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नया हरियाणा

रविवार, 16 दिसंबर 2018

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कालका विधानसभा का इतिहास ( 1967-2014)

कालका विधानसभा से आज तक रहे विधायकों की सूची

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4 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

भौगोलिक रूप से और विधानसभा सीटों की सूची में हरियाणा की शुरुआत कालका क्षेत्र से होती है। हलके को मुख्य रूप से पांच हिस्सों दून, रायतन, मोरनी, कालका-पिंजौर व रायपुररानी में बांटा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटा यह हलका लंबे समय से बाहरी उम्मीदवारों की पसंद रहा है।

कालका विधानसभा से आज तक रहे विधायकों(MLA) की सूची:

Year Winner Party Votes Runner-UP Party Votes
1967 L. Singh IND 12787 K. Lal INC 12086
1968 Kishori Lal INC 22880 Lachhman Singh IND 13522
1972 Kishori Lal INC 22173 Lachman Singh IND 20565
1977 Lachhman Singh JNP 31915 Kishori Lal IND 12338
1982 Lachhman Singh IND 22544 Sukhdev Singh INC 15006
1987 Kanti Parkash Bhalla LKD 38473 Brij Bhushan INC 31001
1991 Purush Bhan INC 29025 Lachhman Singh HVP 24034
1993 Chander Mohan INC 82918 Pradeep Kumar IND 21118
1996 Chander Mohan INC 54929 Sham Lal BJP 34300
2000 Chander Mohan INC 61581 Shyam Lal BJP 46738
2005 Chander Mohan INC 98765 Pardeep Chaudhry INLD 37289
2009 Pardeep Chaudhary INLD 41625 Satvinder Singh Rana INC 20438
2014 Latika Sharma BJP 50,347 Pardeep Chaudhary INLD 31,320

हरियाणा के गठन के बाद कुछ चुनावों तक स्थानीय नेता प्रभावी रहे। लेकिन खासतौर पर 1993 उपचुनाव में चंद्र मोहन के यहां सक्रिय हो जाने के बाद यहां की लोकल लीडरशिप दबाव में आ गई। चंद्रमोहन लगातार चार बार 1993, 1996, 2000 और 2005 में यहां से विधायक बने। चंद्रमोहन अपने पिता चौधरी भजनलाल के मुख्यमंत्री काल में 1993 में पहली बार तब विधायक बने थे जब कालका से कांग्रेसी विधायक पुरुषभान का निधन हो गया था। तब तक पंचकूला जिला क्षेत्र (पहले अंबाला जिले का हिस्सा) की यह एकमात्र सीट थी। 2009 के चुनाव में जब कालका और पंचकुला अलग अलग सीटे बन गई और फिजा प्रकरण के चलते कांग्रेस ने चंद्रमोहन को टिकट नहीं दी तो एक अन्य बाहरी उम्मीदवार सतविंदर राणा यहां कांग्रेस की टिकट पर लड़े उस चुनाव में इनेलो के प्रदीप चौधरी जीते थे।

2014 से पहले भाजपा ने कालका सीट कभी नहीं जीती थी। 1996 और 2000 में पार्टी के उम्मीदवार श्यामलाल चंद्र मोहन के मुकाबले दूसरे नंबर पर जरूर रहे थे और यही भाजपा का यहां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस बार मोदी लहर के चलते कई स्थानीय नेता भाजपा की टिकट लेने के चक्कर में थे, लेकिन कालका का इतिहास दोहराते हुए यहां से लतिका शर्मा के रूप में बाहरी उम्मीदवार ही सामने आया। लतिका शर्मा अंबाला की रहने वाली हैं और कालका ही नहीं भाजपा के तमाम नेताओं, कार्यकर्ताओं के लिए उनका नाम बेहद नया था। वे बिहार के नेता रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी से जुड़ी रही थी और मोदी सरकार में एनडीए का हिस्सा होने की वजह से पासवान ने यह टिकट उन्हें दिलवाई थी। सीधा टिकट लेकर ही कालका पहुंची लतिका शर्मा ने चुनाव प्रचार तेजी से किया और मतदान से चंद दिन पहले ही वे मुख्य प्रतिद्वंदी प्रदीप चौधरी पर हावी हो गई थी। वे वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज के भी काफी नजदीक हैं और सुषमा उनके लिए वोट मांगने भी आई थी। लतिका शर्मा एक सुशिक्षित महिला है और उनके पति व्यवसायी हैं। भाजपा को 2009 में यहां महज 2.07% वोट मिले थे लेकिन लतिका शर्मा को 40.42% वोट पड़े। यह ऐतिहासिक बदलाव था।
इनेलो की तरफ से गुर्जर नेता प्रदीप चौधरी ही लंबे समय से कालका का चुनाव लड़ते आ रहे हैं। प्रदीप चौधरी ने पहला चुनाव 1993 में निर्दलीय लड़ा था जब उन्होंने यहां हुए उपचुनाव में कांग्रेस के चंद्र मोहन को टक्कर दी थी। 1996 में उन्होंने फिर समता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहे। 2000 में गठबंधन में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई थी। जिसके बाद 2005 में प्रदीप चौधरी ने फिर से इनेलो की टिकट पर चंद्र मोहन को चुनौती दी लेकिन फिर करारी हार मिली। 2009 में नई सीट पंचकूला बन जाने और चंद्र मोहन को टिकट न मिल पाने का फायदा प्रदीप चौधरी को हुआ और वे विधायक बन गए। 2014 में टिकट को लेकर कुछ युवा नेताओं से उन्हें चुनौती मिली लेकिन सबसे मजबूत उम्मीदवार होने के नाते टिकट उन्हें ही दी गई। हालांकि बीजेपी की लहर के चलते उनके वोट काफी घटे और 2009 के 44% वोटों के मुकाबले उन्हें 25 फ़ीसदी वोट ही मिले। प्रदीप पंचकूला और आसपास की तरह के व्यवसाय करते हैं।

