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नया हरियाणा

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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हरियाणा मेयर चुनाव : बीजेपी ने साधे जातिगत समीकरण

कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेकर अपनी हार मान ली है.

Gautam Sardana from Hisar, Manmohan Goyal from Rohtak, Madan Chauhan from Yamunanagar, Navneet Kaur from Panipat, Renu Bala from Karnal, BJP candidate for Mayor post, naya haryana, नया हरियाणा

2 दिसंबर 2018

नया हरियाणा

नगर निगम के चुनाव पहली बार हरियाणा में प्रत्यक्ष तौर पर हो रहे हैं और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इन चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच काफी रोचक मुकाबला होगा. परंतु कांग्रेस ने सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है. राजनीतिक तौर पर यह निर्णय कांग्रेस को बैकफूट पर लाकर खड़ा कर देता है. अगर कांग्रेस चुनाव लड़ती तो सभी की नजरें रोहतक, करनाल और हिसार सीटों पर लगी होती, क्योंकि ये तीनों ही बड़े नेताओं के गढ़ माने जाते हैं.
बीजेपी ने घोषित किए नाम
हिसार से गौतम सरदाना,रोहतक से मनमोहन गोयल, यमुनानगर से मदन चौहान,  पानीपत से नवनीत कौर और करनाल से रेनू बाला होंगे भाजपा के मेयर पद के उम्मीदवार.
बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी के मेयर प्रत्याशियों के नामों में रोहतक नगर निगम में मनमोहन गोयल, करनाल से रेनू बाला, हिसार से गौतम सरदाना, पानीपत से अवनीत कौर और यमुनानगर से मदन चौहान को मेयर पद का भाजपा प्रत्याशी तय किया गया है. इन प्रत्याशियों के नामों को फाइनल करने में भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पूरा इस्तेमाल किया है. पांचो सीटों पर अलग-अलग बिरादरी के मेयर प्रत्याशी उतार कर भाजपा ने इन बिरादरिओं को साधने का काम किया है. 

