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नया हरियाणा

शनिवार, 17 अगस्त 2019

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साढौरा विधानसभा का इतिहास और 1982 के बाद बीजेपी को 2014 में मिली जीत

यह एक पुराना ऐतिहासिक शहर है और जिसे पहले 'साधु-राहा' के नाम से जाना जाता था।

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10 दिसंबर 2018



नया हरियाणा

साढोरा यमुनानगर जिले में आने वाली ऐसी सीट है जो हरियाणा बनने के बाद से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चली आ रही है। यह एक पुराना ऐतिहासिक शहर है और जिसे पहले 'साधु-राहा' के नाम से जाना जाता था। यह नाकाती नदी के तट पर स्थित है और पीर बुद्ध शाह का जन्म स्थान है, एक मुस्लिम दिव्य जिसका असली नाम बद्र उद दीन था। वह गुरु गोबिंद सिंह के एक महान प्रशंसक और सहयोगी थे।

आरक्षित होने के बाद से इस सीट पर चमार जाति से ही विधायक बने हैं। 2009 में यहां से राजपाल भुखड़ी चुनाव जीते थे जो कुमारी सैलजा के प्रबल समर्थक थे। उससे पहले इनेलो ने यह सीट दो बार जीती थी और दोनों बार बलवंत सिंह विधायक बने थे।
कांग्रेस पार्टी ने 2014 में भी राजपाल भुखड़ी को सढोरा से टिकट दी थी। विधायक के तौर पर राजपाल भुखड़ी कुमारी सैलजा के पक्ष में बोलने और अपनी पार्टी की राज्य सरकार की आलोचनाओं को लेकर चर्चा में रहते थे। उनके 5 साल टकराव में ही बीत गए और उनकी नेता सैलजा की मुख्यमंत्री हुड्डा से वैचारिक दूरी के चलते सढोरा क्षेत्र में विकास के काम ठीक से नहीं हो पाए। कुछ मौकों पर उन्होंने विधान सभा से इस्तीफा देने तक की बातें कहीं और सरकार पर उनका फोन टेप करवाने जैसे आरोप लगे। 2009 चुनाव में राजपाल को 35.58% वोट मिले थे।  जबकि 2014 में वे सिर्फ 12.94% वोट ही ले पाए। राजपाल यमुनानगर जिले के ही भूखड़ी गांव के रहने वाले हैं और दो बार ब्लॉक समिति के सदस्य भी रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे इंजीनियर थे और एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे।

Year A.C No. Assembly Constituency Name Type Winner Gender Party Votes Runner Up Gender Party Votes
2014 7 Sadhaura (SC) Balwant Singh M BJP 63772 Pinki Chhapper F INLD 49626
2009 7 Sadhaura (SC) Rajpal M INC 47263 Balwant Singh M INLD 38650
2005 3 Sadhaura (SC) Balwant Singh M INLD 35664 Deep Chand M IND 27222
2000 3 Sadhaura (SC) Balwant Singh M INLD 30106 Deep Chand M INC 22628
1996 3 Sadhaura (SC) Ramji Lal M SAP 26142 Deep Chand M IND 24075
1991 3 Sadhaura (SC) Sher Singh M IND 20159 Ramji Lal M JP 16786
1987 3 Sadhaura (SC) Bhag Mal M IND 37246 Sher Singh M INC 21238
1982 3 Sadhaura (SC) Bhagmal M BJP 20981 Parbhu Ram M INC 20971
1977 3 Sadhaura (SC) Bhag Mal M JNP 23989 Prabhu Ram M INC

16352

भाजपा ने यहां से बलवंत सिंह को टिकट दी थी जिन्होंने पिछले तीन चुनाव इनेलो से लड़े थे और 2000 व 2005 में जीत हासिल की थी। बलवंत सिंह की टिकट इनेलो ने काट दी थी और उन्होंने चुनाव से ठीक पहले इनेलो छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली और टिकट ले आए। 2009 में भाजपा उम्मीदवार को इस सीट पर सिर्फ 3.38% वोट मिले थे जबकि इसी पार्टी की टिकट पर बलवंत सिंह को 35.74% वोटों के साथ जीत मिली इस तरह बलवंत सिंह इस सीट से तीसरी बार विधायक बने हालांकि इस बार पार्टी अलग थी।
इनेलो ने यहां अपने तीन बार के उम्मीदवार बलवंत सिंह को टिकट देने से इनकार कर दिया था। वह पिछला चुनाव हारे थे और पार्टी को लगता था कि नया चेहरा सामने रखने से ही सढोरा में जीत मिलेगी। इसी सोच के साथ इनेलो ने यहां से पिंकी छप्पर को मैदान में उतारा जो पार्टी के एक स्थानीय कार्यकर्ता बृजपाल की पत्नी हैं। यह रणनीति इनेलो के काम नहीं आई और जहां मोदी लहर ने बलवंत सिंह को भाजपा की टिकट पर शानदार जीत दिलवा दी, वहीं पिंकी छप्पर 30.15% वोट ही ले पाई। हालांकि यह 2009 में इनेलो उम्मीदवार के तौर पर बलवंत सिंह को मिले 29.09% से कुछ ज्यादा था। चुनाव से पहले यहां इनेलो की स्थिति काफी मजबूत थी।
बसपा के कपूर सिंह ने यहां 10.05% वोट लिए। इससे पहले भी बसपा ने यहां 2005 में 18.20 और 2000 में 10.33% वोट लिए थे। सढोरा के लिए 2014 मोदी लहर और बलवंत सिंह की हलके पर मजबूत पकड़ का चुनाव था। इस सीट से चौथा चुनाव लड़ने वाले बलवंत सिंह के लिए इनेलो का अविश्वास काम आ गया और वे मोदी लहर पर सवार होकर सत्तारूढ़ हुई पार्टी के विधायक बन गए। जितने वोट उन्हें भाजपा की टिकट पर मिले, उतने इनेलो उम्मीदवार के तौर पर कभी नहीं मिले थे।

 


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