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नया हरियाणा

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

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हरियाणा नगर निगम चुनाव में बढ़ेगी भाजपा की मुसीबतें

5 नगर निगम के चुनाव नतीजे हरियाणा का राजनीति भविष्य तय करने वाले हैं.

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12 दिसंबर 2018



नया हरियाणा

विधानसभा चुनावों के परिणामों ने हरियाणा में भाजपा की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। हरियाणा प्रदेश में साढ़े चार साल पूरा कर चुकी भाजपा सरकार के पास अब जनता को जवाब देने का समय है। ऐसे में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनाव के नतीजों का असर हरियाणा पर भी पड़ेगा। 16 दिसंबर को हरियाणा में मेयर पद के लिए होने वाले मतदान में हरियाणा प्रदेश के लोगों का रुख भी साफ हो जाएगा। राजस्थान में वसुंधरा राजे से जिस तरह बीजेपी के कार्यकर्ता नाराज चल रहे थे, लगभग वही आलम हरियाणा में है. हरियाणा में बीजेपी के कार्यकर्ता मनोहर लाल के व्यवहार से नाराज हैं. हो सकता है कि नगर निगम के चुनाव में कार्यकर्ता अपनी नाराजगी की झलक पेश कर दें. दूसरी तरफ अफसरशाही के हावी होने के आरोप भी लगते रहे हैं. जबकि हकीकत ये है कि मुख्यमंत्री चाहे व्यक्तिगत स्तर पर ईमानदारी से काम करना चाहते हो पर अफसर तो चांदी कूट ही रहे हैं. सबसे हैरानी की बात ये है कि हुड्डा राज में जिन अफसरों की मौज थी, इस सरकार में भी उन्हीं अफसरों की मौज है.
अब मेयर का सीधा चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणामों ने भाजपा को जता दिया है कि लोकतंत्र की असली ताकत हमेशा जनता के हाथों में ही है। भाजपा के लिए आगामी लोकसभा चुनावों में यह नतीजे सबक का काम करेंगे। भाजपा को लेकर विपक्ष भी मजबूत हो गया है। कांग्रेस और अन्य दल इस चुनाव में हावी होने का प्रयास करेंगे क्योंकि उनकी अगली रणनीति भी इसी चुनाव के माध्यम से बनेगी। जिससे निपटने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अब नई रणनीति के तहत मैदान में उतरना होगा। प्रदेश की जनता अपने मुद्दों के आधार पर वोट करती है। भाजपा को यह समझना होगा कि किसानों व गरीबों की उपेक्षा करके, बिना किसी नई सोच के सिर्फ मोदी के सहारे बेड़ा पार होने वाला नहीं है। इससे भाजपा सरकार की  मुसीबतें बढ़ेंगी ही, घटेगी नहीं। भाजपा के लिए विधानसभा में करारी हार चिंता का विषय है।

दूसरी तरफ बीजेपी के अजेय होने की धारणा भी टूटी है. ऐसे में हरियाणा की जनता की उपेक्षा और जनता को दो हिस्सों में बांटकर राज करने की रणनीति कितनी सफल होती है, ये इन चुनावों सेे पता चल जाएगा. तीन राज्यों में कांग्रेस को मिली जीत के बाद हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कद बढ़ सकता है, क्योंकि कमलनाथ, अशोक गहलोत व पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिद्र सिंह तीनों के हुड्डा खास बताए जाते हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनेंगे और मध्यप्रदेश में कमलनाथ. ऐसे में अगर रोहतक मेयर चुनाव में हुड्डा समर्थित सचदेवा जीत जाते हैं तो हुड्डा का कद बढ़ना लाजिमी है.

करनाल से अगर भाजपा समर्थित उम्मीद्वार अगर चुनाव हार जाते हैं तो मनोहर के नेतृत्व पर सावल खड़े होने लाजिमी हैं. जनता का मूड इन चुनावों से पता चल जाएगा. सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे मेयर चुनाव को लेकर भाजपा के जवाब में अब इनेलो भी आक्रामक अंदाज में मैदान में उतरी है। पांचों नगर निगमों में भाजपा ने जहां पहले से अपने मंत्रियों-विधायकों के साथ संगठन पदाधिकारियों को मैदान में उतार रखा है, वहीं अब इनेलो ने भी रणनीति बदलते हुए सांसद-पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों, विधायक-पूर्व विधायकों और संगठन पदाधिकारियों को मैदान में उतारा है। इतना ही नहीं, मुस्लिमों और पिछड़े वर्गों को लुभाने के लिए उसी बिरादरी से संबंधित विधायकों की ड्यूटी लगाई गई है।

यमुनानगर, पानीपत, करनाल, हिसार और रोहतक में मेयर और पार्षदों के लिए 16 दिसंबर को मतदान होना है। भाजपा ने पहले से ही अपने प्रत्याशियों के पक्ष में साथ लगते जिलों के पदाधिकारियों की पूरी फौज मैदान में उतार रखी है। इसके चलते इनेलो ने भी रणनीति बदलते हुए संबंधित क्षेत्रों में साथ लगते जिलों के पार्टी पदाधिकारियों को डेरा डालने का निर्देश दिया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही यह पदाधिकारी वापस लौटेंगे।

इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा को करनाल और यमुनानगर का चुनाव प्रभारी बनाया गया है जो गठबंधन की सांझी प्रत्याशी आशा मनोज वधवा और संदीप गोयल का प्रचार करेंगे। करनाल में कैथल व कुरुक्षेत्र तथा यमुनानगर में पंचकूला और अंबाला के पदाधिकारी लगाए गए हैं। पानीपत में प्रत्याशी प्रियंका कश्यप के चुनाव प्रभार का जिम्मा राज्य सभा सदस्य रामकुमार कश्यप, विधायक जाकिर हुसैन और पूर्व विधायक कलीराम पटवारी को दिया गया है। सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल के पदाधिकारी उनकी मदद करेंगे।

सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, विधायक रणबीर गंगवा, वेद नारंग, बलवान सिंह और पूर्व विधायक राजकुमार सैनी हिसार के प्रभारी होंगे। यहां के उम्मीदवार अमित सैनी के लिए फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी, उचाना और नरवाना के पदाधिकारी प्रचार करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में पूर्व मंत्री रामपाल माजरा, पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपीचंद गहलोत, विधायक परमिंद्र ढुल और नसीम अहमद को प्रभारी बनाया गया है। यहां पार्टी प्रत्याशी संचित नांदल के लिए दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, जींद, झज्जर और गुरुग्राम के पदाधिकारियों को प्रचार अभियान की जिम्मेदारी मिली है।


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