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नया हरियाणा

मंगलवार, 22 जनवरी 2019

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हरियाणा बेमिसाल : भिवानी में किन्नरों ने भरा अनूठा भात

हरियाणा जैसे प्रदेश में तो भात की रस्म की अदायगी के बिना पूरे आयोजन को अधूरा मामना जाता है.

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12 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

किसी भी शादी में भात की रस्म को अहम माना जाता है व हरियाणा जैसे प्रदेश में तो भात की रस्म की अदायगी के बिना पूरे आयोजन को अधूरा मामना जाता है. यहां तक कि प्रीतिभोज तक भी भात की रस्म अदायगी से पहले शुरू नहीं होता। हर शादी में भात की रस्म अदायगी होती है मगर भिवानी में भात की अनूठी रस्म अदायगी देखने को मिली। यहां रस्में भी अदा की गई बहन भी थी तथा भाई बनकर सब रस्में अदा की गई मगर भाई कोई और नहीं बल्कि किन्नर थे। सगे भाइयों के होते हुए समाज में उपेक्षित माने जाने वाले किन्नरों ने एक बहन के भात की रस्म को अदा किया। 

अब तक किन्नरों को सिर्फ मांगने के लिए ही जाना जाता रहा है तथा लोगों का मानना है कि उन्हें रिश्ते नातों से कोई सरोकार नहीं है. मगर भिवानी में इन बस भ्रांतियों को दरकिनार करते हुए किन्नरों ने ना केवल विवाह में भात जैसी महत्त्वपूर्ण रस्म को अदा किया बल्कि दूसरी परंपराओं का निर्वहन करके जता दिया कि भले ही लोग उन्हें समाज की मुख्य धारा से अलग मानते हों पर उन्हें रिश्ते नाते निभाने आते हैं। 

अब तक भाइयों को ही भात की रस्म निभाते हुए देखा सुना गया था तथा कई मामलों में तो भाई होते हुए भी अपनी बहनों के घर शादियों में नहीं आते. मगर भिवानी की राजीव कालोनी में किन्नरों ने भाई व भाभी बनकर भात की रसम अदा कर एक बहन की खुशियों को चार चांद लगा दिए। दरअसल राजीव कालोनी निवासी निर्मला नामक महिला के बेटोंं की शादी थी। शादी में सब रस्में परंपराओं के अनुसार अदा की जा रही थी मगर भात की रस्म ने इस शादी को चर्चाओं में ला दिया। अक्सर देखा सुना जाता है कि भाई व भाभी ही भात की रस्म की अदायगी करते हैं मगर यहां तो किन्नरों ने भात की संपूर्ण रस्मों की अदायगी की। 

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महंत बुलबुल किन्नर ने निर्मला को अपनी धर्म बहन बना रखा था तो जाहिर है धर्म भाई नाते उसे शादी में आना था मगर शादी में बुलबुल किन्नर अकेले नहीं आई बल्कि दूसरे किन्नरों को लेकर आई। साथ में बेशकीमती सामान व भात की रस्म अदायगी के लिए कपड़े व दूसरी वस्तुएं थी। परंपराओं के मुताबिक भाई बनकर महंत बुलबुल किन्नर ने बहन को चुंदड़ी ओढ़ाई व भात की रस्म अदा की। निर्मला के परिवार के लोगों व हर रिश्तेदार को चांदी के सिक्के देकर रस्म अदायगी की। 

ऐसा नहीं है कि निर्मला के सगे भाई नहीं हैं बल्कि उसके भाई भी हें तो भी उसके बेटों की शादी में भात की रसम अदागी महंत बुलबुल किन्नर ने की। महंत बुलबुल किन्नर का कहना था कि आमतौर पर समझा जाता है कि किन्नर समाज की मुख्यधारा से अलग हें तथा उन्हें रिश्ते नातों का इल्म नहीं है. मगर उन्हें रिश्ते नाते निभाने आते हैं व वे भी अच्छे से सब रस्में जानती हैं। उनका कहना था कि रिश्ते बनाकर चलना चाहिए। सगों को तो दुनिया मानती है मगर उन्होंने धर्म की बहन के लिए रस्में अदा की हैं। उनका कहना था कि आज के भौतिकवादी समय में अपने भी पराए हो जाते हैं मगर उन्हें रिश्ते नातों की फिक्र है। उनका कहना था कि लोग गाय व बेटी की कद्र करना भूल गए हैं जेा कि चिंता  की बात है मगर किन्नर इस बात को बखूबी समझते हैं। इसी कारण उन्होंने धर्म की बहन के भात की रसम  अदा की है। उनका कहना था कि लोगों में भ्रांति है कि किन्नर रिश्ते नाते नहीं निभाना जानते मगर उदाहरण सबके सामने है। उनका कहना था कि नकली किन्नरों के कारण समाज में उनकी छवि खराब हो रही है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। 

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वहीं किन्नर खुशी का कहना था कि उन्होंने अपने महंत गुरू बुलबुल किन्नर के साथ भात की रसम अदायगी की है। उनका कहना था कि हालांकि उन्हें समाज की मुख्य धारा से कट ऑफ माना जाता है या फिर स्वत: ही वे मुख्य धारा से कट जाते हैं मगर यहां उन्होंने सब रिश्तों का निर्वहन करके जता दिया है कि रिश्तों की अहमियत का उन्हें भी इल्म है। हालांकि सरकार की योजनाओं का लाभ ना मिल पाने पर उन्होंने मलाल जताया व कहा कि वे अंग्रेजी एमए,बी.टैक व कम्प्यूटर की जानकार हैं तो भी सरकार की योजनाओं से वे वंचित हैं। ऐसे में सरकार के दावों के अनुरूप पढ़े लिखे किन्नरों को अगर लाभ मिले तो वे भी मुख्धारा से जुड़ सकते हैं। जबकि उन्हें अब लोगों की खुशियों में शरीक होकर अपना गुजारा चलाना पड़ता है। 

वहीं किन्नरों से भाई की भात की रस्में अदा करवाने वाली निर्मला का कहना था कि आज वे बेहद खुश हैं। उनका कहना था कि इस अनूठे भात ने उनकी शादी की खुशियों को और बढ़ा दिया है। भले ही समाज में किन्नरों के प्रति भ्रांतियां हों या गलत धारणाएं बन गई हों मगर भिवानी में इस अनूठे भात ने नरसी के भात की याद दिला दी। सगे भाइयों के होते हुए किन्नरों के द्वारा भरे गए इस भात की रस्मों की अदायगी के दौरान सब चहक रहे थे तथा ढोल की थाप पर नाच भी रहे थे। वो किन्नर जो कि दूसरों की खुशियों में शरीक होकर नाच गाकर रूपये लेते हैं.  उन्हीं किन्नरों में शुमार किन्नरों ने भाई भाभी के रूप में भात भरकर अनूठी मिसाल कायम की। साथ ही संदेश भी दिया कि रिश्ते लिंग अथवा धर्म को नहीं देखते बल्कि रिश्ते बनाकर चलना व निभाना ही सच्चा धर्म है। 


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