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नया हरियाणा

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

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प्रधानमंत्री आवास योजना हरियाणा में लटकी अधर में

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्लॉट आवंटन न होने पर सरकार से जवाब मांगा है.

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7 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

पात्र लोगों को प्लाट आवंटन करने के लिए सीएम प्रतिबद्ध हैं। उनकी कमिटमेंट है कि पात्रों को जहां से जैसे भी होगा भूमि का पर प्रबंध कर प्लॉट दिए जाएंगे। सरकार किसी को भी बेघर नहीं रहने देगी। किंतु प्रधानमंत्री आवास योजना  अधर में लटकी नजर आ रही है। 
हरियाणा सहित देश में नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू है। केंद्र ने इसके तहत मुआवजा देने के लिए फैक्टर वन और टू लगाने का निर्णय राज्य सरकारों पर छोड़ा है। सरकार अगर इस कानून के तहत भूमि अधिग्रहित करती है तो किसान फैक्टर टू के तहत मुआवजा देने की मांग को लेकर पहले आंदोलन करते हैं और सरकार के राजी न होने पर कोर्ट चले जाते हैं। इससे सरकार को जमीन भी नहीं मिलती है और कोर्ट केस का चक्कर अलग से पड़ जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने भूमि अधिग्रहण से तौबा कर ली है। भूमि खरीद पोर्टल पर जमीन देने का पंजीकरण करने वाले किसान भी मोलभाव के दौरान मोटी रकम मांग रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत गांवों में भूमिहीन और बेघरों को 2022 तक छत मुहैया कराने का हरियाणा सरकार का लक्ष्य साकार होता नहीं दिख रहा। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा भूमि बनी हुई है। प्रदेश सरकार भूमिहीन हो चुकी है। उसके पास योजना को सिरे चढ़ाने के लिए सरकारी पंचायती भूमि उपलब्ध नहीं है।
भूमि अधिग्रहण की पेचीदगियों को देखते हुए राज्य सरकार इससे किनारा कर चुकी है। किसानों की जमीनों को अधिग्रहित नहीं किया जा रहा, जबकि सरकार की भूमि खरीद पोर्टल पर स्वेच्छा से भूमि देने को तैयार नहीं है। क्योंकि मोलभाव के बावजूद उन्हें जमीन के उपयुक्त दाम नहीं मिल रहे हैं। जिससे हरियाणा में पीएम आवास योजना के तहत पात्र 1,25,400 परिवारों को मकान बनाने के लिए प्लॉट देना गले की फांस बन गया है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी घरों और भूमिहीन ओं का सर्वे कराकर 5,15,885 लोगों को योजना के तहत पात्र पाया था। इनमें से  3,90,485 पात्रों को सरकार पंचायती भूमि पर प्लॉट आवंटित कर चुकी है। अब बाकी बचे पात्रों के हिस्से में प्लॉट के लिए सिर्फ इंतजार बचा है क्योंकि किसान से जमीन मिल नहीं रही, सरकार भूमि अधिग्रहण करने को तैयार नहीं है और विकास एवं पंचायती राज विभाग के पास सरकार के ऊपर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में 1.25 लाख पात्र बेघरों को अदद छत के लिए सब्र करना पड़ेगा।


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