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नया हरियाणा

रविवार, 16 दिसंबर 2018

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डबवाली विधान सभा का इतिहास और नैना चौटाला की पहली जीत

2014 के चुनाव में नैना चौटाला ने के वी सिंह को हराकर पहली जीत दर्ज की थी.

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8 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

यह सिरसा जिले की वह सीट है जिसकी सीमाएं पंजाब और राजस्थान दोनों से लगती हैं। जनजीवन के हिसाब से भी यहां पंजाबी बोलने वाले और राजस्थानी रहन-सहन व बोली से मिलते-जुलते लोग हैं। राजनीतिक रूप से सक्रिय यह क्षेत्र लोकदल का गढ़ रहा है। 2009 से पहले यह एक आरक्षित सीट थी जिस पर हुए आखिरी तीन चुनावों में इनेलो और इसका पिछला स्वरूप समता पार्टी ही जीते हैं । सामान्य सीट बनने के बाद 2009 और 2014 में यहां से चौटाला परिवार के सदस्य ही विधायक बने।

Year A.C No. AC. Name Type of A.C. Winner Sex Party Votes Runner-UP Sex Party Votes
1967 80 Dabwali (SC) K. Ram M INC 15221 P. Chander M IND 14351
1968 80 Dabwali (SC) Teja Singh M IND 11925 Kesra Ram M INC 10477
1972 80 Dabwali (SC) Gordhan Dass M INC 27086 Gurdial Singh M IND 3209
1977 84 Dabwali (SC) Mani Ram M JNP 21017 Govardhan Dass Chauhan M INC 13032
1982 84 Dabwali (SC) Goverdhan Dass Chouhan M INC 27234 Mani Ram M LKD 26694
1987 84 Dabwali (SC) Mani Ram M LKD 47652 Goverdhan Dass Chauhan M INC 18930
1991 84 Dabwali (SC) Santosh Chauhan Sarwan F INC 32296 Gain Chand M JP 19637
1996 84 Dabwali (SC) Mani Ram M SAP 29434 Jagsir Singh M HVP 20697
2000 84 Dabwali (SC) Dr.Sita Ram M INLD 51672 Labh Singh M INC 24679
2005 84 Dabwali (SC) Dr.Sita Ram M INLD 50840 Jagan Nath M INC 42815
2009 43 Dabwali GEN Ajay Singh Chautala M INLD 64868 Dr. K.V. Singh M INC 52760

इनेलो ने 2014 में यहां से देवीलाल परिवार की बहू और डॉ. अजय सिंह चौटाला की पत्नी नैना सिंह को उम्मीदवार बनाया था। चौधरी देवी लाल के परिवार से राजनीति में आने वाली वह पहली महिला है। नैना सिंह का राजनीति में आना चौटाला परिवार के लिए उस विपरीत स्थिति में हुआ, जो ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला के जेल में जाने के बाद पैदा हुई। भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता होने की वजह से अजय चौटाला चुनाव नहीं लड़ सकते थे। ऐसे में उनकी सीट डबवाली पर उनकी पत्नी नैना सिंह मैदान में उतार दी गई। 1980 के दशक में राजनीति की शुरुआत करने वाले अजय चौटाला दो बार राजस्थान विधानसभा की सदस्य रहे हैं। वह 1989 में दात्ता रामगढ़ और 1998 में नोहर से जीतकर राजस्थान के विधायक बने। इसके बाद 1999 में अजय सिंह भिवानी लोकसभा सीट से जीत कर सांसद बने। 2004 में वे भिवानी लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई से हार गए। इसके बाद अजय चौटाला उसी साल राज्यसभा के लिए चुने गए। 2009 का लोकसभा उपचुनाव भी अजय चौटाला भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस की श्रुति चौधरी से हार गए। उसी साल अजय सिंह डबवाली विधानसभा से जीतकर पहली बार हरियाणा विधानसभा के सदस्य बने। इसके बाद चौधरी भजन लाल के निधन के बाद हुए हिसार लोकसभा चुनाव में भी अजय को कुलदीप बिश्नोई से करीब 6000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बाद में उनके बेटे दुष्यंत चौटाला ने 2014 में वही हिसार लोकसभा सीट कुलदीप बिश्नोई को 35000 वोटों से हराकर जीती। अजय सिंह चौटाला ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से वकालत और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट (पीएचडी) की है।
2014 चुनाव में डबवाली सीट पर नैना चौटाला को 43.60% वोट मिले और वे देवीलाल परिवार की पहली महिला विधायक बनी। 2009 में इस सीट पर अजय सिंह चौटाला को 47.55% वोट मिले थे।
कांग्रेस की तरफ से इस सीट के सामान्य होने पर दोनों चुनाव डॉ. के वी सिंह ने लड़े. डॉ कमल वीर सिंह ने दोनों चुनावों में क्षेत्र के बड़े राजनीतिक परिवार के सदस्यों को अच्छी टक्कर दी। केवी सिंह ने 2009 में 38.68% वोट लिए थे और 2014 में भी लगभग इतने ही 38.12% वोट लिए। डबवाली से दो चुनावों में हार से पहले डॉ के वी सिंह सिरसा जिले के ही दड़बा कलां सीट से भी दो चुनाव लड़ चुके थे। हालांकि वहां भी उन्हें हार का सामना ही करना पड़ा। केवी सिंह चौधरी देवीलाल के ओएसडी यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी रहे थे। 2005 में मुख्यमंत्री बनते ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी उन्हें अपना ओएसडी बनाया था। 2009 का चुनाव हारने के बाद वे फिर से हुड्डा के ओएसडी (मीडिया) बने थे। एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके डॉ के वी सिंह चौटाला गांव के रहने वाले हैं, जहां के चौधरी देवीलाल और उनका सारा परिवार है।
डबवाली सीट पर भाजपा ने देव कुमार शर्मा को टिकट दी थी। नैना चौटाला और केवी सिंह के बीच के सीधे मुकाबले में भी भाजपा उम्मीदवार 14.27% वोट लेने में कामयाब रहा। जबकि 2009 में यहां पार्टी को 0.77% वोट मिले थे। यह 2014 के चुनाव में भाजपा के पक्ष में प्रदेश व्यापी लहर को दर्शाता है
डबवाली सीट की एक खास बात यह है कि यहां से पिता-पुत्र विधायक रहे हैं। मनीराम चौटाला यहां से 1977, 1987 और 1996 में विधायक बने। जबकि उनके बेटे डॉ सीताराम 2000 और 2005 में विधायक बने।

 


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