धर्म और जाति की राजनीति किसी भी देश और समाज के लिए भले ही हितकारी न मानी जाती हो परंतु भारतीय राजनीति की ये कड़वी हकीकत है कि यहां जातिगत और धर्मगत राजनीति ही सर्वोपरि है. किसी दल को कम तो किसी दल को ज्यादा पर सभी दलों को इसमें महारत हासिल हैं. हालांकि दावा सभी दल ये करते हैं कि वो धर्म और जाति की राजनीति से दूर हैं. परंतु ये बात ब्याह के गीतों की तरह होती है, जहां सारे गीत साच्चे नहीं होते. खैर.
रोहतक से मनमोहन गोयल को प्रत्याशी बनाया गया है. रोहतक से विधायक मनीष ग्रोवर पंजाबी जाति से हैं तो रोहतक से बीजेपी ने बणिया बिरादरी को टिकट दी है. पंजाबी और बणिया बिरादरी भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है. इसी कारण कुछ विश्लेषक बीजेपी को व्यापारियों की पार्टी भी कहते हैं. हालांकि व्यापारी वर्ग का आर्थिक सहयोग लगभग सभी दलों को मिलता रहा है.
हरियाणा में बीजेपी से जाट वोटर काफी मात्रा में खिसका हुआ दिख रहा है, वहीं बीजेपी शहरी वोटर के साथ-साथ गांवों के गैर जाट वोटरों को साधने में सफल होती हुई दिख रही है. खासकर ओबीसी वोटर बीजेपी की तरफ शिफ्ट होता हुआ दिख रहा है.
ये खिसकता और सटता हुआ दिखने वाले वोटर का विश्लेषण कितना सटीक है और कितना भ्रामक. इसका पता तो चुनाव नतीजे ही तय करेंगे.
रोहतक के मनमोहन गोयल पूर्व मंत्री स्वर्गीय सेठ किशन दास के बेटे हैं. पूर्व सांसद नवीन जिंदल के बहनोई हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली थी. हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले रोहतक में बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ बना रही है. इसी का परिणाम है कि कांग्रेस के पूर्व सीएम हुड्डा ने पार्टी सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसले लिया. दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ना चाहते थे. खैर ये तो कांग्रेस ही जाने कि उसने किस रणनीति के तहत नगर निगम चुनाव में सिंबल पर नहीं लड़ने का फैसला लिया है. हो सकता है कि कांग्रेस की इसके पीछे कोई खास रणनीति रही हो. जिसका फायदा उसे भविष्य में मिलने की संभावना हो. फिलहाल कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है.
यमुनानगर से मदन चौहान वर्तमान में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. अपने क्षेत्र में सभी वर्गों में मजबूत पकड़ से उनकी दावेदारी मजबूत हुई थी. दूसरी तरफ बीजेपी ने हरियाणा के ओबीसी वोटरों पर अपनी नजर पैनी बनाई हुई है. इस ओबीसी वोटरों के आंकड़ों के फेर में पड़कर ही राजकुमार सैनी का दिमाग भन्ना गया था. उनके भीतर ओबीसी लीडर बनने की लालसा इतनी तीव्र हो गई थी कि उन्होंने जाट समाज के बारे में उलटे सीधे बयान तक देने शुरू कर दिए थे. उन्हें लगता है कि वो ओबीसी वर्ग के हरियाणा में एकमात्र चेहरे हैं और उन्हें काफी पसंद किया जाता है. जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे बयानों में लोगों को मनोरंजक तत्त्व की पुष्टि भले ही जितनी मर्जी होती रहे, पर राजनीतिक तौर पर यह नकारात्मक राजनीति जनता को ज्यादा दिन पंसद नहीं आती.
करनाल से रेनू बाला गुप्ता पिछले 4 साल से भाजपा से जुड़ी हैं. पुराने अनुभव और शहर में मजबूत पकड़ ने इन्हें टिकट दिलाई है. दूसरी तरफ अगर जातिगत समीकरण देखें तो भाजपा ने यहां पंजाबी विधायक व सीएम मनोहर लाल के कारण बनिया बिरादरी को तवज्जों दी है.
हिसार से गौतम सरदाना को नगर निगम मेयर के प्रत्याशी के तौर पर चुना गया है. 2009 में निर्दलीय और 2014 में हजकां की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. इस वर्ष 28 अक्टूबर को भाजपा में शामिल हुए और 1 महीने में ही इन्होंने टिकट भी पा लिया. हिसार में कांग्रेस के दो दमदार नेताओं सावित्री जिंदल और कुलदीप बिश्नोई की पकड़ को ढीली करने के लिए इन्हें टिकट दी गई है. उम्मीद लगाई जा रही थी कि हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला की तरफ से यहां मजबूत टक्कर दी जा सकती है, परंतु उनकी तरफ से इस मामले में कोई पहल अब तक नजर नहीं आ रही है. कांग्रेस पहले ही सिंबल पर चुनाव न लड़कर अपनी हार मान चुकी है.
पानीपत से अवनीत कौर को बीजेपी ने नगर निगम में मेयर प्रत्याशी के तौर पर खड़ा किया है. बीकॉम और बीएड पास अवनीत के पिता भूपेंद्र सिंह पानीपत नगर निगम के पूर्व मेयर रहे हैं. अवनीत कौर की समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका रही है. इन्हें इनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण ही मेयर का टिकट मिला है.
राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी 5 मेयर सीट पर विजयी होगी, क्योंकि कांग्रेस ही इन शहरी सीटों पर बीजेपी को टक्कर दे सकती थी. उसने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेकर 5 सीटों को बीजेपी की झोली में डाल दिया है. 
क्या कांग्रेस की यह रणनीति आने वाले लोकसभा चुनावों में भारी पड़ सकती है?
क्या पूर्व सीएम हुड्डा का सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा चुनाव पर असर डाल सकता है?
सवाल ये तो भी बनता है कि क्या कांग्रेस की पूर्व विधायक सावित्री जिंदल व पूर्व सांसद नवीन जिंदल की नजदीकियां बीजेपी से बढ़ गई हैं, क्योंकि नवीन जिंदल के बहनोई को रोहतक सीट से बीजेपी ने मेयर की टिकट दी है.
पिछले दिनों काफी जोर शोर से कहा जा रहा था कि बीजेपी अपना वजूद शहरों में भी खो रही है, क्या इन 5 सीटों पर बीजेपी की जीत बीजेपी कार्यकर्ताओं में हौंसला बढ़ाने का काम करेगी और कांग्रेस के वर्करों को हौंसलों में कमी साफ दिखेगी.

नगर निगम और नगर पालिका के चुनाव
सीएम सिटी करनाल, रोहतक, यमुनानगर, पानीपत और हिसार नगर निगम तथा जाखल मंडी व पूंडरी नगर पालिकाओं के चुनाव के लिए नामांकन आज से शुरू हो गया है।

मेयर व पार्षद पदों के उम्मीदवार 6 दिसंबर तक अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे।

2 दिसंबर रविवार को नामांकन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उसके बाद 6 दिसंबर तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी। सुबह 11 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक ही नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। 7 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा 8 दिसंबर को उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र वापस ले सकेंगे।। 16 दिसंबर को मतदान होगा। यदि कहीं पुनर्मतदान की जरूरत पड़ी तो उसके लिए 18 दिसंबर निर्धारित की गई है।

राज्य चुनाव आयुक्त डा. दलीप सिंह के अनुसार 16 दिसंबर को सुबह साढ़े सात बजे से शाम साढ़े चार बजे तक वोट डाले जा सकेंगे। 19 दिसंबर को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी और उसकी दिन नतीजे घोषित हो जाएंगे। राज्य में पांच नगर निगमों के मेयर के चुनाव पहली बार सीधे हो रहे हैं। नगर पालिका के प्रधानों का चयन पार्षद करेंगे।
 


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