ट में पेश करती थी, फिर सबूत जुटाती थी। लेकिन यूपीकोका के तहत पुलिस पहले अपराधियों के खिलाफ सबूत जुटाएगी और फिर उसी के आधार पर उनकी गिरफ्तारी होगी। यानी कि अब अपराधी को कोर्ट में अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी। इसके अलावा सरकार के खिलाफ होने वाले हिंसक प्रदर्शनों को भी इसमें शामिल किया गया है। इस बिल में गवाहों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है। यूपीकोका के तहत आरोपी ये नहीं जान सकेगा कि किसने उसके खिलाफ गवाही दी है।

हालांकि सत्र की शुरुआत से पहले ही बसपा ने बिल का विरोध किया था। बसपा ने कहा था कि यह बिल महाराष्ट्र के मकोका कानून की तर्ज पर बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार यूपीकोका (UPCOCA) कानून लाने जा रही है. विवादों के बीच आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में यूपीकोका (उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) बिल पेश किया.

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने जब यूपीकोका का मसौदा तैयार किया और इसे कानूनी रूप देने की मंशा जाहिर तो इसका विरोध होने लगा. विपक्षी दलों समेत मुस्लिम संगठनों की तरफ से इस प्रस्तावित कानून को एक खास समुदाय को टारगेट करने का कदम करार दिया गया.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस कानून का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि यूपीकोका का इस्तेमाल दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के दमन के लिए होगा. इसलिए व्यापक जनहित में यूपीकोका को वापस लिया जाए.

हालांकि, प्रस्तावित बिल के मसौदे के आधार पर अलग-अलग तरह के अपराधों पर लगाम लगाने की बात कही जा रही है. प्रस्तावित मसौदे में गुंडागर्दी और संगठित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है. संगठित अपराध की श्रेणी में रंगदारी और ठेकेदारी में गुंडागर्दी को भी शामिल किया गया है. साथ ही गैरकानूनी तरीके से कमाई गई संपत्ति भी इस कानून के दायरे में शामिल होगी. ऐसी संपत्ति को जब्त भी किया जा सकता है.

इसके अलावा यूपीकोका से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएंगी. जिससे ये सुनिश्चित किया जाएगा कि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके. इस कानून के तहत आने आपराधिक मामलों की निगरानी खुद राज्य के गृह सचिव करेंगे.

हालांकि इससे पहले 2007 में मायावती भी कानून लाना चाहती थी लेकिन तब केंद्र सरकार ने उन्हें मंजूरी नहीं दी थी.
 


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