कालका सीट कांग्रेस के लिए एक मजबूत सीट रही है और 2014 से पहले यहां हुए 13 चुनावों में से 7 कांग्रेस ने ही जीते थे। 2009 में प्रदीप चौधरी की जीत से पहले लगातार 5 बार कांग्रेस ने यहां परचम फहराया था। लेकिन 2014 में कांग्रेस ने देश और प्रदेश की तरह यहां भी धरातल देख लिया। 13 चुनावों में से 1977 के बाद यह दूसरा चुनाव रहा जब कांग्रेसी यहां तीसरे स्थान पर खिसक गई। पार्टी के टिकटार्थी तो कई थे लेकिन आलाकमान को मनवीर गिल की सबसे मजबूत लगी। पंचकूला नगर निगम चुनावों का जाना माना चेहरा रेकी मनवीर गिल लछमन सिंह के परिवार से हैं जो 1967, 1977 और 1982 में कालका से विधायक रहे। लछमन सिंह दो बार निर्दलीय और 1977 में जनता पार्टी के विधायक बने थे। लेकिन मनवीर गिल का राजनीतिक सफर कांग्रेस पार्टी के साथ ही ज्यादा रहा। 1993 के कालका उपचुनाव के समय चुनाव में खड़े होकर चंद्रमोहन की मदद करने के साथ ही यह परिवार कांग्रेस में आ गया। जिसके बाद 1996 में लछमन सिंह को भजन लाल ने राज्यसभा का सदस्य भी बनवाया। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरी मनवीर गिल ने मुश्किल हालात में कोशिश तो काफी की लेकिन पार्टी के 2009 के 21.60% वोटों के मुकाबले 15.36% वोट ही ले पाई।
 कालका सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने सतविंदर सिंह राणा को टिकट दी थी जिन्होंने यहां से 2009 का चुनाव कांग्रेस के लिए लड़ा था। राणा इस बार 7.88 फ़ीसदी वोट ही ले पाए। सतविंदर राणा 1996 में कांग्रेस तिवारी और 2005 में कांग्रेस की टिकट पर कैथल जिले की राजौंद सीट से विधायक बने थे। 

वहीं इस सीट पर एक अन्य चर्चित उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी शक्ति रानी थी। हरियाणा जन चेतना पार्टी की उम्मीदवार शक्ति रानी शर्मा को महज 6 फ़ीसदी वोट मिले।
कालका उन सीटों में से थी जिन्हें चुनाव शुरू होने से लेकर मतदान से हफ्ता भर पहले इनेलो अपने लिए सुरक्षित मानकर चल रही थी। पार्टी की तरफ से यहां बड़े नेताओं ने ज्यादा प्रचार करना भी जरूरी नहीं समझा। मोदी लहर का असर इस तरह की सीटों पर ही सबसे ज्यादा रहा जहां स्थानीय नेतृत्व ज्यादा मजबूत नहीं है। बाहरी उम्मीदवार होने के बावजूद यहां भाजपा के वोट 2 फ़ीसदी से बढ़कर 40 फ़ीसदी हो गए और पार्टी ने यहां से पहली बार विधायक बनाया।

लतिका शर्मा पेशे से एडवोकेट हैं और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। वह नारायणगढ़ की रहने वाली हैं। लतिका शर्मा भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। शर्मा को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का करीबी माना जाता है। 2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट की दावेदारी वीरेंद्र भाऊ द्वारा भी की गई थी। इसके अलावा पूर्व भारतीय गेंदबाज चेतन शर्मा ने कालका विधानसभा सीट के लिए दावेदारी पेश की थी। जानकारी के मुताबिक कालका विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण वोट ज्यादा होने की वजह से भाजपा द्वारा शर्मा को मैदान में उतारा गया।


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