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नया हरियाणा

गुरूवार, 21 फ़रवरी 2019

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वाड्रा-हुड्डा के खिलाफ जांच तक शुरू नहीं, मनोहर लाल बरत रहे हैं नरमी

आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल 3 महीने से फाइल दबाकर बैठे हैं.

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5 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

शिकोहपुर जमीन घोटाले में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुए 3 महीने से अधिक का समय बीत गया है लेकिन मामले की जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल 3 महीने से फाइल दबाकर बैठे हैं। जनता भी ये कहने लगी है कि होना जाना कुछ है नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेरित ज्यादा लग रहे हैं ये मामले। क्योंकि जिस गति से जांच होनी चाहिए थी, उस गति से नहीं हो रही है। 
मामले में 2 सितंबर को पुलिस आयुक्त गुरुग्राम केके राव ने जांच के लिए सरकार को पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी । यह पत्र पुलिस महानिदेशक के माध्यम से सरकार को भी भेजा जा चुका है। लेकिन पत्र भेजने के 90 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस मामले की जांच शुरू नहीं कर पाई है।
खेड़कीदौला थाना पुलिस को 1 सितंबर को तावडू के गांव राठीवास निवासी सुरेंद्र शर्मा ने रॉबर्ट वाड्रा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ सहित ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ धोखाधड़ी करने व भ्रष्टाचार करने की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं सहित भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस आयुक्त केके राव ने बताया था कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 में हुए संशोधन के कारण ऐसे मामले की जांच शुरू करने से पहले धारा 17A के तहत सरकार से अनुमति लेनी आवश्यक है। इसके लिए 1 सितंबर को मामला दर्ज करते ही पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में सरकार की अनुमति लेने का आग्रह किया गया था। सरकार से अनुमति के बाद ही जांच शुरू होगी। मामले में 90 दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सरकार से जांच के आदेश के लिए अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में मामला बीच में लटक गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अंजू रावत नेगी ने बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत यदि मामला दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है और मामले की जांच के लिए सरकार निर्धारित 90 दिन में अनुमति प्रदान नहीं करती तो आरोपी इसी आधार पर अदालत से जमानत प्राप्त कर सकता है। इसके विपरीत यदि आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है तो निर्धारित 90 दिन की समयावधि इस पर लागू नहीं होगी।


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