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नया हरियाणा

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

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सरदार वल्लभ भाई पटेल के लिए राष्ट्र सबसे पहले

महात्मा गांधी के पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रति लगाव के बावजूद किसी भी कांग्रेस कमिटी ने 1946 में नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया। महात्मा गांधी के पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रति लगाव के बावजूद किसी भी कांग्रेस कमिटी ने 1946 में नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया।

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15 दिसंबर 2017

नया हरियाणा

सरदार वल्लभ भाई पटेल (31 अक्टूबर, 1875 - 15 दिसंबर, 1950) भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने। बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि प्रदान की। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है।
सरदार पटेल का महात्मा गांधी से बेहद लगाव था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब महात्मा गांधी की हत्या की गई तब इस खबर को सुनकर पटेल की सेहत भी खराब रहने लगी। यहां तक कि गांधीजी की मौत के दो महीने बाद ही उन्हें हार्ट अटैक भी हुआ।
राष्ट्र सबसे पहले
महात्मा गांधी के पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रति लगाव के बावजूद किसी भी कांग्रेस कमिटी ने 1946 में नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया। दूसरी ओर सरदार पटेल का नाम पूरे बहुमत के साथ प्रस्तावित किया गया। नेहरू ने साफ कर दिया कि वह किसी के मातहत काम नहीं करेंगे। गांधी जी को लगा कि कहीं नेहरू कांग्रेस को तोड़ न दें इससे अंग्रेजों को भारत को आजाद न करने का बहाना मिल सकता है। सरदार पटेल के मन में गांधी जी के लिए बेहद इज्जत थी, इसलिए उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया।
पटेल ने नवंबर 1950 में पंडित नेहरू को पत्र लिखकर भारत के उत्तर में चीन के संभावित खतरे के बारे में आगाह किया था। दुर्भाग्य से पंडित नेहरू ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अंत में 1962 की चीन की लड़ाई के बारे में हम जानते ही हैं।


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